वॉशिंगटन/तेहरान: ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आने के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने कई सालों तक अहमदीनेजाद से संपर्क बनाए रखा और उन्हें अपने पक्ष में करने की कोशिश की. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने इन आरोपों के बाद अहमदीनेजाद को नजरबंद कर दिया है. लेकिन इस दावे की भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.
क्यों चर्चा में आए अहमदीनेजाद?
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लोगों की कोशिश थी कि महमूद अहमदीनेजाद एक बार फिर ईरान की राजनीति में वापसी करें और राष्ट्रपति बनें. उन्होंने पिछले राष्ट्रपति चुनाव में अपनी उम्मीदवारी भी पेश की थी, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिली.
If Ahmedinejad was a Mossad asset, then everyone could be one?
— Ragıp Soylu (@ragipsoylu) July 13, 2026
This is like straight out of a movie. Mind blowing. https://t.co/RU9glcEGyG
यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर बढ़ गया है. इसी वजह से इस खबर को लेकर दुनिया भर में चर्चा हो रही है.
अमेरिका में क्यों हुआ बड़ा खुलासा?
रिपोर्ट सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर यह जानकारी अब क्यों सामने आई. सोशल मीडिया पर भी इस खबर को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कुछ लोगों ने कहा कि अगर रिपोर्ट सही है तो यह ईरान के लिए बड़ा झटका हो सकता है.
हालांकि इन दावों पर अभी तक न तो ईरान और न ही इजरायल की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है.
हंगरी में हुई थी गुप्त मुलाकात?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि साल 2024 की शुरुआत में हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में जलवायु परिवर्तन पर एक सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई गई थी. बताया गया कि इस कार्यक्रम में महमूद अहमदीनेजाद को बुलाने का मकसद सिर्फ सम्मेलन नहीं था.
रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्यक्रम को एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल किया जाना था ताकि अहमदीनेजाद की मुलाकात इजरायल के कुछ खुफिया अधिकारियों से कराई जा सके. दावा है कि इस योजना के पीछे हंगरी के कुछ अधिकारियों की भी भूमिका थी.
क्या मोसाद उन्हें फिर राष्ट्रपति बनाना चाहता था?
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि साल 2022 से एक ऐसी योजना पर काम चल रहा था, जिसके जरिए अहमदीनेजाद को फिर से ईरान की राजनीति में मजबूत बनाया जा सके.
दावा किया गया है कि अहमदीनेजाद ने विदेशी समर्थन को अपनी राजनीतिक वापसी का रास्ता माना. इसी वजह से उनके और इजरायल के बीच संपर्क बढ़े. हालांकि इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
यात्रा का खर्च भी उठाने का दावा
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि यूरोप की यात्राओं के दौरान अहमदीनेजाद के रहने और आने-जाने का खर्च इजरायल की ओर से उठाया गया था.
यह भी कहा गया है कि उस समय मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया ने 2024 में बुडापेस्ट में अहमदीनेजाद से मुलाकात की थी. रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरी योजना की जानकारी बाद में अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA को भी दी गई थी.
हमले के बाद बदली स्थिति
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जब 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तब अहमदीनेजाद ने इस पूरी योजना से दूरी बना ली. बताया गया कि उन्हें लगा कि हालात बदल चुके हैं और आगे बढ़ना उनके लिए सही नहीं होगा.
हालांकि इस पूरी रिपोर्ट में किए गए कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. ईरान, इजरायल और अमेरिका की ओर से भी इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.