पश्चिम बंगाल में सरकारी योजनाओं को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा है कि अन्नपूर्णा योजना जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा, जो सरकार की तय शर्तों को पूरा करेंगे.
मुख्यमंत्री के मुताबिक, अगर किसी परिवार ने बच्चों का अनिवार्य टीकाकरण नहीं कराया है, उन्हें सरकारी स्कूल की जगह कुछ धार्मिक शिक्षण संस्थानों में भेजा है या सरकार के दूसरे नियमों का पालन नहीं किया है, तो ऐसे परिवारों को योजना के लाभ से बाहर किया जा सकता है.
समीक्षा बैठक के बाद दिए संकेत
मुख्यमंत्री ने उत्तर बंगाल में अधिकारियों और मंत्रियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद यह बात कही. उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाएं जरूरतमंद और पात्र नागरिकों के लिए हैं. किसी गैर-नागरिक को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा.
उन्होंने यह भी बताया कि अन्नपूर्णा योजना के आवेदन फॉर्म में बच्चों के टीकाकरण, वे किस स्कूल में पढ़ते हैं और परिवार को पहले से कौन-कौन सी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, जैसी जानकारी मांगी जाएगी.
ये हो सकती हैं नई शर्तें
सरकार के अनुसार, कुछ मामलों में योजना का लाभ नहीं दिया जा सकता. इनमें शामिल हैं:
हालांकि, इन नियमों को लागू करने को लेकर सरकार की ओर से अभी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होना बाकी है.
11 पन्नों के आवेदन फॉर्म में मांगी जाएगी पूरी जानकारी
अन्नपूर्णा योजना के आवेदन फॉर्म में बच्चों के टीकाकरण की स्थिति, उनकी पढ़ाई, परिवार की जानकारी और पहले से मिल रही सरकारी योजनाओं का ब्योरा देना होगा. सरकार का कहना है कि इससे सही लाभार्थियों की पहचान करने में आसानी होगी.
टीकाकरण को क्यों माना जा रहा है जरूरी?
सरकार का कहना है कि बच्चों का टीकाकरण उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है. इसी वजह से इसे सरकारी योजनाओं की पात्रता से जोड़ने का फैसला किया गया है.
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चल रहे यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) में बच्चों को पोलियो, टीबी, डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, हेपेटाइटिस-बी, निमोनिया, खसरा, रूबेला, रोटावायरस और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसी कई गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए मुफ्त टीके लगाए जाते हैं.
सही लोगों तक पहुंचे सरकारी योजनाओं का लाभ
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार चाहती है कि सरकारी योजनाओं का फायदा सिर्फ जरूरतमंद और पात्र लोगों तक पहुंचे. साथ ही लोगों को सरकारी स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े नियमों का पालन भी करना चाहिए.
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