Mahashivratri 2026: 15 या 16 जनवरी... इस साल कब मनाई जाएगी महाशिवरात्रि? जानें विशेष जप और शुभ मुहूर्त

Mahashivratri 2026 Date: इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व विशेष योग में मनाया जाएगा, जिसे सर्वार्थ सिद्धि योग के नाम से जाना जाता है. फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर आने वाला यह महोत्सव आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 

15th or 16th January Mahashivratri celebrated this year Know special chanting and auspicious time
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

Mahashivratri 2026 Date: इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व विशेष योग में मनाया जाएगा, जिसे सर्वार्थ सिद्धि योग के नाम से जाना जाता है. फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर आने वाला यह महोत्सव आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 

सनातन धर्म की परंपरा में महाशिवरात्रि को ऐसा दिव्य पर्व कहा गया है, जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर साधक के हृदय में ज्ञान का दीप प्रज्वलित करता है और जीवन में शिव तत्व की अनुभूति को जगाता है.

इस वर्ष महाशिवरात्रि की तिथि और मुहूर्त इस प्रकार है:

तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी 2026, दोपहर 05:04 बजे

तिथि समाप्ति: 16 फरवरी 2026, दोपहर 05:34 बजे

व्रत पालन का दिन: 15 फरवरी 2026

व्रत पारण: 16 फरवरी 2026

यह पर्व इस वर्ष विशेष इसलिए भी बन रहा है क्योंकि यह श्रवण नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग के दुर्लभ संयोग में पड़ रहा है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब कोई महापर्व इस प्रकार के विशेष योग में आता है, तो उस दिन की गई पूजा, जप, तप और दान का फल सामान्य से कहीं अधिक होता है.

सर्वार्थ सिद्धि योग का महत्व

सर्वार्थ सिद्धि योग को सभी कार्यों की सिद्धि कराने वाला योग माना जाता है. इसे साधकों के लिए अत्यंत शुभ समय माना जाता है, क्योंकि इस योग में किए गए कर्म न केवल सांसारिक लाभ प्रदान करते हैं बल्कि आत्मिक उन्नति और मोक्ष की दिशा में भी सहायता करते हैं. ऐसे शुभ योग में महाशिवरात्रि मनाने से साधक अपने जीवन में ज्ञान, समृद्धि और शांति का अनुभव कर सकते हैं.

पौराणिक दृष्टि से महाशिवरात्रि

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का पावन विवाह संपन्न हुआ था. माता पार्वती ने कठोर तपस्या के बाद शिव को अपना पति रूप में प्राप्त किया. इस कथा में केवल विवाह की बात नहीं है, बल्कि यह प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक भी है. भगवान शिव ने वैराग्य में रहते हुए गृहस्थ जीवन स्वीकार किया और लोक कल्याण के मार्ग पर अग्रसर हुए. यही कारण है कि महाशिवरात्रि को दांपत्य सुख-सौभाग्य, पारिवारिक स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति का पर्व भी माना जाता है.

महाशिवरात्रि में विशेष जप और मंत्र

साधक इस दिन विशेष मंत्रों का जाप करके अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आंतरिक शांति प्राप्त कर सकते हैं. प्रमुख मंत्र इस प्रकार हैं:

ॐ नमः शिवाय- यह सबसे प्रचलित और शक्तिशाली शिव मंत्र है, जो अज्ञान नाश और आध्यात्मिक जागरण का मार्ग खोलता है.

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्. उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्.- इसे मृत्युञ्जय मंत्र कहते हैं. यह स्वास्थ्य, दीर्घायु और संकटमोचन के लिए अत्यंत प्रभावकारी है.

ॐ हौं जुं स: मृत्युंजयाय नमः- मृत्युंजय मंत्र का यह संक्षिप्त रूप जीवन में भय और रोगों को दूर करने के लिए उच्च लाभकारी माना जाता है.

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि. तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्- यह मंत्र साधक को शांति, सफलता और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है.

महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक संदेश

महाशिवरात्रि केवल एक व्रत या पर्व नहीं है. यह जीवन में ज्ञान, संयम, प्रेम और समर्पण का संदेश देती है. इस दिन की गई साधना साधक को आंतरिक शक्ति, मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक जागरूकता प्रदान करती है.

विशेष रूप से इस वर्ष का सर्वार्थ सिद्धि योग साधकों के लिए अवसर का एक अनोखा द्वार खोल रहा है, जिससे न केवल सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति संभव है, बल्कि आत्मा की उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त होता है. इसलिए 15 फरवरी 2026 की महाशिवरात्रि को श्रद्धा, भक्ति और तप के साथ मनाना अत्यंत लाभकारी रहेगा.

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