दिल्ली नगर निगम में फिर BJP का मेयर बनना लगभग तय, AAP ने मानी हार; कांग्रेस का हाल बेहाल

Delhi Mayor Election: दिल्ली में नगर निगम का नया मेयर चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इस बार भी बीजेपी की जीत लगभग तय मानी जा रही है. रोहिणी वार्ड से पार्षद और वर्तमान में लीडर ऑफ द हाउस प्रवेश वाही को मेयर पद के लिए पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया है.

BJP will become mayor again in Delhi Municipal Corporation AAP accepts defeat Congress
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Delhi Mayor Election: दिल्ली में नगर निगम का नया मेयर चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इस बार भी बीजेपी की जीत लगभग तय मानी जा रही है. रोहिणी वार्ड से पार्षद और वर्तमान में लीडर ऑफ द हाउस प्रवेश वाही को मेयर पद के लिए पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया है. वहीं आनंद विहार वार्ड की पार्षद मोनिका पंत को डिप्टी मेयर पद के लिए मैदान में उतारा गया है. दोनों नेताओं ने 23 अप्रैल को अपने-अपने नामांकन दाखिल किए थे, जिसके बाद से ही चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है.

दिल्ली के इस मेयर चुनाव में तस्वीर काफी हद तक साफ नजर आ रही है. संख्या बल के हिसाब से बीजेपी मजबूत स्थिति में है और उसके उम्मीदवार प्रवेश वाही के मेयर बनने की संभावना काफी ज्यादा है. मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहा जा रहा है कि चुनाव सिर्फ औपचारिकता भर रह गया है और नतीजा पहले से तय माना जा रहा है.

कांग्रेस ने भी उतारे उम्मीदवार, लेकिन राह मुश्किल

बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस ने भी अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं. पार्टी ने कबीर नगर वार्ड के पार्षद मोहम्मद जरिफ को मेयर पद के लिए और मुबारिकपुर वार्ड के पार्षद राजेश कुमार गुप्ता को डिप्टी मेयर पद के लिए उम्मीदवार बनाया है. हालांकि, कांग्रेस के पास निगम में बहुत कम संख्या में पार्षद हैं, जिसकी वजह से उसकी जीत की संभावना बेहद कम मानी जा रही है. यह चुनाव कांग्रेस के लिए ज्यादा एक औपचारिक चुनौती जैसा नजर आ रहा है.

AAP ने चुनाव से बनाई दूरी, बढ़ी चर्चा

इस बार के मेयर चुनाव की सबसे खास बात यह है कि आम आदमी पार्टी (AAP) ने खुद को पूरी तरह इस चुनाव से अलग कर लिया है. पार्टी ने न तो मेयर पद के लिए और न ही डिप्टी मेयर पद के लिए कोई उम्मीदवार उतारा है. 

AAP का यह फैसला काफी चर्चा में है, क्योंकि पिछले वर्षों में पार्टी इन चुनावों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेती रही है. AAP से अलग होकर बनी नई पार्टी इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (IVP) ने भी इस चुनाव में कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है. ऐसे में मुकाबला काफी हद तक एकतरफा हो गया है.

संख्या बल में बीजेपी का पलड़ा भारी

दिल्ली नगर निगम के कुल 250 पार्षदों में बीजेपी के पास 123 पार्षद हैं. आम आदमी पार्टी के पास 100 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के पास केवल 9 पार्षद हैं. मेयर चुनाव में सिर्फ पार्षद ही नहीं, बल्कि सांसद और विधायक भी वोट डालते हैं, जिससे आंकड़े और भी अहम हो जाते हैं.

इस हिसाब से देखा जाए तो बीजेपी के पास करीब 141 वोट माने जा रहे हैं, जबकि AAP के पास लगभग 106 वोट हैं. कांग्रेस का आंकड़ा इससे काफी पीछे है. ऐसे में बीजेपी के उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है.

लगातार दूसरे साल बीजेपी का मेयर बनने की तैयारी

अगर चुनाव नतीजे अनुमान के मुताबिक आते हैं, तो यह लगातार दूसरा साल होगा जब दिल्ली को बीजेपी का मेयर मिलेगा. इससे पहले भी बीजेपी ने निगम में अपनी मजबूत पकड़ दिखाई थी और अब एक बार फिर पार्टी सत्ता में वापसी करती नजर आ रही है.

दिल्ली की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा

इस मेयर चुनाव के नतीजे दिल्ली की राजनीति पर भी असर डाल सकते हैं. AAP के चुनाव से दूरी बनाने के फैसले और बीजेपी की मजबूत स्थिति आने वाले समय में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं. 

वहीं कांग्रेस के लिए यह चुनाव अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का एक मौका जरूर है, लेकिन जीत की राह उसके लिए अभी भी काफी मुश्किल नजर आ रही है.कुल मिलाकर, दिल्ली का यह मेयर चुनाव इस बार ज्यादा मुकाबले वाला नहीं, बल्कि संख्या बल का खेल बन गया है, जिसमें बीजेपी साफ तौर पर आगे दिखाई दे रही है.

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