ढाका में हालात तेजी से बिगड़े, गोलियां चलीं, सैकड़ों छात्र मारे गए और हजारों घायल हुए. उसके बाद सत्ता गिर गई और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना देश छोड़कर भारत पहुंच गईं. अब भारत में रह रहीं हसीना को बांग्लादेश की एक विशेष अदालत ने क्राइम्स अगेंस्ट ह्यूमैनिटी के आरोपों में फांसी की सज़ा सुना दी है.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत उन्हें बांग्लादेश को सौंपेगा? क्या यह सज़ा भारत में लागू होती है? और क्या अब हसीना की जान भारत की विदेश नीति पर निर्भर है?
2024 का छात्र आंदोलन: 48 घंटे में भड़का विद्रोह
साल 2024 में बांग्लादेश की आरक्षण नीति के खिलाफ शुरू हुआ विरोध कुछ ही घंटों में एक राष्ट्रीय आंदोलन बन गया. भीषण झड़पों, गोलीबारी, इंटरनेट बंदी और देशव्यापी अशांति ने सरकार की नींव हिला दी.
रिपोर्टों में-
जैसे गंभीर आंकड़े सामने आए.
आरोप है कि दमन बढ़ने पर सेना तटस्थ हो गई और संसद भंग कर दी गई. स्थितियाँ बेकाबू होते देख अगस्त 2024 में शेख हसीना भारत आ गईं. भारत ने उन्हें ऋणात्मक सुरक्षा कवच (Negative Security Shield) दिया, यानी सुरक्षा सरकारी, लेकिन लोकेशन गोपनीय.
ICT-1 का फैसला और मौत की सज़ा
17 नवंबर को बांग्लादेश के International Crimes Tribunal-1 (ICT-1) ने हसीना को तीन गंभीर आरोपों में दोषी ठहराया:
अदालत ने कहा कि “राज्य की शक्ति का इस्तेमाल नागरिकों के खिलाफ युद्ध-जैसे अभियान के लिए किया गया.” अभियोजन पक्ष ने एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी पेश की, जिसके आधार पर इसे क्राइम्स अगेंस्ट ह्यूमैनिटी माना गया और उन्हें फांसी की सज़ा सुनाई गई.
यह राजनीतिक अभियान है, न्याय नहीं- हसीना
भारत में रह रहीं शेख हसीना ने इस फैसले को पूरी तरह राजनीतिक बताया. उनका कहना है:
उन्होंने कहा कि यह फैसला लोकतांत्रिक विपक्ष को खत्म करने का एक हिस्सा है, इसलिए वे इस मुकदमे को वैध नहीं मानतीं.
क्या बांग्लादेश की सज़ा भारत में लागू होती है?
भारत का कानून साफ कहता है:
क्या UN भारत को मजबूर कर सकता है?
ICT-1 एक घरेलू ट्रिब्यूनल है.
UN केवल दो अदालतों के फैसलों को लागू करा सकता है:
चूंकि ICT-1 इनमें शामिल नहीं है, इसलिए—
क्या भारत कानूनी रूप से हसीना को सौंप सकता है?
भारत—बांग्लादेश में प्रत्यर्पण संधि है, लेकिन भारत के कानून में तीन सुरक्षा फ़िल्टर होते हैं:
1. राजनीतिक प्रतिशोध का खतरा हो तो प्रत्यर्पण रोका जा सकता है.
2. निष्पक्ष ट्रायल न मिलने पर प्रत्यर्पण पूरी तरह ब्लॉक.
3. मौत की सज़ा एक बड़ा अवरोध.
भारत का कानून कहता है:
भारत मना करता है तो बांग्लादेश क्या कर सकता है?
बांग्लादेश कर सकता है:
लेकिन भारत के पास तीन मजबूत ढाल हैं:
इसलिए बांग्लादेश भारत को कानूनी रूप से मजबूर नहीं कर सकता.
अगर भारत हसीना को बांग्लादेश सौंपता है तो-
अगर भारत प्रत्यर्पण से मना करता है तो-
भारत का संभावित रास्ता: तीन विकल्प
1. Silent Asylum Model
2. Human Rights Shield Model
3. Conditional Extradition
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