बहरीन को 4 हजार करोड़ के हथियार बेचेगा अमेरिका, जानें पर्दे के पीछे क्या पक रही खिचड़ी

अमेरिका ने हाल ही में खाड़ी देश बहरीन को F-16 लड़ाकू विमानों के रखरखाव और आवश्यक उपकरणों की आपूर्ति के लिए हरी झंडी दिखाई है. इस सौदे की कुल अनुमानित कीमत 455 मिलियन डॉलर यानी लगभग 4,000 करोड़ रुपए बताई जा रही है.

Why is America selling weapons worth Rs 4000 crore to Bahrain
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अमेरिका ने हाल ही में खाड़ी देश बहरीन को F-16 लड़ाकू विमानों के रखरखाव और आवश्यक उपकरणों की आपूर्ति के लिए हरी झंडी दिखाई है. इस सौदे की कुल अनुमानित कीमत 455 मिलियन डॉलर यानी लगभग 4,000 करोड़ रुपए बताई जा रही है. इसमें विमान के स्पेयर पार्ट्स, हथियार प्रणाली, ग्राउंड हैंडलिंग उपकरण, तकनीकी और लॉजिस्टिक सपोर्ट, मेंटेनेंस सहायता और अन्य जरूरी उपकरण शामिल हैं. मुख्य अमेरिकी कंपनियां, जैसे जनरल इलेक्ट्रिक एयरोस्पेस (GE) और लॉकहीड मार्टिन एयरोनॉटिक्स, इस काम के लिए जिम्मेदार होंगी. यह सौदा अमेरिका और बहरीन के बीच लंबे समय से चल रही रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है.

क्यों बहरीन को हथियार बेच रहा अमेरिका?

बहरीन, मध्य पूर्व में अमेरिका का अहम रणनीतिक सहयोगी है. यहाँ अमेरिकी नौसेना का मुख्य बेस, U.S. Fifth Fleet स्थित है, जो खाड़ी और आसपास के क्षेत्र में अमेरिका की समुद्री और सैन्य पहुंच को मजबूत करता है. F-16 विमानों से बहरीन की वायु-सेना क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने और अमेरिका तथा उसके सहयोगी देशों के साथ मिलकर सुरक्षा अभियानों में सक्रिय भागीदारी करने में सक्षम होगी. यह सौदा दोनों देशों के बीच गहरी रक्षा साझेदारी को दर्शाता है.

अमेरिका का समर्थन बहरीन के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

मध्य पूर्व फिलहाल कई तरह के तनावपूर्ण हालात से गुजर रहा है. रेड सी और गल्फ ऑफ एडन में हो रहे हमलों, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और ईरान-समर्थित गुटों की गतिविधियां खाड़ी देशों के लिए बड़ी चुनौती हैं. इस संदर्भ में अमेरिकी तकनीकी और सैन्य समर्थन बहरीन की हवाई और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगा. इससे खाड़ी क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने और संभावित खतरों से निपटने में मदद मिलेगी.

क्या इससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन प्रभावित होगा?

पेंटागन के अनुसार, इस सौदे से खाड़ी क्षेत्र में सैन्य संतुलन में कोई नई अस्थिरता नहीं आएगी. बहरीन पहले से ही अमेरिकी हथियार और तकनीक का इस्तेमाल करता रहा है. इस कदम से केवल क्षेत्रीय रक्षा संरचना मजबूत होगी, न कि किसी अस्थिरता को बढ़ावा मिलेगा.

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