Bab El Mandeb: मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव अब दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डालने लगा है. पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा और अब बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी संकट में आ गया है. यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया है. इसके बाद इस रास्ते से गुजरने वाले तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों पर खतरा बढ़ गया है.
अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ सकता है.
क्या है पूरा मामला?
हूती विद्रोहियों का कहना है कि सऊदी अरब ने उनके नियंत्रण वाले बंदरगाहों और हवाई अड्डों की घेराबंदी कर रखी है. इसके जवाब में उन्होंने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू करने का ऐलान किया है.
बताया जा रहा है कि खतरे को देखते हुए कई तेल टैंकरों ने अपना रास्ता बदल लिया. वहीं हूती विद्रोहियों ने कुछ जहाजों को निशाना बनाने का भी दावा किया है. इससे इस समुद्री रास्ते पर तनाव और बढ़ गया है.
बाब-अल-मंदेब क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
बाब-अल-मंदेब दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है. यह लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है.
यूरोप, एशिया और पश्चिम एशिया के बीच आने-जाने वाले हजारों जहाज इसी रास्ते से गुजरते हैं. इसलिए यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर पूरी दुनिया के व्यापार पर पड़ सकता है.
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में अगर यह समुद्री रास्ता प्रभावित होता है, तो सबसे पहले तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है.
अगर तेल की सप्लाई कम हुई, तो पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम बढ़ सकते हैं. इससे देश में महंगाई भी बढ़ने की आशंका रहेगी.
सामान की ढुलाई होगी महंगी
अगर जहाजों को बाब-अल-मंदेब और लाल सागर का रास्ता छोड़कर अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप से जाना पड़ा, तो यात्रा 10 से 14 दिन लंबी हो सकती है.
इससे माल ढुलाई का खर्च, बीमा और ट्रांसपोर्ट लागत काफी बढ़ जाएगी. इसका असर भारत में आने वाले आयात और विदेश भेजे जाने वाले सामान दोनों पर पड़ेगा.
भारतीय निर्यात को भी झटका
भारत से विदेश भेजे जाने वाले बासमती चावल, चाय, कपड़े, दवाइयां और रसायन जैसे उत्पाद देर से पहुंच सकते हैं.
ढुलाई महंगी होने से भारतीय सामान की कीमत भी बढ़ सकती है. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है.
दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
अगर बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई कम हो सकती है.
इसका असर तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. कई देशों में ईंधन महंगा हो सकता है और महंगाई बढ़ने का खतरा भी रहेगा.
कैसे शुरू हुआ यह विवाद?
यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित सरकार के बीच संघर्ष कई सालों से चल रहा है. हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच फिर तनाव बढ़ गया.
इसके बाद हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया. अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि आगे हालात कैसे बदलते हैं और इसका वैश्विक तेल बाजार पर कितना असर पड़ता है.
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