सीतापुर: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है. समाजवादी पार्टी (सपा) के दिग्गज नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान को करीब 23 महीने बाद जेल से रिहाई मिलने जा रही है. यह रिहाई सिर्फ कानूनी मोर्चे पर नहीं, बल्कि सियासी मोर्चे पर भी नए समीकरणों का संकेत देती दिख रही है.
सीतापुर जेल से रिहा होंगे आज़म खान
जानकारी के अनुसार, 23 सितंबर (मंगलवार) सुबह 8 बजे आज़म खान को सीतापुर जेल से रिहा किया जाएगा. जेल प्रशासन ने उनकी रिहाई को लेकर सारी तैयारियां पूरी कर ली हैं. लंबे समय से जेल में बंद आज़म खान को हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली थी, जिसके बाद रिहाई का रास्ता साफ हुआ.
'क्वालिटी बार' जमीन कब्जा मामला बना रिहाई की वजह
आजम खान की रिहाई जिस मामले में हुई है, वह रामपुर के 'क्वालिटी बार' जमीन पर अवैध कब्जा से जुड़ा है. यह मामला नवंबर 2019 का है, जिसमें आजम खान समेत कुछ अन्य लोगों पर धोखाधड़ी, साजिश और सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे. निचली अदालत ने पहले उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन बाद में 18 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट के जस्टिस समीर जैन की बेंच ने उनकी जमानत मंजूर कर ली.
पहले भी मिल चुकी है जमानत
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब आज़म खान को किसी केस में राहत मिली हो. इससे पहले भी वे डूंगरपुर से जुड़े एक अन्य चर्चित केस में हाईकोर्ट से जमानत पा चुके हैं. उस याचिका पर 12 अगस्त को सुनवाई और 10 सितंबर को फैसला आया था. आजम खान के खिलाफ कई आपराधिक मामले लंबित हैं, लेकिन एक-एक करके उन्हें अदालतों से राहत मिल रही है.
सियासी गलियारों में हलचल
सिर्फ रिहाई ही नहीं, राजनीतिक गलियारों में इस बात की जोरदार चर्चा है कि आज़म खान सपा से अलग होकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का दामन थाम सकते हैं. सूत्रों की मानें तो सीतापुर जेल में बसपा नेताओं का पहुंचना इस ओर इशारा करता है कि अंदरखाने कुछ बातचीत चल रही है. वहीं, बसपा विधायक उमाशंकर सिंह ने भी बयान देकर अटकलों को और हवा दे दी है. उन्होंने कहा, “अगर आज़म खान बसपा में आते हैं, तो उनका स्वागत है, इससे पार्टी को ताकत मिलेगी.”
9 अक्टूबर को बसपा का बड़ा सम्मेलन
माना जा रहा है कि बसपा सुप्रीमो मायावती 9 अक्टूबर को लखनऊ में एक बड़ा सम्मेलन करने जा रही हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि आजम खान इसी कार्यक्रम में आधिकारिक रूप से बसपा में शामिल हो सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो यह उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बड़ा मोड़ होगा.
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