Patna Industrial Park: बिहार की राजधानी पटना अब सिर्फ प्रशासनिक और शैक्षणिक केंद्र तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि तेजी से एक मजबूत औद्योगिक हब के रूप में अपनी पहचान बना रही है. जिले में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है.
पाटलिपुत्र, फतुहा और बिहटा के बाद अब बख्तियारपुर में पटना जिले का चौथा और अब तक का सबसे आधुनिक औद्योगिक पार्क विकसित करने की तैयारी शुरू हो चुकी है. इसके लिए जिला प्रशासन ने करीब 500 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से आगे बढ़ा दिया है.
बख्तियारपुर में औद्योगिक विकास की नई शुरुआत
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्तावित औद्योगिक पार्क को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा, ताकि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के निवेशकों को आकर्षित किया जा सके. बख्तियारपुर अंचल के चार प्रमुख मौजों को इसके लिए चिन्हित किया गया है, जहां बड़े पैमाने पर उद्योगों की स्थापना की जाएगी. यह परियोजना न सिर्फ पटना जिले बल्कि पूरे मध्य बिहार के औद्योगिक भविष्य को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है.
चार मौजों में होगा 500 एकड़ भूमि का अधिग्रहण
जिला प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, सैदपुर, बहादुरपुर, गंगापुर नरौली और तारा चंदपुर मौजा में कुल 500 एकड़ जमीन औद्योगिक पार्क के लिए अधिग्रहित की जाएगी. इसको लेकर अपर समाहर्ता राजस्व अनिल कुमार ने बख्तियारपुर के अंचलाधिकारी को पत्र भेजकर प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं.
जिला भू-अर्जन कार्यालय के दो अमीनों को जमीन की पहचान, मापी और नजरी नक्शा तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. नजरी नक्शा तैयार होते ही आगे की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.
किसानों को मिलेगा सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा
प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि जमीन अधिग्रहण पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा. नजरी नक्शा तैयार होने के बाद संबंधित किसानों से आवेदन लिए जाएंगे. इसके साथ ही सरकार की नीति के अनुसार किसानों को सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा दिया जाएगा.
अधिकारियों का कहना है कि किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा, ताकि उन्हें किसी तरह की आर्थिक या कानूनी परेशानी का सामना न करना पड़े. उचित मुआवजा मिलने से किसानों की सहमति के साथ परियोजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
रोजगार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे
बख्तियारपुर में औद्योगिक पार्क बनने के बाद इलाके की तस्वीर पूरी तरह बदलने की उम्मीद है. यहां लघु, मध्यम और बड़े उद्योगों की स्थापना की जाएगी, जिससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा.
विशेष रूप से फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स और एग्रो-बेस्ड इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की योजना है. इसके अलावा, राज्य सरकार स्टार्टअप्स के लिए भी विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है, ताकि बिहार के युवा उद्यमियों को अपने राज्य में ही कारोबार शुरू करने का अवसर मिल सके.
बेहतर कनेक्टिविटी बनेगी सबसे बड़ी ताकत
इस औद्योगिक पार्क की सबसे बड़ी खासियत इसकी रणनीतिक लोकेशन मानी जा रही है. बख्तियारपुर क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे नेटवर्क के बेहद करीब स्थित है. इससे कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार माल की ढुलाई बेहद आसान और किफायती होगी.
अधिकारियों के मुताबिक, बेहतर सड़क और रेल कनेक्टिविटी की वजह से निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है. यही कारण है कि पटना जिले के आसपास उद्योग लगाने की मांग तेजी से बढ़ी है.
निवेश बढ़ा तो बिक्रम में भी बनेगा औद्योगिक पार्क
उद्योग विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पटना जिले के मौजूदा पाटलिपुत्र, फतुहा और बिहटा औद्योगिक क्षेत्रों में अब जमीन की उपलब्धता लगभग समाप्त हो चुकी है. अधिकतर निवेशक पटना के आसपास ही उद्योग स्थापित करना चाहते हैं, ताकि उन्हें बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बाजार की सुविधा मिल सके.
इसी को ध्यान में रखते हुए बख्तियारपुर में नया औद्योगिक पार्क विकसित किया जा रहा है. भविष्य में यदि निवेशकों की संख्या और बढ़ती है, तो बिक्रम समेत अन्य अंचलों में भी औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना पर विचार किया जाएगा.
पटना के औद्योगिक नक्शे को मिलेगी मजबूती
बख्तियारपुर में चौथे औद्योगिक पार्क के निर्माण से पटना जिला औद्योगिक दृष्टि से और मजबूत होगा. यह परियोजना न केवल निवेश को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और बुनियादी ढांचे के विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी. कुल मिलाकर, बख्तियारपुर में प्रस्तावित यह औद्योगिक पार्क पटना और बिहार के औद्योगिक भविष्य के लिए एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है.
यह भी पढ़ें- 'कांग्रेस द्वारा पैदा की गई समस्याओं का समाधान कर रही डबल इंजन सरकार, असम में विपक्ष पर बरसे PM मोदी