अभिषेक बनर्जी के घर पर अचानक क्यों पहुंची पुलिस? बाहर ले गई स्क्रीन ने बढ़ाई हलचल, जानें पूरा मामला

Police at Abhishek Banerjee House: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास पर भारी पुलिस बल पहुंच गया.

West bengal police suddenly reach Abhishek Banerjee house screen taken outside increased the stir
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Police at Abhishek Banerjee House: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास पर भारी पुलिस बल पहुंच गया. पुलिस की मौजूदगी के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई. बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई कोलकाता नगर निगम की ओर से भेजे गए नोटिस के बाद की गई है.

अभिषेक बनर्जी का आवास कोलकाता के 188ए हरीश मुखर्जी रोड पर स्थित है. सोमवार सुबह पुलिस की टीम ने इलाके को घेर लिया. इस दौरान एक पुलिसकर्मी घर के भीतर से एक स्क्रीन जैसी सामग्री बाहर ले जाता दिखाई दिया. हालांकि, पुलिस या प्रशासन की ओर से अब तक इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.

अवैध निर्माण को लेकर भेजा गया था नोटिस

सूत्रों के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी के घर के कुछ हिस्सों को कथित तौर पर अवैध निर्माण की श्रेणी में माना गया है. इसी मामले में पहले कोलकाता नगर निगम की ओर से नोटिस भेजा गया था. बताया जा रहा है कि नोटिस की समयसीमा सोमवार को समाप्त हो गई, जिसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हुई.

हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कार्रवाई केवल निरीक्षण तक सीमित है या आगे किसी बड़े कदम की तैयारी की जा रही है. पुलिस की मौजूदगी और सुरक्षा व्यवस्था ने मामले को और अधिक चर्चित बना दिया है.

हाईकोर्ट से अभिषेक बनर्जी को अंतरिम राहत

इसी बीच कलकत्ता हाईकोर्ट से अभिषेक बनर्जी को एक बड़ी कानूनी राहत भी मिली है. अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में 31 जुलाई तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है. यह मामला विधानसभा चुनाव के दौरान जनसभाओं में दिए गए कथित भड़काऊ बयानों से जुड़ा हुआ है.

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी बड़े राजनीतिक दल के वरिष्ठ नेता और सांसद को सार्वजनिक मंच से बयान देते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. अदालत ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा का इतिहास रहा है, इसलिए नेताओं के बयान समाज पर व्यापक असर डाल सकते हैं.

जांच में सहयोग करने का निर्देश

हालांकि अदालत ने अभिषेक बनर्जी को पूरी तरह राहत नहीं दी है. हाईकोर्ट ने उन्हें जांच एजेंसी के साथ सहयोग करने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा है कि जांच अधिकारी के नोटिस पर उन्हें उपस्थित होना होगा और बिना अनुमति विदेश यात्रा नहीं करनी होगी. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि अभिषेक बनर्जी जांच में सहयोग नहीं करते हैं, तो जांच एजेंसी दोबारा अदालत का रुख कर सकती है.

जनसभाओं में दिए गए बयानों पर दर्ज हुई थी FIR

अभिषेक बनर्जी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की थी. शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्होंने आरामबाग और नंदीग्राम की चुनावी सभाओं में ऐसे बयान दिए थे, जो सार्वजनिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था को प्रभावित कर सकते थे.

फिलहाल अदालत ने उन्हें अंतरिम संरक्षण देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 20 जुलाई तय की है. तब तक उनके खिलाफ किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी.

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