इस्लामाबाद: पाकिस्तान एक बार फिर अपने आतंकी नेटवर्क को नए तरीके से मजबूत करने की कोशिशों को लेकर चर्चा में है. ताजा रिपोर्टों में सामने आया है कि वहां सक्रिय आतंकी संगठन अब पारंपरिक हवाला तंत्र से हटकर आधुनिक डिजिटल माध्यमों की ओर बढ़ रहे हैं. खास तौर पर क्रिप्टोकरेंसी के जरिए फंडिंग जुटाने का चलन तेजी से बढ़ा है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती और भी बढ़ गई है.
रिपोर्ट के अनुसार, Jaish-e-Mohammed और Lashkar-e-Taiba जैसे संगठनों ने अपनी रणनीतियों में बदलाव किया है और अब नए तरीकों से अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं.
क्रिप्टोकरेंसी से फंडिंग: नई चुनौती
पहले आतंकी संगठनों के लिए हवाला नेटवर्क फंडिंग का प्रमुख जरिया हुआ करता था, लेकिन अब डिजिटल करेंसी और क्रिप्टोकरेंसी ने उसकी जगह लेना शुरू कर दिया है. एन्क्रिप्टेड लेन-देन होने के कारण इन ट्रांजैक्शन्स को ट्रैक करना बेहद कठिन हो जाता है. यही वजह है कि यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीकी बदलाव आतंकी संगठनों को गुमनाम रहकर फंड जुटाने और अपने नेटवर्क को लंबे समय तक सक्रिय बनाए रखने में मदद कर रहा है.
नई विंग्स से बढ़ा खतरा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि Jaish-e-Mohammed ने ‘जमात-उल-मोमिनात’ नाम से एक नई इकाई बनाई है, जिसके जरिए महिलाओं को आतंकी गतिविधियों में शामिल करने की कोशिश की जा रही है. सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, महिलाओं का इस्तेमाल जासूसी, हथियारों की सप्लाई और यहां तक कि आत्मघाती मिशनों में भी किया जा सकता है.
वहीं Lashkar-e-Taiba अपनी तथाकथित ‘वॉटर विंग’ को मजबूत कर रहा है, जिसका मकसद समुद्री रास्तों के जरिए घुसपैठ और हमले करना है. माना जा रहा है कि यह रणनीति 2008 के मुंबई हमलों के बाद और अधिक विकसित की गई है.
पहलगाम हमले से जुड़े संकेत
रिपोर्ट में पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी का जिक्र करते हुए पाकिस्तान की कथित भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं. यह हमला ऐसे समय हुआ था जब जम्मू-कश्मीर में शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न हुए थे.
सुरक्षा बलों द्वारा जुलाई 2025 में श्रीनगर के जंगलों में मारे गए आतंकियों में हबीब ताहिर और बिलाल अफजल शामिल थे, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से जुड़े बताए गए. इन घटनाओं को सीमा पार से मिल रहे समर्थन का संकेत माना जा रहा है.
कश्मीर में अस्थिरता फैलाने की कोशिश
विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान की तथाकथित ‘डीप स्टेट’- जिसमें उसकी सेना और खुफिया एजेंसी शामिल मानी जाती है, का उद्देश्य कश्मीर में सामान्य होते हालात को प्रभावित करना है. जब भी क्षेत्र में निवेश या पर्यटन बढ़ता है, आतंकी गतिविधियों में तेजी देखी जाती है.
इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश देना होता है कि कश्मीर अब भी अस्थिर है, ताकि आर्थिक और सामाजिक विकास को प्रभावित किया जा सके.
ग्लोबल रिपोर्ट्स में भी चिंता
2026 के ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान शीर्ष पर बताया गया है, जो वहां की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है. इसके अलावा, अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में भी आतंकी गतिविधियों के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े संकेत मिले हैं.
न्यूयॉर्क में एक यहूदी केंद्र पर हमले की साजिश हो या दक्षिण कोरिया में एक संदिग्ध की गिरफ्तारी, इन घटनाओं के तार भी कथित तौर पर पाकिस्तान से जुड़े बताए गए हैं.
क्यों खतरनाक है यह डिजिटल बदलाव
आतंकी संगठनों द्वारा क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल उन्हें पारंपरिक निगरानी तंत्र से बचने का मौका देता है. यह फंडिंग का ऐसा माध्यम है जिसमें पहचान छिपाना आसान होता है और ट्रांजैक्शन को ट्रेस करना मुश्किल.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तकनीक का इस्तेमाल कर आतंकी संगठन अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों, जैसे Financial Action Task Force, की नजरों से बचने की कोशिश कर रहे हैं.
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