जेलेंस्की तो ट्रंप से भिड़ गए... पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति को कैसे संभाला? विदेशी एक्सपर्ट ने की तारीफ

यह बहस तब शुरू हुई जब ट्रंप ने बार-बार जेलेंस्की पर अमेरिका का अपमान करने का आरोप लगाया.

Zelensky clashed with Trump How did PM Modi handle the US President
पीएम मोदी और ट्रंप | Photo: ANI

वाशिंगटनः व्हाइट हाउस में शुक्रवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक तीखी बहस हुई. यह बहस तब शुरू हुई जब ट्रंप ने बार-बार जेलेंस्की पर अमेरिका का अपमान करने का आरोप लगाया. यहां तक कि एक पल में ट्रंप ने यह कह डाला कि "अगर अमेरिका यूक्रेन से हट जाए तो, युद्ध में यूक्रेन दो हफ्ते भी नहीं टिक सकता." इस घटना ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी, क्योंकि जियो-पॉलिटिक्स में ऐसी तीखी बहसें आमतौर पर बंद कमरे में ही होती हैं, कैमरे के सामने इस तरह का खुलासा कम ही देखने को मिलता है.

इस विवाद ने ट्रंप के आक्रामक रुख को और अधिक स्पष्ट कर दिया, जो उनके दूसरे कार्यकाल में और भी तीव्र हो गया है. जेलेंस्की से पहले, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के साथ भी ट्रंप की बैठकें अपेक्षाकृत तनावपूर्ण रही थीं. हालांकि, मैक्रों और स्टारमर ने अपनी समझदारी और धैर्य से ट्रंप से टकराने से बचते हुए अपनी स्थिति को संभाल लिया. इस बीच, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पिछले महीने अमेरिका दौरे पर ट्रंप के साथ अवैध प्रवासी मुद्दे पर चलने वाली कूटनीतिक लड़ाई ने भी ध्यान आकर्षित किया.

प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति और ट्रंप के साथ रिश्ते

भारतीय मूल के कूटनीतिक विशेषज्ञ सदानंद धुमे ने प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की सराहना करते हुए कहा कि विपक्ष चाहता था कि मोदी, ट्रंप से अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से टकराएं, लेकिन मोदी ने यह बेहद समझदारी से टालते हुए किसी भी संभावित विवाद से बचने का मार्ग चुना. सदानंद धुमे ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, "व्हाइट हाउस में जेलेंस्की की बेइज्जती को देखकर यह बात साफ होती है कि मोदी ने अपनी अमेरिका यात्रा को किस प्रकार बखूबी संभाला. अगर मोदी ने अवैध प्रवासियों के मुद्दे को मीडिया के सामने लाकर ट्रंप से टकरा दिया होता, तो हालात और भी जटिल हो सकते थे."

उन्होंने आगे लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप प्रशासन की अवैध विदेशियों को वापस भेजने की नीति में सहयोग करके भारत के हितों को प्राथमिकता दी. साथ ही, मोदी ने यह स्पष्ट किया कि भारत अवैध प्रवासियों को वापस लेने के लिए तैयार है, जिनमें अनुमानित 7,25,000 भारतीय नागरिक अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे हैं. इस दौरान मोदी ने स्पष्ट रूप से यह भी कहा कि "जो लोग अवैध रूप से दूसरे देशों में रहते हैं, उनका वहां रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है." इस प्रकार, मोदी ने किसी भी संभावित विवाद से बचते हुए एक मजबूत कूटनीतिक स्थिति अपनाई.

अमेरिकी मीडिया की मोदी की कूटनीति पर टिप्पणी

अमेरिकी मीडिया में भी प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की सराहना की गई. वॉशिंगटन पोस्ट ने उन्हें पहला विदेशी नेता बताया, जिन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के साथ निजी रिश्तों को बढ़ावा दिया. अखबार ने यह भी उल्लेख किया कि मोदी ने ट्रंप के "मेक अमेरिका ग्रेट अगेन" (MAGA) नारे से प्रेरित होकर "मेक इंडिया ग्रेट अगेन" (MIGA) का नारा दिया. इसके अतिरिक्त, न्यूयॉर्क टाइम्स ने मोदी की कूटनीति की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने ट्रंप के साथ अपने विवादित मुद्दों को हावी होने से बचाया और इसके बदले भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत किया. ट्रंप द्वारा भारत को एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट का ऑफर देना, यह दर्शाता है कि उन्होंने भारत के साथ अपने संबंधों में गहरी विश्वास और प्रतिबद्धता विकसित की है.

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