Anant Singh News: बिहार के मोकामा से बाहुबली विधायक अनंत सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं. उन्होंने हाल ही में ऐलान किया कि वह अब विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. उनके इस फैसले से कई सवाल उठ रहे हैं. क्या अनंत सिंह उम्रदराज हो गए हैं?
क्या उनका शरीर अब राजनीति के दबाव से नहीं जूझ पा रहा है? या फिर क्या यह फैसला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से नाराजगी के कारण लिया गया है? इस कदम से मोकामा की राजनीति में क्या बदलाव आएगा और क्या सूरजभान सिंह जैसे बाहुबली नेताओं का कद बढ़ेगा?
अनंत सिंह का राजनीतिक सफर
अनंत सिंह का राजनीति में आना एक दिलचस्प कहानी है. उन्होंने अपनी विरासत अपने बड़े भाई दिलीप सिंह से प्राप्त की, जो लालू यादव के राज में मंत्री रह चुके थे. भाई की मौत के बाद अनंत सिंह ने उनकी विरासत को संभाला. 2005 में जेडीयू के टिकट पर मोकामा से विधायक बने और उसके बाद से उन्होंने लगातार जीत हासिल की. 2005, 2010, 2015, 2020 और 2025 के चुनाव में उन्होंने मोकामा से जीत दर्ज की. पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने मोकामा के एक और बाहुबली, सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी को हराया था.
अनंत सिंह बिहार के उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने निर्दलीय, जेडीयू और राजद तीनों पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की है. दिलचस्प यह भी है कि 2015, 2020 और 2025 में भी उन्होंने जेल में रहते हुए चुनाव जीते, जो उनकी जनता के बीच मजबूत पकड़ को दिखाता है. उनका संघर्ष और जुझारू अंदाज मोकामा की राजनीति में एक अलग पहचान बना चुका है.
अनंत सिंह के जीवन के संघर्ष
अनंत सिंह का जीवन कई जानलेवा हमलों और संघर्षों से भरा हुआ है. 2004 में उनके विरोधियों ने खिड़की से गोली चलाई थी, जिससे उन्हें गंभीर चोट आई. डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था, लेकिन उनके भाई ने डॉक्टर को गन पॉइंट पर धमकाकर ऑपरेशन करवाया, जिससे उनकी जान बची. इसके अलावा, 2025 में मोकामा में उनकी सोनू-मोनू गैंग से हुई लड़ाई भी चर्चाओं में रही थी.
उनके काफिले पर 70-100 राउंड गोलियां चलीं, लेकिन अनंत सिंह फिर भी बच गए. उनकी छवि मोकामा और बाढ़ के इलाकों में ‘छोटे सरकार’ की बन गई थी. एके-47 रखने, घर में अजगर पालने और घोड़ों के शौक जैसी कई कहानियां बिहार के हर घर में मशहूर हैं.
अनंत सिंह का चुनावी राजनीति से अलविदा
सोमवार को राज्यसभा चुनाव में वोट गिराने के बाद अनंत सिंह ने स्पष्ट किया कि वह अब विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वह लोकसभा चुनाव की तैयारी करेंगे, तो उन्होंने सीधे तौर पर इनकार नहीं किया, लेकिन सारा फैसला नीतीश कुमार पर छोड़ दिया. उनका कहना था, “हम तो जेल में हैं, नीतीश कुमार हमारे मालिक हैं, जो वो तय करेंगे वही होगा.”
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अनंत सिंह अपनी मोकामा सीट से अपने बेटे को चुनावी मैदान में उतार सकते हैं, जबकि वह खुद लोकसभा चुनाव की तैयारी कर सकते हैं. अब सवाल यह उठता है कि क्या उनके इस कदम से मोकामा की राजनीति में कोई नया मोड़ आएगा?
क्या सूरजभान सिंह की किस्मत चमकेगी?
अनंत सिंह की उम्र अब करीब 65 साल हो चुकी है और मोकामा से छह बार विधायक रह चुके हैं. उन पर हत्या, अपहरण और आर्म्स एक्ट जैसे दर्जनों मामले दर्ज हैं. 2019 में उनके घर से एके-47 और हैंड ग्रेनेड मिलने के कारण उन्हें सजा भी हुई थी, लेकिन बाद में हाईकोर्ट से उन्हें राहत मिली. इस वक्त वह बेऊर जेल में बंद हैं, जहां से उनका राजनीतिक भविष्य तय नहीं है.
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अनंत सिंह के विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने से मोकामा के और बाहुबली नेता सूरजभान सिंह की किस्मत चमकेगी? क्या सूरजभान सिंह, जो अनंत सिंह के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं, अब मोकामा में अपना प्रभाव बढ़ा सकते हैं?
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