नई दिल्ली: 9 सितंबर 2025 को होने वाला उपराष्ट्रपति चुनाव देश की सियासत में एक बड़ा मुकाम बन चुका है. यह मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन और इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच है. जहां एनडीए संख्याबल के आधार पर मजबूत स्थिति में दिख रहा है, वहीं विपक्ष अपनी वैचारिक लड़ाई और संभावित क्रॉस वोटिंग के भरोसे मैदान में डटा है. जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद यह मध्यावधि चुनाव सुर्खियों में है. क्या यह चुनाव इतिहास रचेगा, या एनडीए की जीत महज औपचारिकता होगी? आइए, इस रोमांचक मुकाबले के विभिन्न पहलुओं को समझते हैं.
संख्याबल: एनडीए की मजबूत स्थिति
उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 781 सांसद मतदान करेंगे, जिसमें बहुमत के लिए 391 वोट चाहिए. एनडीए के पास 439 सांसदों का समर्थन है, जिसमें लोकसभा में 299 और राज्यसभा में 140 सांसद शामिल हैं. दूसरी ओर, इंडिया गठबंधन के पास 327 सांसद हैं, जिनमें लोकसभा में 236 और राज्यसभा में 91 सांसद हैं. इसके अलावा, वाईएसआर कांग्रेस (11 सांसद) ने स्पष्ट रूप से राधाकृष्णन का समर्थन किया है, जिससे एनडीए की स्थिति और मजबूत हो गई है. संख्याबल के हिसाब से सीपी राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन जीत का अंतर 2022 के चुनाव की तरह बड़ा होना मुश्किल लग रहा है, जब जगदीप धनखड़ ने 528 वोट हासिल किए थे.
क्रॉस वोटिंग: क्या होगा खेला?
उपराष्ट्रपति चुनाव में गुप्त मतदान होता है, जिसके कारण क्रॉस वोटिंग की संभावना हमेशा बनी रहती है. 2022 में जगदीप धनखड़ को बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस जैसे गैर-एनडीए दलों का समर्थन मिला था, जिसने उनकी जीत को और भारी बनाया. इस बार भी एनडीए को कुछ विपक्षी दलों से समर्थन की उम्मीद है. हालांकि, इंडिया गठबंधन इसे “संविधान बनाम आरएसएस-बीजेपी” की लड़ाई के रूप में पेश कर रहा है और सांसदों से “अंतरात्मा की आवाज” पर वोट देने की अपील कर रहा है. समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सुदर्शन रेड्डी के समर्थन की घोषणा की है, लेकिन बीजेडी और बीआरएस जैसे दलों की तटस्थता ने मुकाबले को रोचक बना दिया है.
उम्मीदवारों की प्रोफाइल
इस चुनाव में पहली बार दोनों प्रमुख उम्मीदवार दक्षिण भारत से हैं, जो इसे ऐतिहासिक बनाता है. एनडीए के सीपी राधाकृष्णन (67) तमिलनाडु से हैं और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं. वे झारखंड और तेलंगाना के राज्यपाल रह चुके हैं और 1998-1999 में कोयंबटूर से लोकसभा सांसद रहे. उनकी गैर-विवादित छवि और बीजेपी संगठन में मजबूत पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद चेहरा बनाती है. दूसरी ओर, इंडिया गठबंधन के बी. सुदर्शन रेड्डी (79) तेलंगाना से हैं और 2007-2011 तक सुप्रीम कोर्ट के जज रहे. गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और गोवा के पहले लोकायुक्त के रूप में उनकी निष्पक्ष छवि विपक्ष की रणनीति का आधार है.
मध्यावधि चुनाव
21 जुलाई 2025 को जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया, जिसने सियासी हलकों में हलचल मचा दी. यह तीसरा मौका है जब किसी उपराष्ट्रपति ने मध्यावधि में इस्तीफा दिया, इससे पहले वराहगिरि वेंकट गिरि (1969) और रामास्वामी वेंकटरमन (1987) ऐसा कर चुके हैं. विपक्ष ने धनखड़ के इस्तीफे को सरकार के दबाव से जोड़ा है, जबकि बीजेपी इसे स्वास्थ्य कारणों से प्रेरित बता रही है. इस इस्तीफे ने मध्यावधि चुनाव की राह खोली, जिसमें नया उपराष्ट्रपति पूरे पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगा.
क्षेत्रीय दलों की भूमिका: गेमचेंजर या तटस्थ?
इस चुनाव में क्षेत्रीय दलों की भूमिका अहम है. बीजेडी (7 सांसद) और बीआरएस (4 सांसद) ने मतदान से दूरी बनाने का फैसला किया है, जिसे कई लोग एनडीए के लिए अप्रत्यक्ष समर्थन मान रहे हैं. वाईएसआर कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से राधाकृष्णन का समर्थन किया है, जबकि टीडीपी (16 सांसद) भी एनडीए के साथ है. हालांकि, इंडिया गठबंधन ने डीएमके और टीडीपी जैसे दलों को सुदर्शन रेड्डी के समर्थन के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन चंद्रबाबू नायडू और जगन मोहन रेड्डी जैसे नेताओं की प्रतिक्रिया मिश्रित रही. 18 सांसदों का रुख अभी अस्पष्ट है, जो विपक्ष के लिए उम्मीद की किरण हो सकता है.
क्या कहता है इतिहास?
2022 के उपराष्ट्रपति चुनाव में जगदीप धनखड़ ने 528 वोटों के साथ विपक्ष की मार्गरेट अल्वा (182 वोट) को भारी अंतर से हराया था. उस समय एनडीए को बीजेडी, वाईएसआरसीपी और बीएसपी जैसे दलों का समर्थन मिला था. इस बार विपक्ष अधिक एकजुट है, और सुदर्शन रेड्डी की उम्मीदवारी को संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के प्रतीक के रूप में पेश किया जा रहा है. फिर भी, एनडीए की संख्याबल और रणनीतिक लॉबिंग, जिसमें अमित शाह और जेपी नड्डा जैसे नेता सक्रिय हैं, राधाकृष्णन की जीत को लगभग निश्चित बनाती है.
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