लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और व्यापक कदम उठाया है. अब स्कूलों में केवल पढ़ाई की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि भवनों की मजबूती, आपदा से निपटने की तैयारी, अग्नि सुरक्षा, स्वच्छता और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण भी प्राथमिकता का हिस्सा होगा. इसी उद्देश्य से प्रदेशभर के परिषदीय, कंपोजिट, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के साथ हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में व्यापक सुरक्षा ऑडिट शुरू करने का निर्णय लिया गया है. यह अभियान भविष्य में किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने और स्कूल परिसरों को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
1.40 लाख से अधिक विद्यालयों की होगी चरणबद्ध जांच
राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार सुरक्षा ऑडिट के दायरे में प्रदेश के 1.40 लाख से अधिक सरकारी शिक्षण संस्थान शामिल किए गए हैं. इनमें प्राथमिक और उच्च प्राथमिक परिषदीय विद्यालयों के साथ कंपोजिट स्कूल, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेज तथा सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय भी शामिल हैं. प्रत्येक संस्थान में भवनों की स्थिति, बिजली व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य सुविधाएं, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध व्यवस्थाएं और बाल संरक्षण से जुड़े मानकों की विस्तार से समीक्षा की जाएगी. आवश्यकता पड़ने पर प्रत्येक विद्यालय के लिए नई स्कूल आपदा प्रबंधन योजना भी तैयार कराई जाएगी.
हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद तेज हुई प्रक्रिया
इस पूरी व्यवस्था को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के निर्देशों के अनुपालन में लागू किया जा रहा है. अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिलाधिकारियों को तय कार्ययोजना के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. यह कार्ययोजना राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की स्कूल सुरक्षा नीति-2016, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और केंद्र सरकार द्वारा जारी वर्ष 2021 के सुरक्षा मानकों पर आधारित है. राज्य स्तर पर पहले से गठित समिति इस पूरे अभियान की निगरानी करेगी ताकि सभी जिलों में एक समान सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके.
हर जिले में बनेगी विशेषज्ञों की 31 सदस्यीय टीम
सुरक्षा ऑडिट को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय स्कूल सुरक्षा समन्वय समिति का गठन किया जाएगा. इस समिति में कुल 31 सदस्य होंगे, जिनमें सिविल इंजीनियर, अग्नि एवं ऊर्जा सुरक्षा विशेषज्ञ, आईटी विशेषज्ञ और फील्ड अधिकारी शामिल रहेंगे. एजेंसी का चयन और टीम का ओरिएंटेशन पहले ही पूरा किया जा चुका है तथा अगले दो से तीन महीनों के भीतर प्रदेशभर में सर्वे का काम शुरू होने की संभावना है. समिति नियमित सुरक्षा ऑडिट, जोखिम मूल्यांकन, मॉक ड्रिल, विद्यार्थियों और शिक्षकों के प्रशिक्षण के साथ सुरक्षा संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान की जिम्मेदारी भी निभाएगी.
पुराने भवनों से लेकर प्राकृतिक जोखिम तक होगी विशेष जांच
ऑडिट के दौरान केवल भवनों की मजबूती ही नहीं, बल्कि स्कूल परिसरों से जुड़े हर संभावित खतरे का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाएगा. चारदीवारी, 30 से 40 वर्ष पुराने जर्जर भवन, बिजली व्यवस्था, खेल मैदान, प्रयोगशालाएं, सड़क सुरक्षा, अग्निशमन उपकरण, फर्नीचर, शौचालय और आपातकालीन निकासी मार्गों की विस्तार से जांच होगी. इसके अलावा भूकंप और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के विद्यालयों का अलग से जोखिम आकलन किया जाएगा. स्कूल परिसरों में सांप जैसे जहरीले जीवों की मौजूदगी और अन्य गैर-संरचनात्मक खतरों की भी पहचान की जाएगी ताकि बच्चों और शिक्षकों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके.
रिपोर्ट के आधार पर होगी लगातार निगरानी और सुधार
सुरक्षा ऑडिट केवल एक बार की औपचारिक प्रक्रिया नहीं होगी, बल्कि इसे निरंतर निगरानी व्यवस्था से जोड़ा जाएगा. ऑडिट रिपोर्ट तैयार होने के बाद जिला स्तरीय समिति प्रत्येक महीने कम से कम पांच प्रतिशत विद्यालयों का निरीक्षण करेगी और कमियों को दूर कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करेगी. सरकार का उद्देश्य केवल जोखिमों की पहचान करना नहीं, बल्कि स्कूलों को ऐसी सुरक्षित और आपदा-रोधी इकाइयों में बदलना है जहां विद्यार्थी बिना किसी भय के शिक्षा प्राप्त कर सकें और भविष्य में किसी भी आपात स्थिति का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके.
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