8th Pay Commission: पहले कभी नहीं बढ़ी इतनी ज्यादा सैलरी! कर्मचारियों की कमाई में होगी रिकॉर्ड बढ़ोतरी?

केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही आयोग के गठन की अधिसूचना भी जारी कर दी गई है.

8th Pay Commission Government employees will see a record increase in their earnings
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही आयोग के गठन की अधिसूचना भी जारी कर दी गई है.

सरकार ने आयोग को अपनी सिफारिशें 18 महीने के भीतर देने को कहा है. नए वेतन आयोग का फायदा करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों, 69 लाख पेंशनभोगियों और रक्षा सेवाओं के कर्मचारियों को मिलेगा.

क्यों सबसे महंगा माना जा रहा है 8वां वेतन आयोग?

माना जा रहा है कि 8वां वेतन आयोग अब तक का सबसे बड़ा और सबसे महंगा वेतन संशोधन साबित हो सकता है.

इसकी वजह यह है कि कर्मचारियों और पेंशनर्स की संख्या पहले से काफी बढ़ चुकी है. इसके अलावा कर्मचारी संगठन बेसिक सैलरी, फिटमेंट फैक्टर और भत्तों में बड़ी बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं.

अगर इन मांगों का बड़ा हिस्सा मान लिया जाता है, तो सरकार पर पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा खर्च आएगा.

बेसिक सैलरी बढ़ाने की मांग

फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है.

अब अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने फिटमेंट फैक्टर 1.92 से लेकर 3.83 गुना तक करने की मांग की है.

वहीं, भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ ने बेसिक सैलरी को 18,000 रुपये से बढ़ाकर 72,000 रुपये करने का प्रस्ताव दिया है.

हालांकि, सरकार ने अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है.

HRA और दूसरे भत्तों में भी बढ़ोतरी की मांग

कर्मचारी संगठनों ने सिर्फ बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि हाउस रेंट अलाउंस (HRA) बढ़ाने की भी मांग की है.

मांग के मुताबिक, HRA को 30%, 20% और 10% से बढ़ाकर क्रमशः 36%, 24% और 12% किया जाए.

चूंकि ज्यादातर भत्ते बेसिक सैलरी के आधार पर तय होते हैं, इसलिए अगर बेसिक वेतन बढ़ता है तो भत्तों पर होने वाला खर्च भी बढ़ जाएगा.

सरकार पर कितना पड़ सकता है बोझ?

रिपोर्टों के मुताबिक, 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद बढ़ी हुई सैलरी और पेंशन पर सरकार का कुल खर्च 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकता है.

अगर कर्मचारियों के एरियर (बकाया राशि) को भी इसमें जोड़ दिया जाए, तो कुल वित्तीय बोझ करीब 9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.

यही वजह है कि 8वें वेतन आयोग को अब तक का सबसे महंगा वेतन संशोधन माना जा रहा है.

हालांकि, सैलरी, फिटमेंट फैक्टर और भत्तों को लेकर अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा.

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