बिहार को बड़ी सौगात! राज्य को मिला पहली 'बुलेट ट्रेन', अश्विनी वैष्णव ने हाई-स्पीड कॉरिडोर की दी जानकारी

Bihar First Bullet Train: बिहार के लोगों के लिए रेल कनेक्टिविटी के मोर्चे पर एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल की तैयारी हो रही है. केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि राज्य को जल्द ही पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन की सौगात मिल सकती है.

Bihar got its first Bullet Train Ashwini Vaishnav Varanasi-Patna-Siliguri high-speed corridor
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Bihar First Bullet Train: बिहार के लोगों के लिए रेल कनेक्टिविटी के मोर्चे पर एक बड़ी और ऐतिहासिक पहल की तैयारी हो रही है. केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि राज्य को जल्द ही पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन की सौगात मिल सकती है. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी साझा की. 

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर बिहार की राजधानी पटना से होकर गुजरेगा और उत्तर प्रदेश, बिहार व पश्चिम बंगाल जैसे तीन बड़े राज्यों को एक ही हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ेगा.

वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड कॉरिडोर

रेल मंत्री के मुताबिक प्रस्तावित बुलेट ट्रेन वाराणसी से शुरू होकर पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक जाएगी. यह रूट पूर्वी भारत के बड़े शहरों को जोड़ने वाला एक अहम कॉरिडोर माना जा रहा है. उन्होंने कहा कि इस परियोजना के शुरू होने से बिहार को देश के हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से सीधे जुड़ने का मौका मिलेगा और यह राज्य के लिए एक “गेम-चेंजर” साबित हो सकता है.

अभी यह प्रोजेक्ट डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के चरण में है. रूट फाइनल करने, जमीन की जरूरतों का आकलन करने और तकनीकी पहलुओं को तय करने के लिए सर्वे का काम जारी है. परियोजना पूरी होने के बाद यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर लंबी दूरी की यात्रा को कहीं ज्यादा तेज और सुविधाजनक बना देगा.

बिहार में एलिवेटेड ट्रैक और हाई-स्पीड डिजाइन

इस बुलेट ट्रेन रूट के तहत बिहार के भीतर लगभग 260 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड ट्रैक प्रस्तावित है. हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को 350 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है. इसका मकसद यह है कि भविष्य में तकनीकी अपग्रेड के साथ ट्रेनों की गति और क्षमता बढ़ाई जा सके.

बिहार में मौजूदा ट्रेनों का विस्तार

रेल मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि बिहार में पहले से आधुनिक ट्रेनों का नेटवर्क बढ़ाया जा रहा है. राज्य में इस समय 14 वंदे भारत एक्सप्रेस और 21 अमृत भारत ट्रेनें संचालित हो रही हैं. सरकार का फोकस राज्य में तेज, सुरक्षित और आधुनिक रेल सेवाओं के विस्तार पर है ताकि यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके.

तमिलनाडु में भी नए बुलेट ट्रेन कॉरिडोर

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह भी बताया गया कि तमिलनाडु में दो नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे. राज्य को रेलवे बजट में 7,611 करोड़ रुपये का आवंटन मिला है, जो बीते वर्षों की तुलना में काफी अधिक है. सरकार का दावा है कि मौजूदा आवंटन पहले की सरकारों के दौर की तुलना में कई गुना ज्यादा है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को गति मिलेगी.

सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का विजन

केंद्र सरकार के दीर्घकालिक विजन के तहत देश में शहरों के बीच तेज, पर्यावरण के अनुकूल और आधुनिक यात्री परिवहन व्यवस्था विकसित करने के लिए सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की योजना है. इनमें मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी शामिल हैं. इन कॉरिडोर के जरिए बड़े शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है और यात्रियों को मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट की बेहतर सुविधा मिल सकेगी.

बजट 2026-27 में रेलवे को रिकॉर्ड आवंटन

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में भारतीय रेलवे के लिए पूंजीगत व्यय के तौर पर 2,77,830 करोड़ रुपये का आवंटन किया है. यह पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के 2,52,000 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 10 प्रतिशत से अधिक है और अब तक का सबसे बड़ा कैपिटल एक्सपेंडिचर माना जा रहा है. इसके अलावा रेलवे को एक्स्ट्रा-बजटरी संसाधनों से 15,000 करोड़ रुपये मिलने की भी उम्मीद है, जिससे चल रही और प्रस्तावित परियोजनाओं को अतिरिक्त गति मिलेगी.

रेलवे की आय और खर्च का अनुमान

बजट दस्तावेजों के अनुसार, आने वाले वित्त वर्ष में रेलवे की कुल आय लगभग 3.85 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि कुल खर्च करीब 3.82 लाख करोड़ रुपये हो सकता है. इसके आधार पर वर्ष के अंत में रेलवे को कुछ हजार करोड़ रुपये का सरप्लस रहने की संभावना जताई गई है. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और नई परियोजनाओं के लिए रेलवे को सरकारी फंडिंग पर निर्भर रहना पड़ता है.

किन परियोजनाओं पर होगा खर्च

रेलवे के लिए तय किए गए कैपिटल एक्सपेंडिचर का इस्तेमाल कई अहम कार्यों में किया जाएगा. इसमें नई रेल लाइनों का निर्माण, नैरो गेज से ब्रॉड गेज में रूपांतरण, सिंगल लाइन को डबल लाइन में बदलना, लोकोमोटिव और कोच की खरीद, साथ ही सिग्नलिंग और टेलीकम्युनिकेशन सिस्टम को मजबूत करना शामिल है. बजट में नई लाइनों, गेज कन्वर्जन, लाइन डबलिंग, रोलिंग स्टॉक और सिग्नलिंग जैसी परियोजनाओं के लिए अलग-अलग मदों में हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

बिहार के लिए क्या बदलेगा?

अगर वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर तय समय में जमीन पर उतरता है, तो बिहार को देश के सबसे आधुनिक परिवहन नेटवर्क से जोड़ने में यह एक बड़ा कदम होगा. इससे न सिर्फ यात्रा का समय घटेगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और निवेश को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. कुल मिलाकर, यह परियोजना बिहार और पूर्वी भारत के लिए रेल कनेक्टिविटी के एक नए दौर की शुरुआत कर सकती है.

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