रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा की तारीख करीब आ गई है. 4 दिसंबर 2025 को पुतिन भारत आएंगे और उनकी सुरक्षा को लेकर दिल्ली में जोरदार इंतजाम किए जा रहे हैं. सुरक्षा के इस विशेष प्रयास का उद्देश्य पुतिन की यात्रा को सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाना है. हालांकि पुतिन के भारत आने से पहले ही, उनकी सुरक्षा एजेंसी की टीम राजधानी दिल्ली पहुंच चुकी है और होटल से लेकर उनके कार्यक्रम तक की बारीकी से जांच कर रही है. पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त होती है कि उसे अमेरिका के राष्ट्रपति की सुरक्षा से भी ज्यादा कड़ा माना जाता है.
पुतिन के दौरे से पहले सुरक्षा तंत्र की तैयारियां
पुतिन की यात्रा के लिए सुरक्षा इंतजामों में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है. यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पुतिन के दौरे के दौरान किसी भी तरह की सुरक्षा चूक न हो. हालांकि, आमतौर पर राष्ट्राध्यक्षों के दौरे पर खास सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है, लेकिन रूस के राष्ट्रपति पुतिन की सुरक्षा में कुछ खास और अलग तरीके अपनाए जाते हैं. बता दें कि रूसी राष्ट्रपति का सिक्योरिटी प्रोटोकॉल दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के राष्ट्रपति से भी ज्यादा टाइट होता है.
पुतिन की सुरक्षा का विशेष कवच
पुतिन की सुरक्षा में सबसे अहम भूमिका उनकी विशेष कार, ऑरस सीनेट निभाती है. इस कार को रूस की सेंट्रल साइंटिफिक रिसर्च ऑटोमोबाइल एंड ऑटोमोटिव इंजन इंस्टीट्यूट (NAMI) ने डिजाइन किया है. कार के 6 सेंटीमीटर मोटे कांच न केवल बुलेट, बल्कि ग्रेनेड और केमिकल अटैक भी झेलने के सक्षम हैं. इस कार की अधिकतम रफ्तार 249 किमी/घंटा है, और इसके चारों टायर पंचर होने पर भी यह चल सकती है. यह कार पुतिन की सुरक्षा को एक मजबूत कवच प्रदान करती है.
पुतिन का "फ्लाइंग क्रेमलिन"
पुतिन किसी भी देश की यात्रा के लिए इल्यूशिन IL-96-300 PU विमान का इस्तेमाल करते हैं, जिसे "फ्लाइंग क्रेमलिन" कहा जाता है. इस विमान के साथ हमेशा दो बैकअप विमान भी होते हैं, जो किसी भी आपात स्थिति में पुतिन को सुरक्षित घर वापस लाने के लिए तैयार रहते हैं. इसके अलावा, पुतिन के विमान को हमेशा एयरफोर्स के जेट एस्कॉर्ट करते हैं, और इसके अंदर न्यूक्लियर कमांड बटन भी होता है, जिससे पुतिन सीधे सैन्य कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं.
पुतिन की निजी सुरक्षा
रूसी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था की एक और दिलचस्प बात यह है कि वे अपने निजी पोर्टेबल टॉयलेट और बाथरूम को भी साथ लेकर चलते हैं. इसका उद्देश्य है कि पुतिन के शरीर से कोई जैविक नमूना न छोड़ा जाए, जिसे किसी विदेशी एजेंसी द्वारा उनके स्वास्थ्य की जांच के लिए इस्तेमाल किया जा सके. इसके अलावा, पुतिन कभी भी अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करते हैं, और उनकी टीम होटल में एक टेलीफोन बूथ इंस्टॉल करती है, ताकि पुतिन किसी भी बाहरी संपर्क से बच सकें.
पुतिन की सुरक्षा में 4-लेयर कवच
पुतिन की सुरक्षा में हमेशा 4 लेयर सिक्योरिटी होती है. उनके साथ पर्सनल बॉडीगार्ड्स का एक खास दल होता है, जो उन्हें चारों ओर से घेरकर रखते हैं. इन बॉडीगार्ड्स के हाथों में ब्रीफकेस होते हैं, जो किसी भी खतरे की स्थिति में एक शील्ड की तरह काम करते हैं. हर बॉडीगार्ड के पास 9 मिमी की गुरजा पिस्तौल होती है, जो मिनटों में 40 गोलियां दाग सकती है और 50 मीटर की दूरी से बुलेटप्रूफ जैकेट को भेदने की क्षमता रखती है.
अदृश्य सेना और स्नाइपर
पुतिन की सुरक्षा के लिए एक अदृश्य सेना हर जगह तैनात रहती है. सुरक्षा के लिए विशेष एजेंट्स को आम नागरिकों के बीच भेजा जाता है, जो आसानी से पहचान में नहीं आते हैं. इसके अलावा, ऊंची इमारतों पर स्नाइपर तैनात रहते हैं, जो किसी भी खतरे का तुरंत जवाब देते हैं. यह सुरक्षा व्यवस्था इस बात को सुनिश्चित करती है कि पुतिन के आस-पास किसी भी प्रकार का खतरा न उत्पन्न हो.
पोर्टेबल लैब और निजी शेफ
पुतिन के काफिले में हमेशा एक मोबाइल लैब होती है, जो उनके भोजन और पेय पदार्थों की जांच करती है, ताकि किसी प्रकार का रासायनिक या जैविक खतरा न हो. इसके अलावा, पुतिन के पास अपना निजी रसोइया भी होता है, जो केवल उन्हीं खाद्य पदार्थों को तैयार करता है, जिन्हें विशेष रूप से उनके स्वास्थ्य के अनुसार तैयार किया गया हो. इसके लिए आवश्यक सामग्री जैसे अनाज, मसाले और फल रूस से ही लाए जाते हैं.
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