Dhaniya Panjiri: भाद्रपद का महीना आते ही भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का माहौल बन जाता है. जन्माष्टमी के दिन भक्त व्रत रखते हैं और रात में लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाते हैं. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को धनिया पंजीरी का भोग लगाने की खास परंपरा है. बहुत से लोगों के मन में सवाल होता है कि आखिर जन्माष्टमी पर गेहूं या सूजी की जगह धनिया पंजीरी ही क्यों बनाई जाती है. इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ सेहत से जुड़ी वजहें भी बताई गई हैं. मान्यता है कि श्रद्धा और सही तरीके से तैयार किया गया यह प्रसाद भगवान को प्रिय होता है और इसे घर में बांटने से सुख-समृद्धि आती है.
सेहत और आयुर्वेद में धनिया पंजीरी का महत्व
भाद्रपद के समय बारिश का मौसम रहता है. आयुर्वेद के अनुसार इस दौरान शरीर में वात और पित्त का संतुलन बिगड़ सकता है. सूखा धनिया शरीर के लिए ठंडा माना जाता है और पित्त-वात को संतुलित करने के साथ पाचन में भी मदद करता है.
जन्माष्टमी पर कई लोग दिनभर निर्जल या फलाहार व्रत रखते हैं. ऐसे में व्रत खोलने के बाद धनिया पंजीरी खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और पाचन तंत्र पर भी ज्यादा दबाव नहीं पड़ता. यही वजह बताई जाती है कि इस मौसम में धनिया पंजीरी को प्रसाद के रूप में खास महत्व दिया गया है. यह सात्विक प्रसाद व्रत के बाद शरीर को राहत देने वाला माना जाता है.
व्रत में अनाज नहीं, इसलिए बनती है धनिया पंजीरी
जन्माष्टमी के व्रत में अनाज का सेवन नहीं किया जाता. इसी कारण प्रसाद में गेहूं का आटा या सूजी इस्तेमाल करने के बजाय धनिया पाउडर लिया जाता है. धनिया पंजीरी बनाने के लिए सूखे धनिए को पीसकर उसमें देशी घी, मखाना, चिरौंजी, कद्दू के बीज और मिश्री मिलाई जाती है. सभी चीजों को अच्छी तरह भूनकर प्रसाद तैयार किया जाता है.
इस तरह तैयार पंजीरी व्रत के नियमों के अनुकूल होती है और इसे भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाया जाता है. पूजा के बाद इसे परिवार के लोगों और दूसरे भक्तों में प्रसाद के रूप में बांटने की परंपरा है.
धनिया को समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है
धार्मिक और ज्योतिष से जुड़ी मान्यताओं में सूखे धनिए को समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. भगवान श्रीकृष्ण को धनिया पंजीरी का भोग लगाने को भी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार में खुशहाली आती है.
ऐसा भी माना जाता है कि जन्माष्टमी पर भगवान को धनिया पंजीरी अर्पित करने और फिर प्रसाद के रूप में बांटने से घर में धन-धान्य की कमी नहीं रहती. परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है और नकारात्मकता दूर होती है. इसी वजह से जन्माष्टमी की पूजा में धनिया पंजीरी को सिर्फ प्रसाद ही नहीं, बल्कि शुभता और समृद्धि से जुड़ी परंपरा के तौर पर भी देखा जाता है.