कौन हैं UAE के वो दो राजकुमार भाई, जिनपर लगा सूडान में लाखों लोगों को मारने का आरोप?

UAE President Brothers Sudan: सूडान में जारी भीषण संघर्ष के बीच अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है. कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टें दावा कर रही हैं कि संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नहयान (MBZ) के दो भाई, शेख तहनून और शेख मंसूर अफ्रीकी महाद्वीप में अपने तेजी से बढ़ते प्रभाव के कारण जांच और संदेह के घेरे में आ गए हैं.

world news UAE Sheikh Tahnoon and Sheikh Mansoor accused of killing millions of people in Sudan
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UAE President Brothers Sudan: सूडान में जारी भीषण संघर्ष के बीच अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है. कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टें दावा कर रही हैं कि संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नहयान (MBZ) के दो भाई, शेख तहनून और शेख मंसूर अफ्रीकी महाद्वीप में अपने तेजी से बढ़ते प्रभाव के कारण जांच और संदेह के घेरे में आ गए हैं. हालांकि, अबू धाबी इन आरोपों को सिरे से खारिज करता है और कहता है कि वह सूडान के किसी भी धड़े को राजनीतिक या सैन्य समर्थन नहीं दे रहा.

सूडान में संघर्ष अप्रैल 2023 से लगातार भड़कता जा रहा है और हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि 1.50 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है जबकि 1.2 करोड़ से ज्यादा नागरिक विस्थापित हो चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र ने इसे आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक बताया है.

अल नहयान परिवार का बढ़ता वैश्विक दबदबा

यूएई की सत्ता, सुरक्षा तंत्र और बहु-अरब डॉलर उद्योगों में अल नहयान परिवार अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है. राष्ट्रपति MBZ मध्य पूर्व की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाते हैं और दुनिया के सबसे असरदार नेताओं में गिने जाते हैं. उनके भाई शेख तहनून और शेख मंसूर भी रणनीतिक और आर्थिक मामलों में अहम स्थान रखते हैं.

शेख तहनून यूएई के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर होने के साथ-साथ International Holding Company (IHC) के चेयरमैन हैं. IHC अफ्रीका में खनन, कृषि, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है. दूसरी ओर शेख मंसूर वैश्विक खेल जगत में एक बड़ी पहचान रखते हैं—वे मैनचेस्टर सिटी फुटबॉल क्लब के मालिक हैं और अफ्रीका के कई नेताओं के साथ उनके संबंधों का अक्सर जिक्र होता है.

यह तिकड़ी यूएई को एक आधुनिक, निवेश-केंद्रित और रणनीतिक रूप से मजबूत राष्ट्र के रूप में स्थापित कर रही है. लेकिन सूडान युद्ध से जुड़े आरोपों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी छवि पर सवाल खड़े किए हैं.

सूडान संघर्ष में यूएई की भूमिका को लेकर बढ़ा विवाद

पश्चिमी एजेंसियों की कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यूएई ने सूडान के Rapid Support Forces (RSF) को कथित रूप से हथियार उपलब्ध कराए. RSF वही संगठन है जिस पर नरसंहार, मानवाधिकार हनन और नागरिक इलाकों पर क्रूर अत्याचारों के आरोप लगते रहे हैं. रिपोर्टें यह भी बताती हैं कि RSF नेता मोहम्मद हमदान दगालो (हेमेदती) और शेख मंसूर की पहले कई मुलाकातें हुईं, लेकिन इन दावों की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.

यूएई ने इन सभी आरोपों को गलत बताया है. अबू धाबी का कहना है कि वह सूडान में शांति बहाली के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करता है और संघर्ष में किसी भी गुट के साथ उसकी राजनीतिक या सैन्य भागीदारी नहीं है.

अफ्रीका में यूएई की बढ़ती आर्थिक मौजूदगी

पिछले एक दशक में यूएई ने अफ्रीकी देशों में अपनी आर्थिक उपस्थिति तेजी से बढ़ाई है. IHC, DP World और अन्य अमीराती कंपनियां महाद्वीप में बंदरगाहों, लोजिस्टिक्स नेटवर्क, कृषि परियोजनाओं, खनिज संसाधनों और डिजिटल तकनीक में बड़े निवेश कर रही हैं.

आलोचकों का तर्क है कि यह आर्थिक विस्तार प्रभाव बढ़ाने की रणनीति है, जिसके जरिये यूएई अफ्रीकी राजनीति और सुरक्षा पर असर डालना चाहता है. वहीं अमीरात का दावा है कि उसका उद्देश्य अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ना, स्थानीय रोजगार बढ़ाना और तकनीकी निवेश को प्रोत्साहित करना है.

अमेरिका और यूरोपीय देशों की ओर से भी इस मामले पर प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत शांत रही है. विश्लेषकों का मानना है कि ऊर्ज़ा सुरक्षा, खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी साझेदारियों के कारण पश्चिमी देश यूएई के साथ अपने संबंधों में सख्त रुख अपनाने से बच रहे हैं.

गृहयुद्ध की आड़ में जटिल भू-राजनीतिक समीकरण

सूडान में जारी रक्तपात ने एक बार फिर अफ्रीका में वैश्विक शक्तियों के प्रभाव की होड़ को उजागर कर दिया है. जहां RSF और सूडानी सेना के बीच संघर्ष लाखों जिंदगियों को तबाह कर रहा है, वहीं बाहरी ताकतों की संभावित भूमिका पर उठते सवाल इस युद्ध को और अधिक जटिल बनाते जा रहे हैं.

यूएई पर लगे आरोपों की पुष्टि भले ही न हुई हो, लेकिन अफ्रीका में अल नहयान परिवार के बढ़ते आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव ने इस बहस को तेज कर दिया है कि निवेश और भू-राजनीति के बीच की रेखा कब धुंधली होने लगती है. सूडान में शांति बहाली अभी दूर की संभावना दिखती है, लेकिन इस विवाद ने खाड़ी देशों की अफ्रीका नीति पर नया अंतरराष्ट्रीय ध्यान जरूर खींचा है.

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