लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ खलील औन ने ईरान को साफ संदेश दिया है कि उनके देश में किसी भी ग्रुप को हथियार रखने की अनुमति नहीं है और न ही किसी विदेशी ताकत के सहारे टिकने का हक है. यह बयान उन्होंने ईरान की शीर्ष सुरक्षा संस्था के सचिव अली लारीजानी से मुलाकात के दौरान दिया.
यह सख्त रुख तब सामने आया जब लेबनानी कैबिनेट ने हाल ही में एक अमेरिका समर्थित रोडमैप को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य ईरान-समर्थित हिजबुल्लाह को 2006 के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के तहत निशस्त्र करना है.
जोसेफ खलील औन: कमांडो से राष्ट्रपति तक
जोसेफ खलील औन का जन्म 10 जनवरी 1964 को हुआ. वे लेबनान के 14वें राष्ट्रपति होने के साथ-साथ एक सख्त और अनुशासित आर्मी जनरल भी हैं. 9 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति पद संभालने से पहले वे लेबनानी आर्मी के कमांडर थे. औन ने 1983 में लेबनानी गृहयुद्ध के दौरान सेना में भर्ती होकर अपने सैन्य करियर की शुरूआत की. इसके बाद उन्होंने अमेरिका, सीरिया और लेबनान में ट्रेनिंग हासिल की.
काउंटर टेररिज्म और कमांडो अनुभव
औन ने 2008 में अमेरिका में काउंटर टेररिज्म ट्रेनिंग की और 2013 में लेबनान में भी इसी तरह की ट्रेनिंग ली. 1990 में, एलीमिनेशन वॉर के दौरान वे कमांडो रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट थे. उस समय उनके यूनिट लीडर की मौत हो गई, और औन ने संकट के समय पूरी यूनिट की कमान संभाली. यही उनका असली नेतृत्व कौशल साबित हुआ.
राजनीति में कदम
राजनीति में औन का नाम 2022 में जोर-शोर से सामने आया, जब लेबनानी फोर्सेस पार्टी के नेता सामिर गीगा ने उन्हें राष्ट्रपति पद के लिए उपयुक्त बताया. कतर, अमेरिका, फ्रांस, सऊदी अरब और मिस्र जैसे देशों ने भी उनके लिए समर्थन जताया.आज राष्ट्रपति के रूप में औन अपने संदेश में स्पष्ट हैं: लेबनान की संप्रभुता सर्वोपरि है, किसी भी हथियार की अनुमति केवल सेना के पास होगी, और विदेशी दखल किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं.
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