राहुल-प्रियंका की क्लास से लेकर अखिलेश के 'गिरगिटेश' पोस्टर तक, जानें सियासत में अंदरखाने क्या चल रहा?

Political popcorn: गठबंधन की सियासत में इन दिनों बयानबाजी, संगठन की समीक्षा और रायबरेली का पोस्टर वार चर्चा में है. राहुल-प्रियंका की संगठनात्मक सक्रियता से लेकर अखिलेश यादव से जुड़े पोस्टर विवाद तक, अलग-अलग घटनाओं ने सियासी हलचल बढ़ा दी है.

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Political Popcorn

1.सिर्फ चार को बोलने की छूट, बाकी सब पर 'सेंसरशिप' !

सपा-कांग्रेस गठबंधन में बयानवीरों पर नकेल !

​इंडी गठबंधन के भीतर सीटों और रणनीति को लेकर छिड़ी अंदरूनी कलह से घबराए शीर्ष नेतृत्व ने अपने ही प्रवक्ताओं और नेताओं के मुंह पर अनुशासन का ताला जड़ दिया है. अलबत्ता अब साफ फरमान जारी हुआ है कि इस गठबंधन पर केवल राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और डिंपल यादव ही बोल सकेंगे, बाकी नेता सिर्फ ताली बजाएंगे. सचमुच लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी का झंडा बुलंद करने वाले दलों में जब अपने ही सहयोगियों की आवाज दबाने के लिए 'डंडे के दम पर एकता' का मॉडल लागू हो, तो नजारा देखने लायक होता है. निजी महत्वाकांक्षाओं और तल्ख बयानों से बिखरते कुनबे को बचाने के लिए अब आलाकमान सीधे नेताओं की क्लास लेने के मूड में है. राजनीतिक प्रेक्षक इसे डैमेज कंट्रोल की हताश कोशिश करार दे रहे हैं, क्योंकि जब अविश्वास गहरा हो तो खामोशी से भी चिंगारियां निकल ही आती हैं. क्या सिर्फ चार चेहरों की मंजूरी से राज्यों की अंदरूनी फूट और टिकटों की मारामारी पर पर्दा डाला जा सकेगा, यह सियासी गलियारे का सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न है ?

​2. 35 मिनट की 'हॉटलाइन'.. मजबूरी का मेल या आखिरी खेल?

बढ़ते अविश्वास के बीच राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की लंबी फोन वार्ता !

 ​ममता के गढ़ में कांग्रेस से तल्खी और दिल्ली में साझा मंच की मजबूरी के बीच राहुल गांधी और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के बीच करीब 35 मिनट तक सीक्रेट फोन वार्ता चली है. अलबत्ता चर्चा का मुख्य लब्बोलुआब गठबंधन की लगातार गिरती साख और सरकार को घेरने की तमाम रणनीतियों के औंधे मुंह गिरने के बाद का डैमेज कंट्रोल ही रहा. सचमुच, बंगाल की जमीन पर एक-दूसरे को पानी पी-पीकर कोसने वाले दल जब बंद कमरों में 'मजबूरी की नजदीकी' दिखाने लगें, तो समझ लीजिए कि दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है. राज्यों में अलग राह चलने की जिद और केंद्र में हाथ मिलाने का यह दोहरा रवैया अब खुद नेताओं के गले की फांस बन चुका है. राजनीतिक प्रेक्षक इस लंबी बातचीत को विपक्षी खेमे में पसरी भारी घबराहट और अविश्वास की खाई को पाटने की अंतिम कवायद के तौर पर देख रहे हैं. क्या फोन पर हुई यह 35 मिनट की कसरत दिल्ली और कोलकाता के बीच जमी बर्फ को पिघला पाएगी, यह दोनों दलों के सामने विराट प्रश्न बना हुआ है !

​3. वेणुगोपाल की वर्चुअल क्लास..लचर प्रभारियों पर आलाकमान लाल!

​राज्यों में ढीले संगठन और एसआईआर विवाद के बीच कांग्रेस महासचिव की इमरजेंसी बैठक !

​राज्यों में संगठन के लचर प्रदर्शन और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर मची खलबली के बीच कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने अचानक सभी महासचिवों और प्रभारियों की आपातकालीन ऑनलाइन बैठक तलब कर ली. अलबत्ता बैठक का माहौल चाय पर चर्चा जैसा बिल्कुल नहीं था, बल्कि आलाकमान ने प्रभारियों के सुस्त रवैये और राज्यों में बढ़ती आंतरिक गुटबाजी पर जमकर पेंच कसे. सचमुच जब ज़मीन खिसक रही हो और राज्यों के सूबेदार सिर्फ दिल्ली दरबार में हाजिरी बजाने तक सीमित रह जाएं तो ऐसी इमरजेंसी बैठकों की नौबत आना तय है. कमजोर होते प्रभाव और कार्यकर्ताओं के गिरते मनोबल को थामने के लिए अब संगठन स्तर पर बड़े बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है. राजनीतिक प्रेक्षक मान रहे हैं कि मीडिया में आई खबरों के बाद पार्टी बैकफुट पर है और प्रभारियों से जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ चुका है. क्या स्क्रीन पर लगाई गई यह वर्चुअल डांट जमीनी स्तर पर संगठन में नई जान फूंक पाएगी ?

​4. गांधी परिवार के गढ़ में 'पोस्टर वार'..रंग बदला या मिजाज?

रायबरेली में सपा की 'पीडीए यात्रा' के पहले दिन ही बवाल..'गिरगिट' पोस्टरों पर कांग्रेस ने कसा तंज !

​रायबरेली की सियासी सरजमीं पर समाजवादी पार्टी की महत्वाकांक्षी 'पीडीए यात्रा' का आगाज होते ही गठबंधन का सारा सौहार्द पोस्टरों की भेंट चढ़ गया. यात्रा शुरू होने से ठीक पहले अखिलेश यादव को गिरगिट की तरह रंग बदलते दिखाते विवादित पोस्टर सड़कों पर चस्पा हो गए, जिसने दोनों दलों के कार्यकर्ताओं को आमने-सामने ला खड़ा किया. अलबत्ता इस पर तड़का तब लगा जब सहयोगी कांग्रेस ने ही चुटकी लेते हुए कह दिया कि अगर सपा का संगठन इतना ही मजबूत था तो ऐसे पोस्टर लग कैसे गए? सचमुच जिस धरती को कांग्रेस अपना अभेद्य किला मानती है वहां सपा की यात्रा पर अपनों का ही यह तंज दिखावटी एकता के परखच्चे उड़ाने के लिए काफी है. राजनीतिक प्रेक्षक इस पोस्टर वार को दोनों दलों के बीच जमीनी स्तर पर चल रही वर्चस्व की लड़ाई का खुला इजहार मान रहे हैं. क्या लखनऊ के मंचों से दिखने वाला भाईचारा रायबरेली की गलियों में कार्यकर्ताओं के दिलों तक कभी पहुंच पाएगा, यह गठबंधन के भविष्य का प्रश्न है !

5 'अज्ञानी' सचिवों का डब्बा गोल..सिफारिशी नेताओं पर राहुल-प्रियंका का हथौड़ा!

अपने ही सूबे के दिग्गजों के नाम न बता पाने वाले 'परची' नेताओं पर गिरी गाज !

​कांग्रेस संगठन में सचिव बनने का ख्वाब देख रहे सिफारिशी नेताओं की अज्ञानता ने पार्टी की ऐसी फजीहत कराई कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के निर्देश पर पूरी इंटरव्यू प्रक्रिया को ही कूड़ेदान में डाल दिया गया. साक्षात्कार के दौरान जब राजस्थान, यूपी, हरियाणा और पंजाब के कई 'खासमखास' दावेदार अपने ही राज्य के कद्दावर नेताओं तक के नाम नहीं बता पाए, तो आलाकमान का माथा ठनक गया. अलबत्ता मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की मैराथन बैठक के बाद यह कड़ा फैसला लिया गया कि अब सिफारिशी पर्चियों पर कोई लाल बत्ती या पद नहीं बंटेगा. सचमुच संगठन को धार देने निकले नेतृत्व के सामने जब 'गूगल ज्ञान' से भी खाली नेताजी पहुंचे तो किरकिरी होना लाजिमी था. राजनीतिक प्रेक्षक इसे जमीनी कार्यकर्ताओं की जीत और दरबारी संस्कृति पर करारा प्रहार बता रहे हैं. क्या पार्टी अब सचमुच बिना किसी गॉडफादर के सिर्फ पसीना बहाने वाले कार्यकर्ताओं को संगठन की चाबी सौंपेगी, यह कांग्रेस की कार्यप्रणाली के सामने सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न है !

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