आसिम मुनीर ने अपने करीबी सैयद आमिर रजा को सौंपी आर्म्‍ड फोर्सेज की चाबी, पाकिस्तान सेना में बने नंबर 2

पाकिस्तान की सेना में कमान व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के पास पहले से ही सेना की कमान है और अब रणनीतिक बलों के संचालन के लिए जनरल सैयद आमिर रजा को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है.

Asim Munir Syed Amir Raza is the commander of Pakistan National Strategic Command
Image Source: Social Media

पाकिस्तान की सेना में कमान व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के पास पहले से ही सेना की कमान है और अब रणनीतिक बलों के संचालन के लिए जनरल सैयद आमिर रजा को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. उन्हें कमांडर नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड नियुक्त किया गया है.

यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था में बदलाव के बाद आसिम मुनीर की ताकत और भूमिका काफी बढ़ गई है. नई व्यवस्था में रणनीतिक बलों के संचालन और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल की जिम्मेदारी अहम हो गई है. ऐसे में भारत की नजर भी इस बदलाव पर रहेगी.

बदली पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था

पाकिस्तान में 27वें संविधान संशोधन के बाद सेना की कमान व्यवस्था में बदलाव किया गया. इसी के तहत चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज यानी सीडीएफ का पद बनाया गया और आसिम मुनीर को इसकी जिम्मेदारी मिली.

इसके बाद तीनों सेनाओं से जुड़े रणनीतिक अभियानों के लिए कमांडर नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड का पद बनाया गया. इस पद पर जनरल सैयद आमिर रजा को नियुक्त किया गया है.

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अब पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का फैसला जनरल रजा करेंगे. परमाणु नीति और हथियारों के इस्तेमाल का अंतिम अधिकार प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली नेशनल कमांड अथॉरिटी के पास ही है.

कौन हैं जनरल सैयद आमिर रजा?

जनरल आमिर रजा पाकिस्तान सेना के अनुभवी अधिकारी हैं. उन्होंने 1988 में सेना में कमीशन लिया था. अपने लंबे सैन्य करियर में वह कई अहम पदों पर काम कर चुके हैं.

वह बख्तरबंद रेजिमेंट, ब्रिगेड और डिवीजन की कमान संभाल चुके हैं. इसके अलावा वह लाहौर स्थित IV कॉर्प्स के कमांडर भी रहे हैं. उन्होंने पाकिस्तान के रक्षा उत्पादन से जुड़ी महत्वपूर्ण संस्था हेवी इंडस्ट्रीज टैक्सिला में भी जिम्मेदारी संभाली है.

रजा का नाम पाकिस्तान की रॉकेट फोर्स कमांड से जुड़े कामों में भी सामने आया है. यही वजह है कि रणनीतिक कमान में उनकी नियुक्ति को सामान्य प्रशासनिक बदलाव नहीं माना जा रहा है.

प्रमोशन से क्यों मची चर्चा?

जनरल आमिर रजा की पदोन्नति भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. रिपोर्टों के मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल रहते हुए वह वरिष्ठता सूची में काफी नीचे थे, लेकिन उन्हें चार सितारा जनरल बनाकर बड़ी जिम्मेदारी दी गई.

उनकी नियुक्ति के बाद पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था में कुछ चुनिंदा वरिष्ठ अधिकारियों के हाथों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां केंद्रित होती दिख रही हैं. इनमें आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आसिम मलिक का नाम भी शामिल है.

भारत के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?

भारत के लिए इस बदलाव का सबसे बड़ा महत्व पाकिस्तान की रणनीतिक और मिसाइल कमान से जुड़ा है. दोनों देशों के पास परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें हैं, इसलिए पाकिस्तान की सैन्य कमान में होने वाला कोई भी बड़ा बदलाव भारत के लिए महत्वपूर्ण होता है.

जनरल रजा को रणनीतिक बलों के संचालन और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल की जिम्मेदारी मिलने के बाद भारत पाकिस्तान की मिसाइल, रॉकेट और अन्य रणनीतिक गतिविधियों पर करीब से नजर रखेगा.

खास तौर पर रॉकेट फोर्स और रणनीतिक हथियारों से जुड़े फैसलों में नई कमान व्यवस्था किस तरह काम करती है, यह भारत के लिए महत्वपूर्ण होगा.

परमाणु हथियारों का फैसला किसके पास?

यह समझना जरूरी है कि जनरल रजा को पाकिस्तान का परमाणु हथियारों का अंतिम कमांडर कहना सही नहीं होगा. परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का अंतिम फैसला नेशनल कमांड अथॉरिटी के पास है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं.

जनरल रजा की मुख्य जिम्मेदारी रणनीतिक बलों के संचालन और सैन्य तालमेल से जुड़ी है. फिर भी वह पाकिस्तान की रणनीतिक कमान व्यवस्था की एक बेहद अहम कड़ी बन गए हैं.

आसिम मुनीर की बढ़ती ताकत

जनरल रजा की नियुक्ति को आसिम मुनीर की बढ़ती ताकत से जोड़कर भी देखा जा रहा है. नई सैन्य व्यवस्था में मुनीर शीर्ष सैन्य पद पर हैं और रणनीतिक बलों के संचालन के लिए जनरल रजा को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है.

इस बदलाव से पाकिस्तान की सेना, नौसेना और वायुसेना की रणनीतिक क्षमताओं के बीच तालमेल बढ़ाने की कोशिश दिखाई देती है. आने वाले समय में पाकिस्तान की मिसाइल क्षमता, रणनीतिक हथियारों और संयुक्त सैन्य योजनाओं पर इसका असर देखने को मिल सकता है.

ये भी पढ़ें- पाकिस्तानी सेना के लिए जहन्नुम बलूचिस्तान, बलूच लड़ाकों ने पुलिस स्टेशन उड़ाया, पशिन जिले पर कब्जा!