The JC Show : World Capitals Shower Love on Modi! India's Historic 5-Nation Tour & Its Impact

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्रा से लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों तक, डॉलर के बढ़ते भाव से लेकर पेट्रोल-गैस की महंगाई और बीजेपी-कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति तक हर विषय पर भारत 24 के सीईओ और एडिटर इन चीफ डॉ. जगदीश चंद्र ने विस्तार से विश्लेषण किया.

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The JC Show: देश और दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था, कूटनीति और बदलते वैश्विक हालात पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्रा से लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों तक, डॉलर के बढ़ते भाव से लेकर पेट्रोल-गैस की महंगाई और बीजेपी-कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति तक हर विषय पर भारत 24 के सीईओ और एडिटर इन चीफ डॉ. जगदीश चंद्र ने विस्तार से विश्लेषण किया. इस शो का नाम है- World Capitals Shower Love on Modi!

प्रश्न: आज के जेसी शो की हमने हेडलाइन रखी है “World Capitals Shower Love on Modi!” इसके मायने क्या हैं?

उत्तर: इसके मायने ये हैं नरेंद्र मोदी इस पॉपुलर अक्रॉस द ग्लोब. नॉट ओनली इंडियन डिस्पोरा. बट एवरीबडी वास क्लीन टू हैव अ लुक एट हिम. जिज्ञासा थी लोगों के मन में. चाहे नॉर्वे में थे, यूएई में थे, नीदरलैंड में थे. किसी कंट्री में भी थे वहां पर जो है तो जिज्ञासा थी मन में देखने के लिए कि नरेंद्र मोदी कौन है और जिज्ञासा वहां आम आदमी के मन में थी अक्रॉस द रोड जिसे कहते हैं लोग खड़े हैं कार जा रही है लोग देख रहे हैं नरेंद्र मोदी जा रहे हैं इतनी जिज्ञासा और इतना प्रेम उमड़ा. अखबार की हेडलाइन थी उस दिन “हे शावर्स लव ऑन मोदी”. क्या शानदार दृश्य था ये. आप देखिए इधर स्क्रीन पे एक महिला रो रही है आंख में आंसू आ रहे हैं नरेंद्र मोदी उनके आंसू पोंछ रहे हैं. क्या इमोशनल सीन है. तो यह जो इमोशनल सीन है नरेंद्र मोदी का इट हैज़ ट्रेवल्ड नाउ बियों्ड द बाउंड्री ऑफ़ द कंट्री विदेशों तक में. तो जितने देशों में गए वो अपार्ट फ्रॉम सीरियस पॉलिटिकल डिस्कशन जो है बेसिकली अगर आप देखेंगे इट एन एक्सप्रेशन ऑफ लव एंड अफेक्शन फॉर मोदी एट एव्री लेवल एट एव्री कॉरिडोर जो है. इसलिए कहा जाता है कि द एंटायर वर्ल्ड मींस एटलीस्ट दिस फाइव वर्ल्ड कैपिटल्स शावर फ्लावर्स ऑन मोदी. दैट इज द रियल फिलोसफी दैट इज द रियल सेंटीमेंट.

प्रश्न: कई लोग यह सवाल कर रहे हैं खासतौर पर विपक्ष कि मौजूदा ऊर्जा संकट को देखते हुए भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश यात्रा पे क्यों गए?

उत्तर: दिस क्वेश्चन इज़ पॉलिटिकली वेरी इमच्योर. व्हिच इग्नोर द सीरियसनेस ऑफ़ द करंट ग्लोबल क्रिटिकल सिचुएशन. नरेंद्र मोदी वाज़ नॉट ऑन हॉलिडे. ही हैड गॉन ऑन ए वेरी क्रिटिकल डिप्लोमेटिक मिशन एट ए टाइम व्हेन द एंटायर वर्ल्ड इज फेसिंग एक्यूट पावर क्राइसिस, एनर्जी क्राइसिस, राइजिंग फ्यूल क्राइसिस, डिस्टर्ब शिपिंग रूट्स एंड सो ऑन. एट अ टाइम यू कांट सीट एट होम. यू हैव टू ट्रेवल अब्रड. यू हैव टू ट्रेवल वर्ल्ड टू एक्सप्लोर द चांसेस टू इंश्योर योर इंटरेस्ट. एंड नरेंद्र मोदी हैज़ एक्जेक्टली डन दिस. ही वाज़ नॉट ऑन टूरिज्म मिशन. ही वास ऑन अ क्रिटिकल सीरियस पॉलिटिकल एंड डिप्लोमेटिक स्ट्रेटेजिक मिशन. एस अ प्राइम मिनिस्टर ऑफ़ द कंट्री ही इज़ आल्सो टू एनश्योर द कंट्रीज इकोनमिक इंटरेस्ट, इकोनमिक स्टेबिलिटी, स्ट्रेटेजिक रिलेशनशिप एंड एन ओवरऑल इंटरेस्ट ऑफ़ द कंट्री एज वेल इन द वर्ल्ड. सो इट वाज़ अ वेरी सीरियस विजिट व्हिच हैज़ बीन नोइंगली अननोइंगली बीन क्रिटिसाइज़्ड बाय द अपोजिशन व्हिच इज़ नॉट फेयर. दिस क्रिटिसिज्म इज़ नॉट इन द नेशनल इंटरेस्ट.

प्रश्न: आखिर ऐसा कैसे है? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बतौर मुख्यमंत्री, बतौर प्रधानमंत्री अपना 24 साल 7 महीने का शासनकाल पूरा कर चुके हैं और उसमें एक भी छुट्टी नहीं लेते हैं?

उत्तर: ऐसा है ये सच है. विचित्र किंतु सत्य है. देखिए मुझे लगता है राजनीति के अलावा उनके पास कुछ है ही नहीं. एक व्यक्ति ने कहा कि आप क्या-क्या चीजें जानते हो. नरेंद्र मोदी के लिए कहा जाता है ही इज़ अ ब्रिलियंट पॉलिटिशियन एंड देन इकोनॉमिस्ट देन एडमिनिस्ट्रेटर. तो बेसिकली क्या है सारी बातें राजनीति से सिस्टर कंसर्न है. तो 24 * 7 पॉलिटिकल और थिंकिंग और विकसित भारत की कल्पना इन कामों में रहते हैं. दैट वे जो है तो इसलिए छुट्टी लेने का कोई सवाल ही नहीं है उनके जीवन में. गुजरात में तो छोटे से कमरे में रहते थे. यहां भी उनका वर्किंग ऐसा है. रात को मैं समझता हूं शायद 2:00 बजे सोते होंगे फिर उठ जाते हैं 6-7:00 बजे. दैट वे तो उनका जीवन है. इन वे आप कह सकते हैं छुट्टी का कोई सवाल नहीं है. तो मैं तो इस थ्योरी से प्रभावित हूं और इस बात को सच मानता हूं कि 25 सालों में उन्होंने कोई छुट्टी नहीं ली काम से. आई बिलीव दिस.

प्रश्न: मैंने हमेशा देखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्राइसिस के दौरान एक अल्टरनेट ढूंढने की कोशिश करते हैं और ढूंढते भी हैं. अभी जो यूएई की यात्रा हुई इस एनर्जी क्राइसिस के दौरान, इस यात्रा को आप कैसे देखते हैं?

उत्तर: ये यात्रा उसी का पार्ट थी. टू फाइंड अल्टरनेटिव्स, टू लुक एट अल्टरनेटिव्स के रिसोर्सेज क्या-क्या हो सकते हैं? किन-किन कंट्रीज से गैस आ रहा है? किन-किन कंट्री से पेट्रोल आ रहा है? कहां-कहां नए रिसोर्सेज हो सकते हैं? और कल को पेट्रोल नहीं आए तो फिर क्या करेंगे? अभी सेक्रेटरीज की मीटिंग थी. मिनिस्टर्स भी थे. उसने साफ तौर पे कहा कि यू हैव TO एक्सप्लोर द पॉसिबिलिटीज ऑफ़ अदर रिसोर्सेज. और क्या 200 पेट्रोकेमिकल प्रोजेक्ट जो है हम खड़े कर सकते हैं कि नहीं अगले साल में? तो क्या 24 घंटे वो विकल्प ढूंढते हैं. पर्पस ये है कि हारना नहीं है. सिचुएशन को फेस करना है. एक्स नहीं तो वाई नहीं तो जेड. तो ही यूज़ टू फाइंड सॉल्यूशन अल्टरनेटिव टू एव्री क्राइसिस. एट द मोमेंट ही इज़ डूइंग द सेम एक्सरसाइज.

प्रश्न: अभी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रूबियो जब आए यहां पर अमेरिका से भारत तो रूबियो का यह कहना था कि भारत को जितना भी तेल चाहिए वो हम देने को तैयार हैं. तो इस पूरे एनर्जी क्राइसिस के दौरान ट्रंप की इतनी उदारता भारत के लिए, इसको कैसे देखते हैं?

उत्तर: यह नरेंद्र मोदी का चमत्कार है जिसे कहते हैं उनका जादू जो है सिर चढ़ के बोलता है. मोदी मैजिक है और फिर वही बात है कि मोदी है तो मुमकिन है. ट्रंप का प्रतिनिधि ऐसा कह रहा है. क्राइसिस में आप कितना बड़ा एश्योरेंस आपको दे रहा है. इसे कहते हैं उनकी डिप्लोमेसी की सक्सेस. कितनी बड़ी बात है आज के क्राइसिस के माहौल में. इट इज़ अ मेजर अचीवमेंट ऑफ़ नरेंद्र मोदी एस द प्राइम मिनिस्टर कि अमेरिका आगे बढ़ के, ट्रंप आगे बढ़ के अपने विदेश मंत्री की मारफत जो है इतना बड़ा ऑफर और इतनी बड़ी उदारता आपको दिखा रहा है. प्राउड ऑफ़ द नेशन कहते हैं इसे. प्राउड ऑफ़ द कंट्री एंड देन प्राउड ऑफ नरेंद्र मोदी.

प्रश्न: क्या सच है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिप्लोमेसी का सारा फोकस अर्थव्यवस्था पर है? हैज़ डिप्लोमेसी नाउ बिकम इकोनमी ड्रिवन?

उत्तर: एब्सोलुटली. ये तो पिछले पांच छह साल से देख रहा हूं खास करके. और नरेंद्र मोदी ने वक्त को पहचाना है. जी ही आल्सो रिकॉग्नाइज कि अब जो है इकॉनमी एंड हैज़ टेकन ए फ्रंट सीट एंड देन पॉलिटिक्स कम्स. और सारे संसार की राजनीति जो है ट्रंप ने भी ऐसा ही किया जो नरेंद्र मोदी कर रहे हैं. तो दैट वे नरेंद्र मोदी एंड ट्रंप आर ऑन द सेम फेस कि जो इकॉनमी है, इकोनमिक प्रिंसिपल्स हैं, जो कंट्री की पॉलिटिकल रिलेशनशिप है, डिप्लोमेटिक रिलेशनशिप है उसको इकोनमिक इश्यूज ड्राइव करेंगे. ऑन दिस पॉइंट मोदी एंड ट्रंप आर ऑन द सेम पेज. बट सर्टेनली मोदी है रियलाइज सो ड्यूरिंग दिस विजिट आल्सो ही एनश्यर्ड दैट डिप्लोमेसी ड्रिवन ऑन इकोनमिक पैरामीटर्स. दिस इज ऑल.

प्रश्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा के दौरान जैसे ही उनका विमान यूएई और स्वीडन के एयर स्पेस में एंटर हुआ तो वहां पर जेट फाइटर्स ने उनके विमान को एस्कॉर्ट किया. आखिर इतना प्यार क्यों प्रधानमंत्री मोदी के लिए यूएई और स्वीडन में?

उत्तर: मैंने कहा ना ईश्वर का चमत्कार है. ईश्वर की देन है. भारत नहीं, भारत के बाहर प्रभावित हैं लोग. आप देखिए यह तो अद्भुत था. एक बार मुझे लगा अगर नरेंद्र मोदी को पहले सूचना हुई तो अच्छी बात है. नहीं तो हैरान होंगे कि यह क्या हो रहा है. फाइटर जेट साथ-साथ चल रहे हैं. दोनों स्वीडन में यही हुआ और यूएई में यही हुआ. तो मतलब नरेंद्र मोदी के संबंधों का चमत्कार है. अद्भुत बात है. मैंने रिसेंट हिस्ट्री में देखा नहीं ऐसा. दोनों कंट्रीज ने किया. ये तो गर्व की बात है. सम्मान की बात देश के लिए.

प्रश्न: आखिर यूएई जैसे मुस्लिम राष्ट्र में इतना सम्मान?

उत्तर: यस. एक और चमत्कार है. आप देखिए अनबिलीवेबल. नो मुस्लिम राष्ट्र तो उन्हें अपना सर्वोच्च पुरस्कार दे चुके हैं. नरेंद्र मोदी हैज़ डिफाइड दैट थ्योरी कि मुस्लिम्स उनके साथ नहीं है या अलग मानते हैं अपने से. वो थ्योरी आज खत्म है. नो मुस्लिम राष्ट्र उनको सम्मानित कर चुके हैं. और आप देखिए ना अभी आए थे राष्ट्रपति यूएई के ढाई घंटे के लिए. सीधे गए नरेंद्र मोदी के घर पे. बात की चले गए. मालूम नहीं क्या बात हुई. ऐसे क्यों आए थे ढाई घंटे के लिए. ऐसे ये गए तीन घंटे के लिए वहां पे करके आ गए. तो आप देखिए इसे कहते हैं क्या वेवलेंथ है आपस में, क्या केमिस्ट्री है यूएई प्रेसिडेंट और नरेंद्र मोदी के बीच में. सो मुस्लिम राष्ट्र वाली थ्योरी पीछे रह गई है. अब तो नरेंद्र मोदी इक्वली पॉपुलर अमंग ऑल कंट्रीज इंक्लूडिंग मुस्लिम नेशंस.

प्रश्न: इन टोटलिटी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इन पांच देशों की यात्रा से क्या मिला भारत को?

उत्तर: भारत को तो देखो मिलना ही मिलना है. यात्रा हैज़ बीन सक्सेसफुल. सबसे बड़ी बात ये है कि 40 बिलियन डॉलर का इन्वेस्टमेंट कमिट हुआ है. मैंने कहा ना आज विजिट है ना इकॉनमी ड्रिवन है. तो 40 बिलियन डॉलर का इन्वेस्टमेंट कमिट हुआ है. वहां गोलमेज सम्मेलन हुआ, कॉन्फ्रेंस हुई ग्लोबल सीईओस की. 50 से ज्यादा मल्टीनेशनल कंपनी के सीईओ वहां पे आए और ये कमिटमेंट दिया. और वो सीईओस है जिनकी कंपनी की जो है वो 3 ट्रिलियन है उनकी वर्थ. इट वाज़ सीरियस डिस्कशन एंड इट शोज़ द लेवल ऑफ पार्टिसिपेशन ऑफ वेरी पॉपुलर एंड वेरी इंपोर्टेंट कॉर्पोरेट हाउसेस इन द डिस्कशन. कहने का मतलब ये है कि सीरियस डिस्कशन था. खाली फॉर्मल वैसे नहीं थी. औपचारिकता के नाते कॉन्फ्रेंस नहीं थी. तो सबसे बड़ा कंट्रीब्यूशन उनका इसमें यही रहा नरेंद्र मोदी की इन पांचों यात्राओं का कि आर्थिक दृष्टि से 40 बिलियन डॉलर का इन्वेस्टमेंट इंडिया के लिए कमिट हुआ है.

प्रश्न: आखिर पांच देशों की इस यात्रा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के लिए क्या लेकर आए हैं? और सबसे पहला सवाल है यूएई को लेकर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यूएई यात्रा के दौरान मोदीस डिप्लोमेसी फॉर एनर्जी सिक्योरिटी को आप कैसे देखते हैं?

उत्तर: सिक्योरिटी का सबसे बड़ी उपलब्धि उसमें यह रही कि उन्होंने एग्री करवाया उनको कि 3 करोड़ बैरल इंडिया में वो स्टोरेज रहेगा. उसका पहले कम था. 3 करोड़ भारत में तीन स्टोरेज सेंटर्स हैं आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में. उनकी कैपेसिटी 4 करोड़ की है उसको रिजर्व करने की. तो भारत में इस समय आप नरेंद्र मोदी के इस यात्रा के बाद 3 करोड़ बैरल हर समय उपलब्ध रहेगा. एस ए क्राइसिस मैनेजमेंट जिसे कहना चाहिए, एस ए रिजर्व. तो उपलब्धि उनकी जो है वो इसमें यह थी. दूसरा क्या सात एग्रीमेंट हुए मिलाकर के और दो बड़े और काम हुए. उन्होंने कहा कि हम 48,000 करोड़ का निवेश इंडिया में करेंगे फाइनेंसियल सेक्टर में. बहुत बड़ी बात है. और उसके साथ ही गुजरात के वर्ल्ड नार में जो है एक शिप रिपेयर्स प्लांट है वहां पे बनेगा. वो उन्होंने एग्री किया. तो मोटे तौर पर तीन बड़ी सफलताएं रही. और एक सबसे बड़ा आश्वासन ऑफ द रिकॉर्ड ये आश्वासन कि तेल की कमी नहीं है. जब जरूरत होगी हम आपको देंगे. और सबसे बड़ी बात यह है यह जो तेल वहां से आएगा यह होर्मुज के थ्रू नहीं आएगा, उस रूट से नहीं आएगा. नो क्राइसिस, नो अनसर्टेनिटी. ये अलग रूट से आएगा. तो इसकी सप्लाई है ना सर्टेन है. सो दिस इज नंबर वन अचीवमेंट ऑन नरेंद्र मोदी ऑन एनर्जी सेक्टर ड्यूरिंग हिज यूएई विजिट.

प्रश्न: आखिर यूएई और भारत के बीच कैसा है व्यापार संतुलन?

उत्तर: व्यापार अच्छा है लेकिन उसका जो ट्रेंड है, जो उसका सिस्टम है, दिशा है इसकी वो बिजनेस डेफिसिट जिसे हम कहते हैं ट्रेड डेफिसिट जो है उसकी है. जैसे इसे सुधारने की आवश्यकता है.

प्रश्न: ईरान-यूएई संघर्ष को देखते हुए दुबई में चाहे ट्रेवल टूरिज्म की बात हो, रियलस्टेट की बात हो, वहां पर आप क्या भविष्य देखते हैं?

उत्तर: भविष्य ठीक होगा. अभी तो चिंता है. 35% प्रॉपर्टीज के दाम वहां गिर गए हैं. नया कोई इन्वेस्टमेंट करना नहीं चाहता. बाजार में बेचने निकलते हैं लोग तो कोई ग्राहक लेने वाला नहीं है. ये क्राइसिस है वहां पे. हालांकि एक बात जरूरी है कि वहां का जो प्रॉपर्टी बाजार है, रियल स्टेट है वो थोड़ा मैच्योर है. वो क्राइसिस को झेल रहा है इस समय और जल्दी खड़ा हो जाएगा. ये कह सकते हैं आप. लेकिन एट द मोमेंट तो रियल स्टेट में वहां पर क्राइसिस है. जहां तक टूरिज्म का सवाल है तो निश्चित तौर पे दुबई के टूरिज्म को बहुत जबरदस्त धक्का लगा है. संसार का एक ऐसा डेस्टिनेशन था जिसको कहते थे सेफ डेस्टिनेशन है. फैमिली डेस्टिनेशन है. उस धारणा को, उस कांसेप्ट को बहुत धक्का लगा है. टूरिस्ट जाना बंद हो गए हैं. होटलों के दाम भी इस समय जो है 40% गिरे हुए हैं. आप देखिए विमान कम हो गए हैं जाने वाले. विमान की यात्रा कम हो गई है. किराया महंगा हो गया है. कई कंट्रीज का एयर स्पेस बंद होने के कारण से विमान को दुबई घूम के जाना पड़ता है. तो नंबर ऑफ कैंसिलमेंट इन सर्विस, हायर वैल्यू टिकट्स और एक अनिष्ठा की भावना, एक असुरक्षा की भावना दुबई को लेकर के जो है, टूरिज्म सेक्टर को किल कर रही है वहां पे.

प्रश्न: क्या नरेंद्र मोदी और अमित शाह के प्रयासों से पश्चिम बंगाल एक बार फिर भारत का इकोनमिक पावर हाउस बन सकता है?

जवाब: देखिए, अपेक्षाएं और आकांक्षाएं इतनी ज्यादा हैं कि लोग मानकर चल रहे हैं कि बंगाल में बड़ा बदलाव होने वाला है. वहां की जनता की उम्मीदें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बहुत अधिक हैं. लोग चाहते हैं कि बंगाल फिर उसी गौरव को हासिल करे, जो कभी उसके पास था. एक समय था जब बंगाल को देश की आर्थिक राजधानी जैसा महत्व प्राप्त था. बैंकिंग सेक्टर से लेकर उद्योग तक, बंगाल की अलग पहचान थी.

अब केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व का फोकस “सोनार बंगला” के विजन पर है. अगले एक साल के भीतर आपको बंगाल में बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्री और एफडीआई निवेश दिखाई दे सकता है. जो माहौल बन रहा है, उससे लगता है कि बंगाल को फिर से देश के बड़े आर्थिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की तैयारी चल रही है.

प्रश्न: केवल 14 दिनों में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कई बड़े फैसले लिए. आप उनके कामकाज को कैसे देखते हैं?

जवाब: वे बेहद तेज़ी से काम कर रहे हैं. जिस स्पीड से फैसले लिए गए हैं, उसकी चर्चा हर जगह हो रही है. सबसे बड़ा फैसला बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग को लेकर माना जा रहा है. बॉर्डर एरिया में बीएसएफ को जमीन उपलब्ध कराने का फैसला सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

इसके अलावा धार्मिक आधार पर आरक्षण खत्म करने, सरकारी नौकरियों में उम्र सीमा बढ़ाने, सातवें वेतन आयोग को लागू करने और महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता योजनाओं को आगे बढ़ाने जैसे फैसले भी काफी चर्चित रहे.

सरकार फिलहाल दो मोर्चों पर काम कर रही है—पहला, पिछली सरकार के फैसलों की समीक्षा और दूसरा, प्रशासनिक व विकासात्मक बदलाव. राजनीतिक रूप से भी यह संदेश देने की कोशिश हो रही है कि सरकार तेज़ फैसले लेने के मूड में है.

प्रश्न: क्या बंगाल में भाजपा का अगला बड़ा लक्ष्य सिर्फ सत्ता में आना नहीं बल्कि वैचारिक बदलाव भी है?

जवाब: बिल्कुल. भाजपा सिर्फ चुनावी जीत तक सीमित नहीं रहना चाहती. पार्टी बंगाल में लंबे समय तक अपनी वैचारिक और संगठनात्मक पकड़ मजबूत करना चाहती है. जिस तरह पहले पश्चिम बंगाल में वामपंथ मजबूत था और बाद में तृणमूल कांग्रेस का वर्चस्व बना, उसी तरह भाजपा अब खुद को स्थायी राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करना चाहती है.

पार्टी का मानना है कि विकास, राष्ट्रवाद, सुरक्षा और प्रशासनिक सुधार जैसे मुद्दों के जरिए वह बंगाल की राजनीति में स्थायी जगह बना सकती है. यही कारण है कि संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर लगातार आक्रामक रणनीति दिखाई दे रही है.

प्रश्न: क्या आने वाले समय में बंगाल की राजनीति राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकती है?

जवाब: हाँ, पश्चिम बंगाल आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति का सबसे अहम केंद्र बन सकता है. लोकसभा की बड़ी संख्या में सीटें होने के कारण बंगाल का राजनीतिक महत्व हमेशा से बहुत बड़ा रहा है. अगर यहां भाजपा अपनी स्थिति और मजबूत करती है, तो उसका सीधा असर राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ेगा.

इसी वजह से केंद्र सरकार, भाजपा नेतृत्व और विपक्ष—सभी की नजर बंगाल पर बनी हुई है. आने वाले चुनाव सिर्फ राज्य की राजनीति नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीतिक समीकरण भी तय कर सकते हैं.