Bihar Election: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी अब तेज़ होती दिख रही है. जन सुराज पार्टी ने राघोपुर विधानसभा सीट से अपने प्रत्याशी का ऐलान कर दिया है. यह वही सीट है जहां से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव चुनाव लड़ते रहे हैं. खास बात यह है कि इस हाई प्रोफाइल सीट से जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर खुद मैदान में नहीं उतर रहे हैं, बल्कि उन्होंने चंचल सिंह को उम्मीदवार बनाया है.
पीके के चुनाव लड़ने की संभावना बेहद कम
राघोपुर और करगहर, ये दो सीटें मानी जा रही थीं, जहां से प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने की प्रबल संभावना जताई जा रही थी. लेकिन अब जबकि इन दोनों ही सीटों पर जन सुराज ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, प्रशांत किशोर के खुद चुनावी मैदान में उतरने की अटकलें लगभग खत्म हो गई हैं.
13 अक्टूबर को आई दूसरी सूची
जन सुराज पार्टी ने 13 अक्टूबर को अपनी दूसरी लिस्ट जारी की, जिसमें 65 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं. इनमें 19 सुरक्षित सीटों पर भी प्रत्याशियों का ऐलान किया गया है. यह पार्टी के पूर्ण रणनीतिक विस्तार का हिस्सा बताया जा रहा है.
51 सीटों पर उम्मीदवार तय
पार्टी ने 9 अक्टूबर को अपनी पहली सूची जारी की थी, जिसमें 51 विधानसभा क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों का नाम सामने आया. इस सूची में वाल्मीकिनगर से दिग नारायण प्रसाद, लौरिया से सुनील कुमार, हरसिद्धि से अवधेश राम, ढाका से लाल बहादुर प्रसाद जैसे कई नए चेहरों को मौका दिया गया.
कई प्रमुख जिलों से उतारे मजबूत प्रत्याशी
दरभंगा से आरके मिश्रा, मुजफ्फरपुर से डॉ. अमन कुमार दास, गोपालगंज से डॉ. शशि शेखर सिन्हा जैसे प्रतिष्ठित नामों को भी पार्टी ने टिकट दिया है. वहीं, सोनपुर से चंदन लाल मेहता और मोतिहारी से डॉ. अरुण कुमार जैसे अनुभवी चेहरों को भी मैदान में उतारा गया है.
बिहारशरीफ और पटना से भी हुए नाम घोषित
बिहारशरीफ से दिनेश कुमार, पटना के कुम्हरार सीट से केसी सिन्हा और नालंदा से कुमारी पूनम सिन्हा को टिकट दिया गया है. आरा से विजय कुमार गुप्ता, करहगर से रितेश रंजन पांडेय, गोह से सीताराम दुखारी, और बोधगया से लक्ष्मण मांझी को भी प्रत्याशी बनाया गया है.
क्या प्रशांत किशोर सिर्फ रणनीतिक भूमिका में रहेंगे?
पार्टी की ओर से 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा पहले ही हो चुकी है, लेकिन अब तक किसी भी सीट से प्रशांत किशोर का नाम उम्मीदवार के रूप में सामने नहीं आया है. ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि प्रशांत किशोर इस बार खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे और पूरी तरह संगठन और प्रचार की रणनीति संभालेंगे.
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