दूध बेचने से लेकर एशियन गेम्स में इतिहास रचने तक... 64 साल बाद पहलवान नितेश सिवाच ने किया बड़ा कारनामा

Wrestler Nitesh Siwach: एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पहलवान नितेश सिवाच ने ग्रीको-रोमन कुश्ती में बड़ा इतिहास रच दिया है. 97+ किलो वर्ग के फाइनल में उन्हें जापान के यूरी नकाजातो के खिलाफ हार मिली और वह गोल्ड मेडल से चूक गए, लेकिन सिल्वर जीतकर उन्होंने भारत के लिए खास उपलब्धि हासिल की.

Asian Games 2026 Wrestler Nitesh Siwach won silver medal achieves feat after 64 years
Image Source: Social Media

Wrestler Nitesh Siwach: एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पहलवान नितेश सिवाच ने ग्रीको-रोमन कुश्ती में बड़ा इतिहास रच दिया है. 97 किलो वर्ग के फाइनल में उन्हें जापान के यूरी नकाजातो के खिलाफ हार मिली और वह गोल्ड मेडल से चूक गए, लेकिन सिल्वर जीतकर उन्होंने भारत के लिए खास उपलब्धि हासिल की. नितेश के इस मेडल के साथ ग्रीको-रोमन कुश्ती में भारत का 64 साल का इंतजार खत्म हो गया.

नितेश सिवाच ने खत्म किया 64 साल का इंतजार

नितेश 1962 के जकार्ता एशियन गेम्स के बाद ग्रीको-रोमन कुश्ती के फाइनल में पहुंचने वाले और मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पहलवान बने हैं. 1962 में भारत के दिग्गज पहलवान गणपत अंदलकर ने 97 किलो वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था. इसके बाद इस वर्ग में भारत को लंबे समय तक कोई मेडल नहीं मिला और कोई पहलवान फाइनल तक भी नहीं पहुंच सका.

नितेश ने इस बार फाइनल तक का सफर शानदार अंदाज में तय किया. क्वार्टर फाइनल में उन्होंने तुर्कमेनिस्तान के अमानबर्दी अगामम्मेदोव को 7-1 से हराया. इसके बाद सेमीफाइनल में मंगोलिया के गंखुयांग गनबातर को पहले तीन मिनट के अंदर ही 9-0 से मात दे दी. इस जीत के साथ उन्होंने 1962 के बाद पहली बार किसी भारतीय को इस वर्ग के फाइनल में पहुंचाया.

दूध पहुंचाने से एशियन गेम्स के पोडियम तक

नितेश हरियाणा के सोनीपत जिले के जगसी गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता आनंद सिवाच दूध का छोटा कारोबार करते हैं. नितेश ने शुरुआत में क्रिकेट खेला, लेकिन बाद में प्रताप स्पोर्ट्स स्कूल में कोच ओम प्रकाश दहिया से कुश्ती की ट्रेनिंग शुरू की.

उनके करियर में एक समय ऐसा भी आया जब घुटने की गंभीर चोट के कारण उन्हें कुश्ती छोड़नी पड़ी. इस दौरान उन्होंने परिवार की मदद करने के लिए घर-घर दूध पहुंचाने का काम किया. चोट से ठीक होने के बाद उन्होंने दोबारा कुश्ती में वापसी की. इसके बाद मेहनत करते हुए एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचना उनकी कहानी को खास बनाता है.

इंटरनेशनल मेडल से भरा है करियर

  • 2019: कैडेट एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल
  • 2022: अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल
  • 2025: सीनियर एशियन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल
  • 2026: एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल
  • 2026: एशियन गेम्स में ऐतिहासिक सिल्वर मेडल

ये भी पढ़ें- ब्रह्मोस के खौफ से अभी भी कांप रहा पाकिस्तान, बचने के लिए किया ये चीनी उपाय, जानें खासियत