मुज़फ़्फराबाद (POK): पाकिस्तान के नियंत्रण वाले कश्मीर क्षेत्र (POK) में बुनियादी आवश्यकताओं पर सब्सिडी में कटौती के विरोध में शुरू हुए व्यापक आंदोलन में हाल ही में एक विवादास्पद घटना सामने आई है. प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों के 25 जवानों को बंधक बना लिया है. इस कदम के बाद क्षेत्र में तनाव और संघर्ष की स्थिति गहरी हो गई है.
बोले जाने के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने उन सैनिकों को मानव ढाल की तरह इस्तेमाल किया है ताकि सुरक्षा बलें उन पर सीधी कार्रवाई न कर सकें. इस रणनीति ने सैनिकों की गतिविधियों को सीमित कर दिया है. प्रदर्शनकारियों का यह भी आरोप है कि खुफिया एजेंसियां आंदोलन को दबाने के लिए गुप्त हमले कर रही हैं. वे सादे कपड़ों में घुसपैठकारियों को भेजा जाना और भीड़ में अफरातफरी फैलाना, नेताओं को निशाना बनाना आदि आरोप लगाते हैं.
Visuals of Pakistani forces lying on the ground after violent clashes with civilians in Pakistan Occupied Kashmir (PoK) today. This is the situation of Pakistani forces under the leadership of Asim Munir. Forces are surrendering before civilians in PoK. pic.twitter.com/IdFfw5toZM
— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) October 1, 2025
प्रदर्शन में मौत और घायल: हिंसा बढ़ी
प्रदर्शनकारियों पर नियंत्रण पाने की कोशिश में सुरक्षा बलों ने बुधवार को निहत्थे लोगों पर गोलीबारी की. इस जवाबी कार्रवाई में 8 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग घायल हुए. पिछले चार दिनों के आंदोलन में अब तक कुल 10 लोग मारे जा चुके हैं.
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ये मृतक आम नागरिक थे, जिनमें प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार पर दबाव बनाने वाले लोग भी शामिल हैं.
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि: मांगे और कारण
यह आंदोलन जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) की अपील पर शुरू हुआ है. प्रदर्शनकारियों का मानना है कि सरकार ने उनकी मौलिक आवश्यकताओं और अधिकारों को अनदेखा किया है और महंगाई एवं महंगे बिजली-बिल, खाद्य सामग्री की कीमतों से उनकी स्थिति बद से बदतर हो गई है.
उन्होंने सरकार के सामने 38 मांगों की सूची पेश की है, जिनमें से कुछ मुख्य निम्नलिखित हैं:
रिज़र्व सीटों को हटाने की मांग क्यों महत्वपूर्ण?
ये 12 रिज़र्व सीटें उन लोगों के लिए आरक्षित हैं जो युद्ध, व्यवधानों या संघर्ष की वजह से भारत से POK में आ बसे हैं. उदाहरण के लिए 1947, 1965 या 1971 की लड़ाइयों या उसके बाद की परिव्रजन लहरों के कारण. हालांकि, स्थानीय आबादी का तर्क है कि इन सीटों के कारण उनका प्रतिनिधित्व कम हो जाता है और कुछ दर्जन परिवारों का राजनीतिक दबदबा बढ़ जाता है.
#WATCH | Pakistani Rangers opened fire on peaceful protesters in Muzaffarabad and other parts of PoJK who were demanding the Self-Rule Charter of Demands. Sources report over half a dozen casualties and several serious injuries in the past three days.
— ANI (@ANI) October 1, 2025
(Video source: Local… pic.twitter.com/leZMYhRukT
JKJAAC का कहना है कि यदि वे केवल स्थानीय आबादी से चुने गए प्रतिनिधि हों, तो उनकी समस्याएँ बेहतर तरीके से सामने आ सकेंगी और समाधान हो सकेगा.
प्रदर्शनकारी अपनी आवाज बुलंद कर रहे
JKJAAC के एक प्रमुख नेता शौकत नवाज़ मीर ने आंदोलन को “70 वर्षों से अनदेखी किए गए मौलिक अधिकारों की मांग” करार दिया. उन्होंने मृतकों के परिवारों के लिए मुआवज़े की मांग की और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की बात कही. मीर ने चेतावनी दी कि यह सिर्फ “प्लान A” है और यदि सरकार नहीं मानी तो आगे “प्लान D” जैसे खतरनाक विकल्प सामने आ सकते हैं.
उनका यह बयान दर्शाता है कि प्रदर्शन अब सिर्फ आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग बन चुका है.
पत्रकारों पर पाबंदी और संचार का नियंत्रण
पाकिस्तान सरकार ने POK में पत्रकारों और पर्यटकों की प्रवेश पर रोक लगा दी है. स्थानीय रिपोर्टर्स कहते हैं कि उन्हें न्यूट्रल रिपोर्टिंग करने से रोका जा रहा है, और कुछ मामलों में मीडिया को केवल सरकारी प्रस्तुतियों की अनुमति है.
इसके अलावा, आधी रात से इंटरनेट बंद कर दिया गया है ताकि विरोध आंदोलन का संचार और संगठन प्रभावित हो. सरकार इस कदम को इस डर से उठा रही है कि विरोध प्रदर्शन स्वतंत्रता या अलगाव की मांगों में बदल सकते हैं.
POK में विरोध प्रदर्शन: एक पुरानी परंपरा
यह स्थिति कोई नई नहीं है. POK में पिछले वर्षों में कई बार जनता ने सरकार और सेना के खिलाफ प्रदर्शन किया है:
लोकल लोग अक्सर यह तर्क देते हैं कि POK में बिजली उत्पादन जैसे संसाधन स्थानीय स्तर पर मौजूद हैं (जैसे मंगला डैम), लेकिन स्थानीय जनता को उनका उचित लाभ नहीं मिलता.
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