रूस और अमेरिका के बीच यूक्रेन युद्ध को लेकर तनाव किसी से छिपा नहीं है. अमेरिका ने यूक्रेन को हथियार, सैन्य उपकरण और खुफिया जानकारी देकर रूस के खिलाफ उसकी मदद की थी. अब ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच रूस की भूमिका को लेकर बड़ा दावा सामने आया है. कहा जा रहा है कि रूस ने ईरान की सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए पहले से ही तैयारी कर रखी थी. इसके तहत ईरान को 90 मिसाइल लॉन्चर देने का समझौता किया गया था. इससे कुछ दिन पहले ही ईरान ने रूस से SU-35 लड़ाकू विमान खरीदने की डील पूरी होने की बात कही थी.
यूक्रेन की रक्षा खुफिया से जुड़े रिसर्च ग्रुप डलास एनालिटिक्स ने रूस के रक्षा उद्योग से जुड़े कुछ आंतरिक दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं. फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, इन दस्तावेजों में 'K-10' नाम के एक समझौते का जिक्र है. दावा किया गया है कि इस कोड का इस्तेमाल ईरान के लिए किया गया था. समझौते के तहत सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइलों के लिए 90 APU-L लॉन्चर तैयार किए जाने थे. इनके जरूरी कलपुर्जों की आपूर्ति का काम 2024 के आखिरी महीनों से दिसंबर 2025 तक तय किया गया था. हालांकि, इन दस्तावेजों से यह साफ नहीं होता कि सभी लॉन्चर बनकर ईरान पहुंच भी गए थे या नहीं. फिर भी रिसर्च ग्रुप इसे रूस की ओर से ईरान को सैन्य सामान देने का अहम सबूत मान रहा है.
रूस ने हथियार देने के लिए अपनाया K-10 कोड?
इस पूरे मामले में K-10 कोड को काफी अहम माना जा रहा है. डलास एनालिटिक्स का दावा है कि रूस के दूसरे दस्तावेजों में भी इस कोड का इस्तेमाल ईरान के लिए किया गया था. अक्टूबर 2022 के एक दस्तावेज में याक-130 विमान से जुड़े उपकरणों की आपूर्ति का जिक्र है. इसमें सामान पाने वाले देश के तौर पर 'K10 Iran' लिखा गया था. इस दस्तावेज पर रूसी रक्षा मंत्रालय के 704वें सैन्य प्रतिनिधि कार्यालय के कार्यवाहक प्रमुख के हस्ताक्षर भी मौजूद थे.
इसके अलावा रूस के एक उत्पादन रिकॉर्ड में K-10 के लिए छह याक-130 विमानों का जिक्र मिला है. सितंबर 2023 में ईरान के सरकारी मीडिया ने इन विमानों के अपनी वायुसेना में शामिल होने की तस्वीरें भी दिखाई थीं. डलास एनालिटिक्स के मुताबिक, ईरान के एक याक-130 विमान का टेल नंबर रूसी फैक्ट्री के रिकॉर्ड में दर्ज नंबर से मेल खाता है. इससे यह दावा मजबूत होता है कि रूस K-10 कोड के जरिए ईरान को सैन्य उपकरणों की आपूर्ति कर रहा था.
90 मिसाइल लॉन्चर मिलने से ईरान को क्या फायदा होगा?
रिपोर्ट के मुताबिक, APU-L लॉन्चर रूस की LMUR मिसाइल दागने के लिए बनाए गए हैं. इसे प्रोडक्ट 305 और Kh-39 के नाम से भी जाना जाता है. यह एक सटीक निशाना लगाने वाली मिसाइल है, जिसे हेलिकॉप्टर से दागा जा सकता है. इसका वजन करीब 230 पाउंड है और इसमें 55 पाउंड का वारहेड लगा होता है.
इस मिसाइल की खासियत यह है कि इसे हवा में रहते हुए भी ऑपरेटर नियंत्रित कर सकता है. इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम और दोतरफा रेडियो संपर्क की सुविधा दी गई है. यानी मिसाइल के लक्ष्य तक पहुंचने के दौरान ऑपरेटर उसकी दिशा और निशाने पर नजर रख सकता है. इससे हमला ज्यादा सटीक तरीके से करने में मदद मिलती है.
Mi-28 हेलिकॉप्टर और SU-35 जेट भी खरीदेगा ईरान
ईरान पहले ही रूस से Mi-28 अटैक हेलिकॉप्टर खरीदने की योजना का खुलासा कर चुका है. ये हेलिकॉप्टर LMUR जैसी मिसाइलों को दागने में सक्षम हैं. जनवरी 2026 में ईरान में Mi-28NE हेलिकॉप्टर के पहले निर्यात संस्करण की तस्वीरें भी सामने आई थीं.
ऐसे में मिसाइल लॉन्चर, मिसाइल और हेलिकॉप्टर से जुड़ी ये जानकारियां ईरान की सैन्य ताकत बढ़ाने में रूस की संभावित भूमिका की ओर इशारा करती हैं. वहीं, हाल ही में ईरान ने यह भी पुष्टि की थी कि रूस से SU-35 लड़ाकू विमान खरीदने का समझौता पूरा हो चुका है. अगर 90 मिसाइल लॉन्चर की आपूर्ति वाला दावा सही साबित होता है, तो यह अमेरिका और ईरान के बीच टकराव में रूस की भूमिका को लेकर एक बड़ा संकेत हो सकता है.