Anant Chaturdashi 2026: आज शुक्रवार, 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी का पावन पर्व मनाया जा रहा है. यह दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और अनंत व्रत के लिए विशेष माना जाता है. इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से भगवान अनंत की पूजा करते हैं और चौदह गांठों वाला अनंत सूत्र धारण करते हैं. हालांकि, अनंत सूत्र को लेकर अक्सर यह सवाल सामने आता है कि पुरुषों और महिलाओं को इसे किस हाथ में बांधना चाहिए और इसे पूजा से पहले पहनना चाहिए या पूजा के बाद. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे जुड़े कुछ खास नियम बताए गए हैं.
पुरुष और महिलाएं किस हाथ में बांधें अनंत सूत्र?
अनंत सूत्र धारण करने को लेकर प्रचलित परंपरा में पुरुषों के लिए दाहिनी भुजा और महिलाओं के लिए बाईं भुजा में इसे बांधने की बात कही जाती है. हालांकि, कई परिवारों में अनंत सूत्र कलाई पर भी बांधा जाता है. अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि में कुछ अंतर हो सकता है. इसलिए यदि आपके घर में लंबे समय से कोई विशेष परंपरा चली आ रही है, तो उसका पालन किया जा सकता है. केवल हाथ अलग होने को किसी निश्चित अनिष्ट का कारण मानना उचित नहीं है.
पूजा के बाद ही धारण करें अनंत सूत्र
अनंत सूत्र को सीधे हाथ में बांधने के बजाय पहले भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा करने की परंपरा है. इसके लिए सूत्र में चौदह गांठें लगाई जाती हैं और इसे भगवान के सामने रखा जाता है. इसके बाद फूल, धूप और दीप आदि से भगवान अनंत और सूत्र का पूजन किया जाता है. पूजा पूरी होने के बाद श्रद्धापूर्वक अनंत सूत्र को धारण किया जाता है. घर पर पूजा करने वाले श्रद्धालु भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा के सामने भी यह विधि पूरी कर सकते हैं.
अनंत सूत्र की चौदह गांठें क्यों होती हैं?
चौदह गांठों वाला सूत्र अनंत चतुर्दशी की पूजा की खास पहचान माना जाता है. इन गांठों के धार्मिक महत्व को लेकर अलग-अलग परंपराओं में अलग व्याख्याएं मिलती हैं. इसलिए किसी एक व्याख्या को सभी परिवारों के लिए अनिवार्य मानना जरूरी नहीं है. अनंत सूत्र बांधते समय भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का स्मरण किया जाता है. कई घरों में इस दौरान अनंत व्रत की कथा सुनने या पढ़ने की भी परंपरा है.
आज ही मनाई जा रही है अनंत चतुर्दशी
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी का पर्व आज शुक्रवार, 25 सितंबर को मनाया जा रहा है. इस दिन श्रद्धालु अनंत व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं. अनंत चतुर्दशी के साथ गणेशोत्सव का भी समापन होता है और देश के अलग-अलग हिस्सों में गणपति विसर्जन की परंपरा निभाई जाती है. पूजा का शुभ समय स्थान के अनुसार अलग हो सकता है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से मुहूर्त की पुष्टि करना बेहतर रहेगा.
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