बदला लेगा तालिबान! 'गॉडफादर' के बेटे की हत्या से मचा हड़कंप, पाकिस्तान की 'नापाक' हरकत से छिड़ेगा युद्ध?

इस हमले में तालिबान के संस्थापक मौलाना सामी उल हक के बेटे मौलाना हामिद उल हक की मौत हो गई.

Taliban will take revenge murder of Godfather son caused uproar Pakistan
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo: Freepik

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के नौशेरा जिले में स्थित प्रसिद्ध मदरसा दारुल उलूम हक्कानिया में शुक्रवार को हुए आत्मघाती हमले ने राजनीतिक और सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित किया है. इस हमले में तालिबान के संस्थापक मौलाना सामी उल हक के बेटे मौलाना हामिद उल हक की मौत हो गई. यह हमला जुमे की नमाज के बाद हुआ और इसमें उनके पांच अन्य करीबी सहयोगी भी मारे गए. आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी आईएसकेपी (इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत) ने ली है, जो इस समय पाकिस्तानी सेना के इशारे पर तालिबान को निशाना बना रहा है.

दोनों सेनाओं के बीच लगातार झड़पें

यह हमला पाकिस्तान और तालिबान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुआ है, खासकर डूरंड लाइन के नजदीक स्थित सीमाई क्षेत्रों में, जहां दोनों सेनाओं के बीच लगातार झड़पें हो रही हैं. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि आईएसकेपी ने यह हमला पाकिस्तानी सेना के आदेश पर किया, जिससे दोनों के बीच बढ़ती असहमति और प्रतिस्पर्धा को और बढ़ावा मिला है. हमलावर ने विस्फोटकों से भरा जैकेट पहन रखा था और वह मौलाना हामिद उल हक के पास गया, जो एक मस्जिद के लिए निकलने वाले थे. इसके बाद, उसने खुद को उड़ा लिया, जिससे मौके पर ही हामिद उल हक की मौत हो गई. इस हमले में करीब 24 लोग घायल भी हुए हैं.

दारुल उलूम हक्कानिया, जो कि तालिबान के लिए एक ऐतिहासिक प्रशिक्षण केंद्र और विचारधारा का गढ़ माना जाता है, 1990 के दशक से आतंकवाद और कट्टरपंथी विचारधारा को फैलाने का मुख्य केंद्र रहा है. यह मदरसा पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा के पास स्थित है, और इसे आज भी कट्टरपंथी मुस्लिम समूहों का अड्डा माना जाता है. इस मदरसे ने न केवल तालिबान के लिए विचारधारात्मक समर्थन प्रदान किया, बल्कि इसे अफगानिस्तान में तालिबानी शासन की स्थापना के लिए भी एक महत्वपूर्ण आधार बना दिया था.

शहबाज शरीफ ने इस हमले की कड़ी निंदा की

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे पाकिस्तान की सुरक्षा और समाज के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में देखा है. साथ ही, यह हमला एक ऐसे समय पर हुआ है, जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंधों में तनाव अपनी चरम सीमा पर है. पाकिस्तानी अधिकारियों का मानना है कि यह हमला स्पष्ट रूप से मौलाना हामिद उल हक को निशाना बनाने के लिए किया गया था, जो तालिबान और पाकिस्तान के बीच होने वाली सख्त राजनीतिक बातचीत और संघर्षों का हिस्सा थे.

सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, इस हमले को अफगानिस्तान के तालिबान शासन से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि पाकिस्तान ने अफगान तालिबान के खिलाफ कई बार आक्रामक बयान दिए हैं. हाल ही में, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अफगान तालिबान सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने तोरखम सीमा पर एक सैन्य चौकी बनाने का प्रयास किया था, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया. पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सेनाओं ने इस क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की है, जो इस समय दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा रहा है.

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