China Russia Land: चीन और रूस के बीच मित्रता की हवा चल रही है, लेकिन सतह के पीछे चीन की चालें भी तेज हैं. अमेरिकी मीडिया आउटलेट न्यूजवीक की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन उन क्षेत्रों पर नजर गड़ा रहा है, जिन्हें रूस ने पहले अपने कब्जे में लिया था. इसे वह धीरे और सावधानीपूर्वक अंजाम दे रहा है, ताकि रूस के साथ रिश्ते प्रभावित न हों.
वर्तमान में रूस और चीन की कूटनीतिक दोस्ती मजबूत मानी जाती है. दोनों देश संयुक्त राष्ट्र में कई अहम मुद्दों पर एकजुट होकर वीटो पावर का इस्तेमाल कर चुके हैं. लेकिन ये दोस्ती चीन को अपनी भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षा रोकने से नहीं रोक पा रही.
कौन से इलाके हैं चीन की नजर में?
चीन की निगाह मुख्य रूप से रूस के साइबेरियाई क्षेत्रों, वालदिवोस्तोक, अमूर और टुमैन नदी के द्वीप पर है. इतिहास में ये इलाके 18वीं शताब्दी में चीन के किंग राजवंश द्वारा रूस को सौंपे गए थे. विशेष रूप से टुमैन नदी का द्वीप चीन के लिए रणनीतिक महत्व रखता है. रिपोर्ट के मुताबिक, चीन इस द्वीप पर नियंत्रण पाकर जापान को भी सबक सिखाना चाहता है.
क्योंकि यह द्वीप और आसपास की नदियां सीधे जापान के महासागर से जुड़ी हैं. चीन ने इस भूभाग पर अपनी नजर और अधिकार को और मजबूत करने के लिए अपने आधिकारिक मानचित्रों में बदलाव नहीं किया है. देश के पर्यटन मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं कि सभी मानचित्रों में इन इलाकों को चीन के दृष्टिकोण से ही दिखाया जाए.
इतिहास में चीन की हानि और रूस का विस्तार
1855 से 1915 के बीच चीन ने रूस को लगभग 10 लाख हेक्टेयर भूमि गंवाई. इनमें से कुछ जमीनें रूस ने जबरन हासिल की, जबकि कुछ तो उपहार में मिली थीं.
चीन ने कई बार इन भूभागों को वापस पाने की कोशिश की, लेकिन हर बार उसे नाकामी ही हाथ लगी.
चीन की नई रणनीति
अब चीन की रणनीति ज्यादा चालाक और साइलेंट है. वह सीधे टकराव की बजाय कूटनीतिक और सांस्कृतिक पैंतरे अपनाकर अपने पुराने भूभाग को वापस पाने की कोशिश कर रहा है. इसके लिए चीन में माथापच्ची और रणनीति बनाई जा रही है, ताकि रूस को शक न हो और अंतरराष्ट्रीय दबाव भी नियंत्रित रहे. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह भू-राजनीतिक खेल आने वाले समय में रूस-चीन-एशिया क्षेत्रीय समीकरण को प्रभावित कर सकता है.
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