Pakistan Afghanistan War: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक बार फिर सीमा पर तनाव तेजी से बढ़ गया है और हालात टकराव की स्थिति तक पहुंच गए हैं. अफगानिस्तान की ओर से दावा किया गया है कि उसने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान की 19 से ज्यादा सैन्य चौकियों पर कब्जा कर लिया है. यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा कुछ दिन पहले किए गए हवाई हमलों के जवाब में की गई बताई जा रही है. इससे पहले पाकिस्तान ने रविवार को अफगानिस्तान में एयर स्ट्राइक करते हुए कहा था कि उसने आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया है. इसके बाद से दोनों देशों के बीच हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं.
पहले भी हो चुकी है भारी गोलीबारी
दोनों देशों के बीच तनाव कोई नया नहीं है. पिछले साल अक्टूबर में भी सीमा पर भारी गोलीबारी हुई थी. उस दौरान अफगान तालिबान ने दावा किया था कि उसने 58 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया, जबकि पाकिस्तान ने कहा था कि उसने 200 से ज्यादा तालिबानी लड़ाकों को ढेर कर दिया. पाकिस्तान के मुताबिक उस संघर्ष में उसके 23 जवान मारे गए थे और 29 घायल हुए थे. इसके बाद भी दोनों पक्षों के बीच छिटपुट हमले जारी रहे.
TTP बना सबसे बड़ा कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, इस पूरे संघर्ष की सबसे बड़ी वजह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) है. इसे पाकिस्तानी तालिबान भी कहा जाता है. यह संगठन पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के पास सक्रिय है और अलग पश्तून राष्ट्र की मांग करता है. पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार TTP को पनाह देती है और यही संगठन पाकिस्तान में हमले करता है. हालांकि अफगानिस्तान इन आरोपों से इनकार करता रहा है.
डूरंड लाइन पर पुराना विवाद
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच विवाद की जड़ें करीब 130 साल पुरानी हैं. 1893 में ब्रिटिश शासन के दौरान खींची गई 2640 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा, जिसे डूरंड लाइन कहा जाता है, आज भी विवाद का मुख्य कारण बनी हुई है. इस सीमा ने पश्तून समुदाय को दो हिस्सों में बांट दिया. बड़ी संख्या में पश्तून पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों देशों में रहते हैं, लेकिन अफगानिस्तान ने इस सीमा को कभी आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया.
पश्तून पहचान और अलग राष्ट्र की मांग
पश्तून समुदाय की पहचान और अलग राष्ट्र की मांग भी इस संघर्ष को लगातार हवा देती रही है. पाकिस्तान में बड़ी संख्या में पश्तून खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे इलाकों में रहते हैं, जबकि अफगानिस्तान में भी उनकी बड़ी आबादी है. यही वजह है कि सीमा विवाद के साथ-साथ यह सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा भी बना हुआ है.
TTP की शुरुआत और मकसद
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) की स्थापना 2007 में बैतुल्लाह मेहसूद ने की थी. उसने कई उग्रवादी गुटों को मिलाकर इस संगठन को खड़ा किया. इसका मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान की सरकार के खिलाफ लड़ाई करना और वहां इस्लामी शासन स्थापित करना बताया जाता है. वर्तमान में इसकी कमान नूर वली मेहसूद के पास है.
पिछले कुछ समय में TTP की गतिविधियों में तेजी आई है. बीते छह महीनों में इस संगठन ने पाकिस्तान में हजार से ज्यादा हमले किए हैं. सिर्फ जुलाई में ही 300 से अधिक हमले दर्ज किए गए. साल 2024 में TTP ने 856 हमलों को अंजाम दिया, जो 2023 के मुकाबले काफी ज्यादा हैं. इन हमलों में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है, जिससे पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
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