हिंदू युवक को फैक्ट्री से खींच ले गई भीड़, पीट-पीटकर मारा और लगा दी आग... बांग्लादेश का वीडियो वायरल

बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में एक भयावह घटना ने देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हिलाकर रख दिया है.

The mob dragged the Hindu youth in Bangladesh video viral
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

ढाका: बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में एक भयावह घटना ने देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हिलाकर रख दिया है. गुरुवार को हुई नृशंस हत्या में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की पीट-पीटकर हत्या की गई. इस घटना से ठीक पहले का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसने हत्या की भयानकता और उस समय कानून व्यवस्था की कमी को उजागर किया है.

जमुनाटीवी न्यूज ब्रॉडकास्टर द्वारा जारी किए गए वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि कैसे बड़ी संख्या में लोग फैक्ट्री के बाहर जमा थे. वीडियो में भीड़ के सदस्यों का उन्माद और उत्तेजित व्यवहार साफ दिखाई दे रहा है. कुछ ही सेकंड में फैक्ट्री का दरवाजा खुलता है और दीपू को भीड़ के हाथों में ले जाया जाता है. फुटेज से यह स्पष्ट है कि यह वही स्थान था, जहां दीपू चंद्र दास काम करते थे.

वीडियो दर्शाता है कि भीड़ ने पूरे क्षेत्र को अपने नियंत्रण में ले रखा था. इस दौरान पुलिस या किसी कानून व्यवस्था की मौजूदगी नहीं दिखी. स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस का कमजोर या निष्क्रिय रवैया इस भयावह घटना को अंजाम देने में सीधे तौर पर सहायक साबित हुआ.

ईशनिंदा के झूठे आरोप में हत्या

रिपोर्टों के अनुसार दीपू को ईशनिंदा के झूठे आरोप में पीट-पीटकर मार डाला गया. घटना के बाद भीड़ ने शव को पेड़ से बांधकर आग लगा दी. इस हिंसक कदम ने बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

बांग्लादेशी अधिकारियों ने जांच में कहा कि दीपू के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है. पुलिस ने पुष्टि की है कि उनके किसी भी बयान या कृत्य से यह साबित नहीं हुआ कि उन्होंने ईशनिंदा की थी.

पुलिस की भूमिका पर सवाल

मामले की गंभीरता को देखते हुए आलोचक और मानवाधिकार संगठन पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं. वीडियो और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने भीड़ का सामना करने की बजाय दीपू को उनके हाथों सौंप दिया. इसी तरह की घटनाएं पहले भी हुई हैं, जैसे उत्सव मंडल के मामले में, जब पुलिस ने आरोपी को भीड़ के हवाले कर दिया था.

मशहूर लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा किया और पुलिस की निष्क्रियता को निंदनीय बताया. तस्लीमा ने कहा कि दीपू को कोई जुर्म नहीं किया था, लेकिन अफवाहों और गलत आरोपों की वजह से उसे निर्दयतापूर्वक मौत के मुंह में धकेल दिया गया.

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