नई दिल्ली : भारत 24 के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर और पॉडकास्ट विद पूर्णिमा में भोजपुरी फिल्मों के सोनू सूद कहे जाने वाले गायक और अभिनेता खेसरीलाल यादव ने इस इंडस्ट्र में फूहड़पन से लेकर तमाम सवालों का बेबाकी से जवाब दिया.
उन्होंने अपने साथ काम करने वाली भोजपुरी सह कलाकारों- काजल, अक्षरा सिंह के साथ लव अफेयर और उनकी तरफ से लगाए गए आरोपों खारिज करते हुए उन लेकर तीखी बातें कही.
खेसारी लाल यादव का सबसे बेबाक इंटरव्यू, बहुत जल्द सिर्फ भारत 24 पर
— Bharat 24 - Vision Of New India (@Bharat24Liv) November 9, 2024
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आपके पिता चना बेचते थे, आपकी जिंदगी बहुत सारे संघर्षों में रही, लेकिन आज जब आप अपने आप को यहां पर खड़ा देखते हैं तो उन लम्हों को कैसे याद करते हैं?
खेसरी लाल यादव ने इस सवाल के जवाब में कहा, "जब पिता ने इतनी मेहनत की और आज उनका बेटा भोजपुरी का सुपरस्टार है, मैं आज भी वही हूं क्योंकि मैंने दिल से काम कि है, इसलिए मेरा दिमाग खराब नहीं हुआ है. दिल से कोई भी की हुई चीज वो दिल तक रहती है और मुझे लगता है कि मैंने अपने पापा से ज्यादा संघर्ष नहीं किया है. मेरे पापा के ऊपर उनके पापा का हाथ नहीं था, तब उन्होंने मुझे पाला लेकिन मेरे सर पर मेरे पापा का आज भी हाथ है और वह मेरे लिए दुनिया का सबसे बड़ा छत हैं."
"और, मैंने अपने पापा को संघर्ष करते हुए देखा है, तो मुझे पता है कि संघर्ष होता क्या है. और गरीब था लेकिन मुझे लगता है कि मेरी गरीबी ही मेरी सबसे बड़ी ताकत बनी, क्योंकि मेरे पास करने के लिए बहुत कुछ था. एक गरीब के पास बहुत कुछ करने के लिए होता है और भगवान की दी गई गरीबी से बढ़कर कोई अवसर नहीं, तो आप अगर गरीब हैं तो मुझे लगता है कि आपको भगवान ने एक अवसर दिया है खुद को बड़ा करने के लिए."
"इसलिए मैं सौभाग्य समझता हूं कि भगवान अगर दोबारा भी जन्म देना तो फिर से गरीब बनाना, ताकि फिर से मैं खेसारी बन सकूं."
आपके परिवार में कौन-कौन है?
परिवार में चाचा के 4 लड़के और हम तीन भाई, यानि कि सात भाई हैं. मैं, मम्मी-पापा हैं. चाचा हैं और हम सारे भाइयों की पत्नियां हैं और उनके बच्चे. मेरे दो बच्चे हैं और पत्नी हैं, जो कि मुंबई शहर में रहते हैं.
तो ब्रो कोड है, आप लोगों की बहन नहीं है कोई?
भोजपुरी कलाकार खेसारी ने कहा, नहीं, ना तो मेरी, ना दादा जी की कोई बहन थी और ना ही मेरे पापा की और ना ही हमारे परिवार में किसी के तो हमारी तीन पीढ़ियों से कोई लड़की हमारे घर में नहीं थी.
बड़े भाई की बेटी हुई, उसके बाद फिर से एक चाचा के पोती हुई, फिर मेरी बेटी हुई. अब हमारे घर में लड़कियां ही बड़ी हैं. जब ये शुरू हुआ तब हम लोगों की उन्नति शुरू हुई. हमारे घर में लड़कियां नहीं थीं, इसीलिए हम सबकी उन्नति रुकी हुई थी, जब से हमारे घर में ये सब आईं तब से फिर से हमारी उन्नति शुरू हुई.
लेकिन कोई कहता है कि आप चाचा के ज्यादा करीब हैं, ऐसा क्यों?
उन्होंने कहा, चाचा के करीब इसलिए ज्यादा हूं, क्योंकि मैं 6-7 साल का था तो मम्मी को मुझे छोड़कर दिल्ली जाना पड़ा था, क्योंकि पापा रात को गार्ड की नौकरी करते थे, दिन में चाना बेचते थे. इसलिए पापा को खाना बनाने में बड़ी दिक्कत होती थी.
इसमें उनकी भी मजबूरी थी. ऐसा नहीं कि मम्मी ने मुझे दूर रखा. दूर इसलिए रखा कि अगर वह दूर नहीं होतीं तो शायद पापा ठीक से काम नहीं कर पाते और हम लोगों को पालने-पोसने में बड़ा करने में बहुत समस्या होती.
"मैं शुरू से चाचा के साथ ही रहा और गांव में ही रहा तो इसलिए चाचा से थोड़ा सा ज्यादा लगाव रहा."
खेसारी लाल सालों से सोया नहीं है, ऐसा लोग क्यों कहते हैं..?
इस पर खेसारी लाल यादव ने कहा, "क्योंकि मैं सो के सपना नहीं देखता. मैं जग के सपना देखता हूं. इसलिए शायद सारे सपने को पूरा कर पाया और भी तो बहुत सारे सपने हैं, जिन्हें पूरा करना है अभी."
"क्योंकि मैं काम के लिए ही मेहनत किया था. मेरे जीवन में कोई काम नहीं था. इस काम (भोजपुरी फिल्मों में काम) के लिए मुझे बहुत प्रॉब्लम उठानी पड़ी. बहुत सारे लोगों के घर में नौकर भी रहा. दूध बेचा. लिट्टी-चोखा बेचा. जूठा धोया. धागा कटा. मुझे लगता है कि इस काम को करने के लिए मैंने दुनिया का सारा वो काम किया, जो छोटे से छोटे स्तर का होता है."
"यहां तक पहुंचने के लिए इतनी सारे छोटे से छोटे काम किए तो आज मैं जो कर रहा हूं वह बड़ा काम है, लेकिन मुझे लगता है कि पता नहीं कल ये मेरे पास होगा या नहीं. तो आज जो है तो इसे खत्म करो, इसी पर ध्यान रहता है."
लेकिन लोग ये कहते हैं कि आज आप अकेले रह गए हैं, आपके आसपास कोई नहीं है?
इस पर यादव ने कहा, "आसपास लोगों के नहीं रहने या अपनों का उस तरीके से साथ ना रहने की जो बात है तो हर कामयाब आदमी अकेला होता है. ना तो उसकी उन्नति में कोई साथ होता है और ना तो उसकी उन्नति के बाद, क्योंकि उन्नति में वो अकेला मेहनत करता है. जब उन्नति मिल जाती है तो अपनों को यह लगता है कि वह मुझसे बहुत दूर हो गया."
"मुझे लगता है कि मैं अब सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरा हिंदुस्तान मेरा परिवार है."
"हां, आदमी कमाता भी है तो उसी परिवार के लिए, लेकिन उनके साथ नहीं रह पाता है. वजह है कि महीने में मैं 20 दिन बाहर रहता हूं. 10 दिन मुझे वक्त मिलता है अपने फैमिली को टाइम देता हूं. तो 10 दिन अपने परिवार के साथ रहता हूं. कभी फेस्टिवल भी मना लेता हूं, कभी जरूरत पड़ती है तो परिवार के लोग शूटिंग पर भी आ जाते हैं."
"लेकिन हमारा जीवन बाकी लोगों के 24 घंटे की तरह नहीं होता कि जैसे कोई ड्यूटी करने गया है, वो शाम को आएगा, बच्चों और परिवा के साथ रहेगा, वैसा जीवन हमारा नहीं है, क्योंकि जब आप समाज के हो जाते हैं तो आपकी जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं और जब जिम्मेदारियां बढ़ती हैं तो इतने सारी जिम्मेदारियों के साथ मुझे नहीं लगता कि कोई परिवार को हर वक्त साथ लेकर चल पाएगा."
आप बहुत बड़े सुपरस्टार हैं, चमकते धमक सुपरस्टार हैं, लेकिन इस अकेलेपन में भी कभी लगता है कि किसी कंधे की जरूरत है, जिससे खुलकर अपनी बात कह लूं. कभी रोने मन हो तो रो लूं?
"मुझे भी बहुत तकलीफ होती है, बहुत दर्द होता है, किसको दर्द नहीं होता है? लेकिन विषय यह है कि हम अगर कहीं रो भी देते हैं तो लोगों को लगता है कि यह नाटक है. हम एक्टर हैं तो दुनिया हमारे आंसुओं का भी मजाक उड़ा लेती है. अपनी तकलीफ अगर हम किसी से कहते हैं तो लोगों को यह लगता है कि नहीं, खेसारी लाल यादव लोगों की सिंपैथी पाने के लिए अपनी तकलीफ सुना रहा है. हमारी हर चीजों नोटिस होती है ना, इसीलिए अब मन नहीं करता. मन करता है तो कभी अकेले बैठ के रो लेते हैं. लेकिन एक चीज खुशी देती है कि दोनों बच्चे मुझे बहुत प्यार करते हैं. पूछते रहते हैं कि पापा कैसे हैं, पापा क्या कर रहे हैं? वाइफ मेरी हमेशा केयर करती हैं. वो हमारे लिए व्रत बहुत करती हैं. उनका योगदान मेरे जीवन में बहुत है कि वो मुझे आप खुद से ज्यादा अहमियत देती हैं. मैं व्रत करूं या ना करूं, वह मेरे लिए हमेशा उपवास रखती हैं. कभी-कभी वो भी नाराज होते हैं मुझसे. कभी सब कंट्रोवर्सी होती है तो उनको भी लगता है कि उनके पापा गलत कर दिया है."
थोड़ी कंट्रोवर्सी नहीं, लोग कहते हैं खेसारी लाल जितने सक्सेसफुल है उतनी कंट्रोवर्सी झोला भर के उनके साथ चलती हैं, इतनी कंट्रोवर्सी क्यों?
इस पर भोजपुरी कलाकार ने कहा, "जो गाड़ी रोड पर चलती है, धक्का तो उसी को लगता है. जो गाड़ी नहीं चलती, उसको कहां से धक्का लगेगा, तो जब आप मार्केट में रहिएगा तो प्रॉब्लम तो आप ही को होने वाली है."
लेकिन आपकी तरह और बहुत सारी गाड़ियां हैं, जिनको कम धक्का लगता है?
"नहीं एक्चुअली है क्या कि जो रनिंग गाड़िया होती हैं ना उसको ज्यादा धक्का लगता है, कुछ जो गाड़ियां बोल रही हैं, कुछ गाड़ियों का विधा अलग हो गई है. कुछ गाड़ियों का प्लेटफार्म अलग हो गया है. और खेसारी का मामला ऐसा है कि वो चलता रहता है."
कभी ऐसा आप सोचते हैं कि बचपन में कोई दोस्त था, जिसके साथ ट्यूबवेल पर नहाने जाते रहे होंगे, खेत-खलिहान में दौड़े होंगे. गिल्ली-डंडा खेले होंगे. कोई ऐसा दोस्त है, जिसे आप आंख बंद कर फोन कर सकें?
"देखिए, एक उन्नति के तौर पर मैं देखता हूं तो जब मैं कुछ नहीं था, तो मेरे साथ सारे लोग थे. सबने मुझे मेहनत करके बड़ा किया, लेकिन जब मैं बड़ा हो गया ना, तो वही लोग पीछे करने की भी कोशिश करने लगे."
"मैंने किसी को छोड़ा नहीं. वो समय का अभाव है कि कभी वो आते हैं तो मैं नहीं होत तो कभी मैं होता हूं तो वे नहीं होते. वही जैसे कि एक तौर से आम के पेड़ को देख लीजिए. हर व्यक्ति एक आम को पेड़ लगाता जरूर है, लेकिन जब वो फल देता है ना तो तोड़ता भी वही है."
लेकिन कहते हैं कि जब बहुत ज्यादा लोग होते हैं तो भीड़ होती है, जब दो तीन लोग होते हैं तो वो आपके अपने होते हैं, क्या कोई एक दोस्त है, जिसको आप मिस करते हों?
"मैं सबको मिस करता हूं. ऐसा नहीं कि आगे बढ़ने के बाद सब कुछ भूल गया हूं. लेकिन सबकी अपना फैमिली हो गई है. सबका अपना रोजगार हो गया है. सबका अपना वक्त है तो कभी फोन पर बात हो जाती है. कभी उनका हाल-चाल मैं ले लेता हूं. मेरा हाल-चाल वो ले लेते हैं.
आज आप सोच कर आए हैं कि सारी अच्छी-अच्छी बातें करेंगे?
"ऐसा नहीं बोलूंगा, जिससे मेरी इंटेंशन कुछ हो और लोग समझें कुछ और. मैं राजाराम (आने वाली फिल्म) के प्रमोशन के लिए आया हूं."
"इसमें अब एक राजा और एक राम दोनों के कैरेक्टर निभाने में जो मेरी दशा हुई थी, मैं इस चीज को लेकर बहुत फिक्र में था और बड़ा चिंतित था कि जिस भगवान ने मुझे धरती पर भेजा है, उस भगवान के आचरण, उनकी मुस्कान को पर्दे पे उतारना छोटा काम तो है नहीं और तुरंत मुझे राजा बन के एक फन और आम जिंदगी की भी रोल अदा करना पड़ा है, तो मेरे लिए बड़ा टफ, कष्टदायक काम था."
आप दोस्ती बड़े अच्छे से निभाते हैं, लेकिन दुश्मनी भी बहुत अच्छे से. आपके इंडस्ट्री के लोग भी ऐसा कहते हैं?
भोजपुरी कलाकार ने इस सवाल पर कहा, "वो दुश्मनी नहीं, सच्चाई है. मुझे लगता है कि अगर सच बोलना गुनाह है तो मैं ये गुनाह करता रहूंगा और चाहे कितनी भी कंट्रोवर्सी क्यों ना हो जाए, इस चीज को नहीं छोड़ सकता. क्योंकि वो मेरी अच्छाई है और वो सच है. सच को बोलना अगर गुनाह है तो ठीक है भाई तुम गुनाह समझो, मैं तो सच बोल गया हूं. तो मैं दोस्त और दुश्मन दोनों बड़ा मजबूत पालता हूं."
कौन दुश्मन है, कौन हैं दोस्त?
उन्होंने कहा, "मेरे बहुत सारे हैं दुश्मन हैं निजी तौर से, प्रोफेशनल तौर से. तो हमेशा इंसान को खुद को बड़ा रखना चाहिए. मेरा कोई ऐसा दुश्मन थोड़ी है, जो कि मर्डर वाला दुश्मन हो."
"मुझे बहुत से ऐसे लोग हैं जो अब पसंद नहीं करते लेकिन एक दौर था कि सबका मैं चहेता था, क्योंकि तब मैं सबकी सुनता था."
"एक्चुअली बात ऐसी है कि उन्हें अंदर से पसंद आज भी हूं मैं. इसे वो जुबां पर नहीं लाते. उनको लगता होगा कि जुबां से हम इनको छोटा कर देंगे लेकिन मैं काम इतना करता हूं कि मुझे छोटा करने की उनकी ख्वाहिश आज तक बनी रही."
मैं ही नाम ले लेती हूं. पवन जी (भोजपुरी कलाकर पवन सिंह) के साथ क्या दिक्कत है?
इस पर खेसारी लाल ने कहा, "बड़े भाई हैं वो मेरे. मैं जब भी उनसे मिला हूं, उन्होंने मुझे हमेशा एक छोटे भाई का सम्मान दिया है और मैं बड़े भाई का सम्मान. क्योंकि हम लोग जहां से आते हैं वहां संस्कार बहुत बड़ी बात है. हां, लेकिन एक कंपीटिटर के तौर पर अगर वह बड़े हैं तो मैं हमेशा कोशिश यह करता हूं कि उनसे बेहतर काम करके उनसे बड़ा बन जाऊं. मुझे कभी उनसे जलन नहीं हुई. हमेशा मैं उनको बड़ा देखना चाहा, लेकिन अपने आप को भी उनसे बड़ा देखना चाहा. मेहनत करके, ये नहीं कि अपने जुबान से बड़ा होना."
"मुझे मजा आता है एक मजबूत इंसान से लड़ने में. कौन ज्यादा है, यह तो पब्लिक बताएगी."
भारत 24 के साथ बातचीत करने को लेकर खेसारी लाल ने कहा, "इतने बड़े प्लेटफार्म पर कैसे आता. तो कहीं ना कहीं, कुछ ना कुछ बेहतर तो होगा खेसारी के अंदर, जो आज इस ऐसे प्लेटफार्म पर बैठकर आपसे टॉक कर रहा हूं. उनके अंदर भी बेहतर है. तो सबकी अपनी-अपनी बेहतरीन चीजें हैं. उनकी कुछ चीजें बेहतर हैं तो खेसारी की भी कुछ बेहतर होंगी, तभी दुनिया ने पसंद किया है."
"हिट कौन है, ये जनता ही बता सकती है. दुनिया जज करती है हम जज थोड़ी करते हैं, हम तो काम करते हैं."
फिर आपको दिलजीत दोसांझ से क्या दिक्कत हो गई?
"दिलजीत दोसांझ से दिक्कत मुझे नहीं थी. एक मस्ती किया था मैंने, जिसके बाद जनता पीछे पड़ गई. मैं उन लोगों को बताना चाहता था जो लोग भोजपुरी को नीचा दिखाते हैं. मैं उनको दिखाना चाहता था कि भाई देख हमारी भोजपुरी इतनी पुअर (खराब) नहीं. इतनी गरीब नहीं. आज 3 लाख पब्लिक वो भी महाराष्ट्र जैसे शहर में जुटती है, खेसारी लाल एक छोटे गांव से कलाकार को देखने के लिए. तो आप देखो हमारी भोजपुरी पुअर नहीं है."
"जहां तक बैर की बात है तो वो पंजाब इंडस्ट्री को रिप्रेजेंट करते हैं, उसके लीजेंड हैं और मेरी हमेशा उनके लिए शुभकामना है. वह बहुत अच्छे इंसान भी हैं, बहुत अच्छे सिंगर हैं. आज पूरी दुनिया में उनका नाम है तो उनसे कंपेयर करने का रीजन ही नहीं. मैं उन लोगों को बताना चाहता था कि देखो भाई आप हमारी भोजपुरी को गलत नहीं बोल सकते."
लोग कहते हैं कि भोजपुरी में जो फिल्में बनती हैं, उसकी भाषा, अंदाज बहुत फूहड़ होता है, इसमें महिलाओं चीज, सामान के तौर पर परोसा जाता है?
इस सवाल के जवाब में खेसारी लाल ने कहा, "भोजपुरी इंडस्ट्री को लेकर मिसकनसेप्शन है. ऐसा है नहीं है, भोजपुरी भाषा गलत नहीं है. कुछ लोग उसको बोल बोल के गलत बना दिए हैं. जैसे बिहार में जंगल राज, जंगल राज, इतना जंगल राज, जंगल राज किया गया कि आज सारी व्यवस्था बेहतर है, फिर भी बिहार जंगल राज ही है, क्योंकि लोगों ने इतना ज्यादा इसे बोला है, तो उसी तरह हमारी भोजपुरी भाषा की इमेज बना दी गई है."
कभी आपको नहीं लगता कि थोड़ा इसमें चीजों बदलना चाहिए? तब, जब आप भोजपुरी को नेशनल लेवल पर लेकर जाना चाहते हैं?
"देखिए कांसेप्ट होता है किसी भी चीज का. उस कांसेप्ट के साथ ही डायरेक्टर चलता है, और भजपुरी आपको सिनेमा में फूहड़ नहीं दिखती, क्योंकि उसके लिए सेंसर होता है. उसके बाद ही वो रिलीज होती है. हां एल्बम इंडस्ट्री में कुछ ना कुछ गंदगी है. क्योंकि इस काम में बहुत सारी कंपनियां लगी हैं."
"देखिए समाज में भी जब गंदे गानों पर रोक लगेगी ना और लोग सुनना बंद करेंगे तो कलाकार भी इसे करना बंद कर देंगे. जब कोई सामान हम दुकान से नहीं खरीदेंगे, तो लोगों को अपनी दुकाना पर सामान बदलना पड़ेगा."
मैं बहुत निजी सवाल आपसे पूछ रही हूं, कभी आप सोचे कि आपकी खुद की बेटी इन गानों को देखें तो आपको अच्छा लगेगा, खासकर डांस?
खेसारी लाल ने कहा, "नहीं डांस तो जिस तरह हिंदी में होता है, उसी तरह हमारे भोजपुरी में भी होता है. ऐसा कौन सा डांस आपने देख लिया. कुछ लोग गलत करते हैं, हम तो ऐसे डांस कभी नहीं करते. हमारे भोजपुरी में हम लोग जो करते हैं सोवर तरीके से चीजों को परोसते."
खेसारी लाल के जीवन में कौन-कौन आया, कहां चला गया, किससे ब्रेकअप हो गया, किससे अफेयर हुआ, कितनों के दिल तोड़ दिया आपने?
"मैं तो प्यार की परिकाष्ठा हूं. मैं कृष्ण की तरह हूं. मुझसे पूरी दुनिया प्यार करती है और भगवान गीता में लिखे हैं कि जिसको हजारों आंख देखने लगें समझो कि वो मेरा स्वरूप है."
लेकिन गोपियों आजकल कह रही हैं कि खेसारी लाल बहुत खराब आदमी हैं?
इस सवाल पर भोजपुरी कलाकार ने कहा, "अच्छा हो सकता था, अब खराब हो गया, क्योंकि उनके पास नहीं हूं, तो जो चीज किसी के पास नहीं होती उसके अंदर बुराई नजर आती है और देखिए कोई भी अगर किसी के बारे में बुरा बोलता है ना तो वो खुद के बारे में बोल रहा है. उसी बुराई के साथ रहे हैं आप. उसी बुराई के साथ वर्क किया है. उसी बुराई के साथ नाम हुआ है."
लोग कहते हैं कि आप रुमाल रख देते हैं और कहते हैं अब तो यह सिर्फ मेरी है, मेरे साथ नहीं है तो किसी और के साथ नहीं है?
इस पर उन्होंने कहा, "अच्छा ऐसा है तो इस हिसाब से तो मुझे लगता है कि मैंने भोजपुरी के सारी एक्ट्रेस पर रुमाल रखा होगा, जिसमें आम्रपाली दूबे हैं, अंजना सिंह, अक्षरा जी, काजल जी, पाखी हेगड़े, रानी चटर्जी, मोनालिसा. फिर तो मुझे लगता है कि भोजपुरी की कोई लड़की ऐसे में नहीं बची होगी. तो जो लड़की इस शब्द को बोल गई है, मुझे लगता है कि उसने अपनी इज्जत ही नहीं, बल्कि पूरी भोजपुरी इंडस्ट्री के लड़कियों की इज्जत उछाल के गई है."
काजल के साथ आपका ब्रेकअप क्यों हुआ?
खेसारी लाल ने कहा, "ब्रेकअप कहां होगा. प्यार ही कब था, जो ब्रेकअप होगा. मेरा रिश्ता एक एक्टर के तौर पर था, एक दोस्त के तौर पर था. अब कोई सपना पाल के रख ले कि हां मैं इनकी बीवी बनूंगी तो उसकी अपनी गलती है. उसमें मेरी गलती कहां से है. मैं ऑलरेडी शादीशुदा 2006 से था. मैं शादी के बाद इंडस्ट्री में आया 2010 में. तब जब 2010 में मेरी बेटी हो चुकी थी."
"मैने शुरू से सबको अपने बीवी-बच्चों के बारे में जानकारी दी है. सबको पता है कि मैं शादीशुदा हूं. मैं तो इस विषय पर हैरान हूं कि जो दोनों लड़कियां बोल रही हैं, वो जिससे शादी करेंगी उनको क्या जवाब देंगी?"
दूसरी लड़की का नाम लेने के सवाल पर उन्होंने कहा, "वह नाम लेने के लायक ही नहीं हैं. जब बेहतर थीं तो दुनिया ने बेहतर बताया, आज बेहतर नहीं हैं तो मैं भी क्यों बेहतर बोलूं. आज उनकी जुबान बेहतर नहीं है. वो खुद को बेइज्जत करके जा रही हैं."
ऐसा तो नहीं है कि खेसारी लाल का मन भर गया तो अब वे बेहतर नहीं?
"मैं काम करने वाला आदमी हूं. मेरा काम से कभी मन नहीं भरता है और लड़कियां मेरे लिए विषय नहीं हैं. मैं यहां लड़कियों का दिल जीतने के लिए नहीं आया हूं. जब मुझे बिगड़ना था, तब पापा ने मेरी शादी कर दी और मेरे पास बहुत प्यारी वाइफ हैं और बहुत खूबसूरत हैं और दुनिया की सबसे खूबसूरत इंसान भी हैं वो. तो मेरे लिए वही हीरोइन हैं. वही मेरी जीवन हैं और मेरे बच्चे मेरे जीवन हैं."
"बाकी मेरे जीवन में जो मेरी जनता है वह भगवान स्वरूपी है. मुझे प्यार करती है, इससे ज्यादा मेरे लिए कोई विषय अहम नहीं. दुनिया मुझे क्या बोलती है. और किसी के डिसाइड कर देने से मेरा कैरेक्टर ढीला नहीं हो जाता."
अब कृष्ण को दुनिया प्यार करती है, इसका मतलब थोड़ी कि कृष्ण सबके साथ रहते हैं? आप बांसुरी बजाते चलेंगे?
खेसारी लाल ने कहा, "नहीं मैं बांसुरी अपने संगीत में बजाता हूं, मैं अपने काम में बजाता हूं और उसका हिस्सा कोई बनता है और अपना काम करके अपना पैसा चाहता है. ऐसा थोड़ी है कि मैं उनको अपने घर बुलाने के लिए बांसुरी बजाता हूं."
कभी ऐसा लगता है कि मैं वापस जिंदगी में जाऊं और कुछ चीजें अपनी लाइफ से कंट्रोल करूं और डिलीट मार दूं?
"नहीं, कुछ गलत किया ही नहीं तो डिलीट करने का कोई कोई पछतावा नहीं. गलती करूंगा तब ना पछतावा होगा, और किसी महिला के बारे में मुझे हक नहीं बनता कि मैं उसके बारे में कुछ गलत बोलूं, लेकिन वो भी किसी की मां बनेंगी, किसी की बीवी बनेंगी, किसी की दादी बनेंगी और उस समय उनको जवाब देना पड़ेगा कि आपने अपनी जवानी में किसी को बेइज्जत करने के लिए, किसी को नीचा दिखाने के लिए अपने अस्तित्व को ही दांव पर लगा दिया और पूरी दुनिया को बता दिया कि आपका कल्चर और आपकी अस्तित्व क्या है."
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