आयुष्मान भारत योजना, जो देश के करोड़ों परिवारों के लिए मुफ्त इलाज का एक अहम साधन बन चुकी है, अब कुछ महत्वपूर्ण बदलावों से गुजर रही है. सरकार ने इस योजना से जुड़े नियमों में बदलाव कर दिए हैं, जिनका उद्देश्य इसे और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना है. नए नियमों के तहत अब लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड प्राप्त करने के लिए आधार आधारित e-KYC करवाना अनिवार्य होगा.
नया e-KYC नियम
सरकार ने आयुष्मान कार्ड बनाने और उसे सक्रिय रखने के लिए e-KYC को अनिवार्य कर दिया है. इसका मतलब यह है कि अगर किसी व्यक्ति का आधार आधारित e-KYC पूरा नहीं होता, तो न तो वह नया कार्ड बना सकेगा और न ही उसके पुराने कार्ड के जरिए उसे इलाज की गारंटी मिलेगी. अगर किसी का रिकॉर्ड अधूरा रहेगा, तो उसकी योजना का लाभ रुक सकता है. इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिनकी जानकारी सही या पूरी नहीं है.
BIS 2.0 प्रणाली
नेशनल हेल्थ अथॉरिटी ने आयुष्मान कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है. इसके लिए नई BIS 2.0 प्रणाली लागू की गई है, जिससे लाभार्थियों की पहचान आधार के जरिए पूरी तरह से सुनिश्चित की जाएगी. यह कदम इस उद्देश्य से उठाया गया है कि योजना का लाभ केवल उन्हीं व्यक्तियों को मिले, जो इसके असली हकदार हैं और किसी तरह के फर्जीवाड़े से बचा जा सके.
फर्जीवाड़े पर कड़ी निगरानी
आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार ने अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. इस तकनीकी सहायता से संदिग्ध आयुष्मान कार्ड्स की पहचान की जा रही है. अब तक हजारों कार्ड्स को फर्जी पाया गया है, जिनकी जांच की जा रही है. इसके बाद, जो कार्ड फर्जी पाए जाएंगे, उनकी चिकित्सा सुविधाएं तुरंत रोक दी जाएंगी. इस कदम से योजना का लाभ केवल पात्र लाभार्थियों तक ही पहुंचेगा.
सदस्य जोड़ने के नियम और सख्त
आयुष्मान कार्ड में नए परिवार के सदस्य जोड़ने के नियम भी अब पहले के मुकाबले ज्यादा सख्त हो गए हैं. पहले यह प्रक्रिया सरल थी, लेकिन अब इसे सही दस्तावेज और जांच के बाद ही किया जा सकता है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल उन परिवारों को ही इस योजना का लाभ मिले, जिनकी वास्तविक जरूरत है.
फर्जी लाभार्थियों पर कड़ी नजर
सरकार का कहना है कि यह बदलाव इसलिए किए गए हैं क्योंकि कई ऐसे लोग योजना का फायदा उठा रहे थे, जो इसके असली हकदार नहीं थे. इससे सरकारी संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा था और असली जरूरतमंदों को सही समय पर इलाज का फायदा नहीं मिल पा रहा था. नए नियमों का उद्देश्य योजना को अधिक पारदर्शी बनाना और असली लाभार्थियों तक इसका सही लाभ पहुंचाना है.
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