यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, 1300 से ज्यादा मौतें... भारत के मानसून और मौसम पर क्या होगा असर?

यूरोप इस समय भीषण हीटवेव की चपेट में है. कई देशों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है और विश्व मौसम संगठन (WMO) के अनुसार 21 जून के बाद गर्मी से जुड़ी 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं.

What impact will Europe severe heat and heatwaves have on India
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Europe Heatwave: यूरोप इस समय भीषण हीटवेव की चपेट में है. कई देशों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है और विश्व मौसम संगठन (WMO) के अनुसार 21 जून के बाद गर्मी से जुड़ी 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल यूरोप तक सीमित घटना नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक मौसम, अर्थव्यवस्था और आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ सकता है. ऐसे में भारत भी इसके प्रभाव से पूरी तरह अछूता नहीं रहेगा.

यूरोप में क्यों बनी गंभीर स्थिति?

मई और जून 2026 के दौरान पश्चिमी यूरोप में कई स्थानों पर तापमान सामान्य से लगभग 10 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया. सैटेलाइट आंकड़ों में कुछ इलाकों की सतह का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तक पहुंचता दिखाई दिया. इस असामान्य गर्मी ने मौसम प्रणाली को प्रभावित किया है और कई देशों में जनजीवन पर बड़ा असर पड़ा है.

भारत के मानसून पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों के अनुसार यूरोप की हीटवेव ने जेट स्ट्रीम और उच्च दबाव (हाई प्रेशर) प्रणाली को प्रभावित किया है. इन बदलावों का असर मानसून की गति और दिशा पर पड़ सकता है.

यदि ऐसा होता है तो भारत में कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है, जबकि अन्य हिस्सों में बारिश कम होने से सूखे जैसी स्थिति बन सकती है. पहले से जारी अल-नीनो की चेतावनी के बीच यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है.

ऊर्जा और महंगाई पर असर

यूरोप में बढ़ती गर्मी के कारण बिजली और गैस की मांग में इजाफा हुआ है. जून के अंत में यूरोपीय गैस की कीमतें करीब 42.9 यूरो प्रति मेगावाट घंटा दर्ज की गईं. ऊर्जा बाजार में बढ़ती अस्थिरता का असर उन देशों पर भी पड़ सकता है जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं, जिनमें भारत भी शामिल है.

ऊर्जा की बढ़ती कीमतें महंगाई और उद्योगों की लागत बढ़ाने का कारण बन सकती हैं.

सप्लाई चेन पर भी बढ़ सकता है दबाव

गर्मी के कारण यूरोप में उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है. यदि उत्पादन धीमा पड़ता है तो वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है. इससे कच्चे माल और तैयार उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत और बेहतर स्टॉक प्रबंधन महत्वपूर्ण होंगे.

हवाई यात्रा और पर्यटन भी प्रभावित

भीषण गर्मी का असर विमान सेवाओं पर भी देखने को मिला है. रिपोर्टों के मुताबिक पूरे यूरोप में एक दिन के दौरान 3,000 से अधिक उड़ानें या तो देरी से संचालित हुईं या रद्द करनी पड़ीं. केवल लंदन के प्रमुख हवाई अड्डों पर ही लगभग 900 उड़ानें प्रभावित रहीं.

यदि मौसम की यह स्थिति बनी रहती है तो भारत से यूरोप जाने वाले यात्रियों को भी उड़ानों में देरी, महंगे टिकट और यात्रा संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

समुद्री पारिस्थितिकी और मत्स्य क्षेत्र पर असर

कॉपरनिकस क्लाइमेट बुलेटिन के अनुसार समुद्री तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. समुद्र के गर्म होने से समुद्री जैव विविधता और मत्स्य पालन प्रभावित हो सकता है.

यदि यूरोप के समुद्री क्षेत्रों में इसका असर बढ़ता है तो वैश्विक मछली व्यापार और समुद्री उत्पादों की आपूर्ति पर भी प्रभाव पड़ सकता है, जिसका असर भारत जैसे देशों पर भी देखने को मिल सकता है.

स्वास्थ्य और कृषि पर बढ़ सकती है चुनौती

यूरोप में बढ़ती मौतों ने यह संकेत दिया है कि अत्यधिक गर्मी स्वास्थ्य व्यवस्था पर कितना दबाव डाल सकती है. गर्मी बढ़ने से अस्पतालों में मरीजों की संख्या, स्वास्थ्य खर्च और श्रमिकों की उत्पादकता पर असर पड़ता है.

वहीं भारत में यदि मानसून कमजोर या असंतुलित रहता है तो धान, मक्का और दलहन जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है. इससे खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका भी रहेगी.

जोखिम कम करने के लिए क्या जरूरी?

विशेषज्ञों का मानना है कि संभावित प्रभावों को कम करने के लिए कई कदम जरूरी होंगे.

  • मौसम और जलवायु संबंधी आंकड़ों की लगातार निगरानी.
  • ऊर्जा भंडारण और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को मजबूत करना.
  • जल संरक्षण और कृषि प्रबंधन पर विशेष ध्यान.
  • विमानन और पर्यटन क्षेत्र के लिए लचीली संचालन नीति.
  • हीट हेल्थ अलर्ट और आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना.

क्या यूरोप की गर्मी भारत में तापमान बढ़ाएगी?

विशेषज्ञों के अनुसार यूरोप की हीटवेव का मतलब यह नहीं है कि भारत में सीधे तापमान बढ़ जाएगा. हालांकि जेट स्ट्रीम, समुद्री तापमान, वैश्विक ऊर्जा बाजार और सप्लाई चेन के जरिए इसके अप्रत्यक्ष प्रभाव भारत तक पहुंच सकते हैं. ऐसे में मौसम, कृषि, ऊर्जा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में पहले से तैयारी करना आने वाले समय में जोखिम को कम करने में मददगार हो सकता है.

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