Shubhanshu Shukla returned India: जब कोई बेटा अपने घर लौटता है तो परिवार में खुशी होती है, लेकिन जब वो बेटा अंतरिक्ष से लौटे, तब पूरी देश की आंखों में गर्व और खुशी के आंसू आ जाते हैं. भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, जिन्होंने हाल ही में नासा और एक्सिओम स्पेस के Axiom-4 मिशन में पायलट की भूमिका निभाई, अब भारत लौट चुके हैं.
रविवार देर रात दिल्ली एयरपोर्ट पर जैसे ही वह अपने परिवार के साथ पहुंचे, “भारत माता की जय” के नारों से पूरा माहौल गूंज उठा. वहां मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, इसरो वैज्ञानिक, छात्र और आम नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद थे, सिर्फ एक झलक पाने के लिए उस भारतीय का, जिसने अंतरिक्ष में भारत का परचम लहराया.
एक ऐतिहासिक वापसी का पल
दिल्ली एयरपोर्ट पर न केवल शुभांशु का स्वागत हुआ, बल्कि उनके साथ आए उनके बेटे और पत्नी कामना शुक्ला को भी सम्मान मिला. खुद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री ने उनकी अगवानी की. उनके साथ भारत लौटे ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर, जो गगनयान मिशन के लिए चुने गए बैकअप अंतरिक्ष यात्री हैं, उन्हें भी लोगों ने खुलकर सराहा.
"भारत का गौरव, धरती पर लौटा"
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा, "भारत और इसरो के लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंतरिक्ष विज्ञान में जो क्रांति आई है, यह उसी का परिणाम है कि आज भारत के सपूत अंतरिक्ष से धरती पर लौटे हैं."
कैसी रही थी शुभांशु की अंतरिक्ष यात्रा?
मिशन: Axiom-4 (निजी अंतरिक्ष मिशन)
उड़ान शुरू: 25 जून, फ्लोरिडा से
आईएसएस आगमन: 26 जून
पृथ्वी पर वापसी: 15 जुलाई
साथी यात्री: पैगी व्हिटसन (अमेरिका), स्लावोज उज्नान्स्की (पोलैंड), टिबोर कापू (हंगरी)
मिशन अवधि: 18 दिन
स्कूल में भी होगा भव्य स्वागत
शुभांशु शुक्ला का लखनऊ स्थित उनका स्कूल सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (सीएमएस) अब एक बड़े समारोह की तैयारी कर रहा है. 25 अगस्त को लखनऊ में उनके सम्मान में विशाल परेड निकाली जाएगी, जिसमें स्कूली छात्र, स्थानीय निवासी और विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियां हिस्सा लेंगी.
सीएम योगी आदित्यनाथ को भी कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है.
भावुक कर देने वाला इंस्टाग्राम पोस्ट
भारत लौटते समय शुभांशु ने इंस्टाग्राम पर अपनी एक तस्वीर साझा की थी, जिसमें उन्होंने लिखा, "मैं अपने उन अद्भुत दोस्तों और परिवार को पीछे छोड़कर जा रहा हूं जो पिछले एक साल से मेरे साथ इस मिशन में थे. पर अब अपने देश, अपने असली परिवार और देशवासियों से मिलने की बेताबी है." उन्होंने बॉलीवुड फिल्म 'स्वदेश' का गीत भी याद किया, "यूं ही चला चल राही, जीवन गाड़ी है, समय पहिया." उनके शब्दों से साफ है कि अंतरिक्ष में बिताया समय जीवन बदलने वाला रहा, लेकिन दिल हमेशा देश की मिट्टी में ही बसा रहा.
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