Nuke Sniffer Plane: मिडिल-ईस्ट में हालात तेजी से युद्ध की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं. इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच अमेरिका का एक बेहद खास और खतरनाक विमान ब्रिटेन में देखा गया है. अमेरिकी वायुसेना का WC-135R ‘कॉन्स्टेंट फीनिक्स’, जिसे आमतौर पर “न्यूक स्निफर” कहा जाता है, ब्रिटेन के सफ़ोक स्थित RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पर तैनात पाया गया है. यह वही विमान है जो हवा में मौजूद रेडियोधर्मी कणों को पहचानने की क्षमता रखता है.
इस तैनाती को सामान्य सैन्य गतिविधि नहीं माना जा रहा, क्योंकि यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को खुली चेतावनी दे चुके हैं. ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम नहीं छोड़ा, तो उसे ऐसे हमले का सामना करना पड़ेगा जो पहले हुए किसी भी सैन्य अभियान से कहीं ज्यादा विनाशकारी होगा.
UK: Nuke Sniffer USAF WC-135R Constant Phoenix, spotted at RAF Mildenhall, UK pic.twitter.com/JMfxDK5wJW
— Open Source Intel (@Osint613) January 29, 2026
क्या है ‘न्यूक स्निफर’ और क्यों है यह इतना अहम
WC-135R कॉन्स्टेंट फीनिक्स अमेरिकी वायुसेना का सबसे उन्नत परमाणु निगरानी विमान माना जाता है. इसे खास तौर पर हवा में मौजूद रेडियोधर्मी कणों और गैसों की पहचान के लिए डिजाइन किया गया है. यदि कहीं परमाणु विस्फोट होता है या परमाणु परीक्षण से जुड़ी गतिविधियां होती हैं, तो यह विमान वातावरण में फैले सूक्ष्म कणों के नमूने इकट्ठा कर सकता है.
इन नमूनों के विश्लेषण से यह पता लगाया जाता है कि विस्फोट किस प्रकार का था, उसकी तीव्रता कितनी थी और उसका संभावित प्रभाव किस क्षेत्र तक फैल सकता है. यह विमान अत्याधुनिक रिमोट सेंसर्स से लैस है और रियल-टाइम डेटा सीधे अमेरिकी सैन्य कमांड सिस्टम तक भेज सकता है. मौजूदा हालात में इसकी मौजूदगी इस ओर इशारा करती है कि अमेरिका ईरान की किसी भी परमाणु गतिविधि पर बेहद करीबी नजर रखे हुए है.
ट्रंप का अल्टीमेटम और सैन्य जमावड़े का संकेत
ब्रिटेन में ‘न्यूक स्निफर’ की तैनाती और मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी नौसेना के बड़े बेड़े की मौजूदगी, दोनों मिलकर यह संदेश दे रहे हैं कि वॉशिंगटन अब सिर्फ कूटनीति पर निर्भर नहीं रहना चाहता. राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही ईरान को चेतावनी दे चुके हैं कि समय तेजी से खत्म हो रहा है.
उनका कहना है कि अगर तेहरान ने रास्ता नहीं बदला, तो अगली कार्रवाई “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर” से भी कहीं ज्यादा कठोर होगी. अमेरिकी रणनीतिक हलकों में इसे ईरान को बातचीत की मेज पर मजबूर करने या फिर किसी बड़े सैन्य अभियान की जमीन तैयार करने के रूप में देखा जा रहा है.
ब्रिटेन का समर्थन और पश्चिमी देशों की साझा रणनीति
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी अमेरिका के इस रुख का समर्थन किया है. उन्होंने साफ किया है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है. बीजिंग दौरे के दौरान भी स्टार्मर ने यह दोहराया कि ब्रिटेन अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर इस दिशा में काम करेगा. हालांकि लंदन सीधे युद्ध में कूदने से बचना चाहता है, लेकिन अमेरिकी विमानों और सैन्य ढांचे को समर्थन देना यह दिखाता है कि पश्चिमी देश एक साझा रणनीति के तहत आगे बढ़ रहे हैं.
बाहरी दबाव के साथ ईरान का आंतरिक संकट
अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच ईरान के भीतर हालात भी बेहद तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं. विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए की गई सख्त कार्रवाइयों में हजारों लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई हैं. इंटरनेट ब्लैकआउट के चलते वहां की वास्तविक स्थिति पूरी तरह दुनिया के सामने नहीं आ पा रही है.
एक तरफ बाहरी मोर्चे पर अमेरिका और उसके सहयोगियों का सैन्य दबाव है, तो दूसरी ओर देश के अंदर असंतोष और अस्थिरता. इन दोनों मोर्चों पर घिरा ईरान आने वाले दिनों में किस दिशा में कदम उठाता है, यह पूरे मिडिल-ईस्ट की सुरक्षा और वैश्विक राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है.
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