विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में आयरलैंड के यूनिवर्सिटी कॉलेज डबलिन में एक महत्वपूर्ण संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने संघर्षों और कूटनीतिक समाधान के महत्व पर जोर दिया. जयशंकर ने कहा कि वर्तमान समय में संघर्ष एक प्रमुख मुद्दा बन चुका है, और भारत का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मतभेदों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए, न कि युद्ध के रास्ते से.
आतंकी हमले पर चर्चा
अपने भाषण में, जयशंकर ने भारत-आयरलैंड के आतंकवाद विरोधी सहयोग को भी रेखांकित किया. उन्होंने 1985 में एयर इंडिया विमान पर हुए आतंकवादी हमले का उल्लेख करते हुए बताया कि इस हमले में 329 निर्दोष लोगों की जान गई थी, और यह घटना आयरलैंड के पश्चिमी तट पर स्थित अहाकिस्ता गांव में हुई थी. उन्होंने कहा, ‘‘यह घटना एक गंभीर आतंकवादी हमले का उदाहरण है, और यही हमें याद दिलाती है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई एक सतत चुनौती है, जिसे पूरी दुनिया को मिलकर सशक्त तरीके से हल करना होगा.’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘आज के समय में, भारत का दृढ़ विश्वास है कि कोई भी संघर्ष युद्ध के मैदान में नहीं सुलझाया जा सकता. ऐसे मतभेदों को सिर्फ संवाद और कूटनीति के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए.’’ उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष को लेकर भी कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा की, और बताया कि भारत लंबे समय से आतंकवाद के शिकार रहा है.
व्यापार वार्ता पर भी अपनी बात रखी
विदेश मंत्री ने आगे कहा, ‘‘आयरलैंड के अहाकिस्ता गांव में एयर इंडिया के कनिष्क विमान बम विस्फोट में मारे गए 329 लोगों की याद में एक स्मारक पट्टिका स्थापित की गई है. यह स्मारक हम सभी को याद दिलाता है कि आतंकवाद के खिलाफ एक सतत और प्रतिबद्ध प्रयास की जरूरत है.’’
इसके अलावा, जयशंकर ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच चल रही व्यापार वार्ता पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष मुक्त व्यापार समझौते पर करीब 23 वर्षों से बातचीत कर रहे हैं. हाल ही में, यूरोपीय संघ के अध्यक्ष ने 21 आयुक्तों के साथ भारत का दौरा किया था, जिससे अब इस समझौते के संपन्न होने की संभावना बढ़ गई है. जयशंकर ने इस पर कहा, ‘‘हम अब आशान्वित हैं कि यह प्रक्रिया इस वर्ष के अंत तक समाप्त हो सकती है.’’
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