ट्रंप-शी के बीच सीक्रेट कॉल! ताइवान, यूक्रेन और व्यापार पर हुआ बड़ा फैसला?

अमेरिका और चीन के बीच लगातार तनावों के बीच दुनिया की नज़र उस फोन कॉल पर टिक गई, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लंबी और अहम बातचीत की.

America and China xi jinping calls president trump talk on agriculture fentanyl
Image Source: Social Media

अमेरिका और चीन के बीच लगातार तनावों के बीच दुनिया की नज़र उस फोन कॉल पर टिक गई, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लंबी और अहम बातचीत की. मौजूदा वैश्विक हालात, आर्थिक दबाव और ताइवान पर बढ़ती तल्खियों के बीच हुई यह बातचीत कई मायनों में सकारात्मक मानी जा रही है. ट्रंप ने इसे “बहुत अच्छी और सकारात्मक” चर्चा बताते हुए कहा कि इससे दोनों महाशक्तियों के रिश्तों में नया मोड़ आ सकता है.

इस फोन कॉल में दोनों नेताओं ने कई बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर बात की. यूक्रेन युद्ध, फेंटेनाइल ड्रग तस्करी और कृषि व्यापार जैसे विषय चर्चा के मुख्य केंद्र रहे. ट्रंप ने विशेष रूप से अमेरिकी किसानों के लिए हुए नए समझौतों को बेहद लाभकारी बताया. उन्होंने कहा कि सोयाबीन सहित कई अमेरिकी कृषि उत्पादों पर चीन और अमेरिका के बीच सहमति बनने से किसानों को सीधा फायदा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

तीन हफ्ते पुरानी मुलाकात का आगे बढ़ता सिलसिला

ट्रंप ने यह भी बताया कि यह बातचीत हाल ही में दक्षिण कोरिया में हुई उनकी मीटिंग का ही विस्तार थी. दोनों देशों के बीच पिछले कुछ हफ्तों से कूटनीतिक स्तर पर लगातार सक्रियता बनी हुई है. इसी क्रम में दोनों नेताओं ने माना कि नियमित और सीधी बातचीत ही विवादों को कम करने और सहयोग को बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका है.

नेताओं ने एक-दूसरे को दिए दौरे के निमंत्रण

फोन कॉल के दौरान शी जिनपिंग ने ट्रंप को अप्रैल 2026 में बीजिंग आने का निमंत्रण दिया, जिसे ट्रंप ने तुरंत स्वीकार कर लिया. इसके जवाब में ट्रंप ने भी साल के अंत में शी जिनपिंग को अमेरिका आने का न्योता दिया. ट्रंप का कहना है कि दोनों देशों के रिश्ते इस समय स्थिर हैं और आने वाले महीनों में और मजबूत होंगे.

ताइवान विवाद पर चीन का कड़ा रुख कायम

बातचीत के सकारात्मक माहौल के बावजूद ताइवान का मुद्दा चर्चाओं में गंभीरता से शामिल रहा. शी जिनपिंग ने दोहराया कि ताइवान चीन का “अभिन्न हिस्सा” है और उसका पुनर्मिलन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से जुड़ा है. हाल के महीनों में ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ा है, ऐसे में यह बयान चीन की स्पष्ट मंशा दिखाता है.

इतिहास की साझी धरोहर और भविष्य के सहयोग की उम्मीद

दोनों नेताओं ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान साथ मिलकर की गई लड़ाई को याद किया और कहा कि उस दौर की साझी विरासत आज भी दोनों देशों को शांति और सहयोग की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है. उन्होंने संकेत दिया कि मतभेदों के बावजूद संवाद जारी रहेगा और नए सहयोग के रास्ते खोजे जाते रहेंगे.

यह भी पढ़ें: कौन हैं पॉलीन हैनसन, जो बुर्का पहनकर ऑस्ट्रेलियाई संसद में पहुंचीं? कारण आया सामने तो मच गया बवाल