'नागरिकों और बच्चों को मारते हैं...' भारत ने UNGC में पाकिस्तान को लताड़ा, PoK का मुद्दा भी उठाया

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में आयोजित एक अहम सत्र में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को बेनकाब किया है.

India slams Pakistan at UNGC also raises PoK issue
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में आयोजित एक अहम सत्र में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को बेनकाब किया है. इस बार निशाना केवल आतंकवाद पर नहीं था, बल्कि पाकिस्तान की बच्चों के खिलाफ हिंसा, सीमा-पार आतंकी गतिविधियों, अफगानिस्तान में हमलों, और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों की ओर भी वैश्विक ध्यान आकर्षित किया गया.

भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) के सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने पाकिस्तान के दोहरे चरित्र पर जोरदार हमला बोला और साक्ष्यों के साथ विश्व मंच पर उसका असली चेहरा उजागर किया.

पाकिस्तान आतंकियों की पनाहगाह: निशिकांत दुबे

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में "प्रमोशन एंड प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑफ चिल्ड्रेन" विषय पर चर्चा के दौरान अपने भाषण में पाकिस्तान की नीतियों की तीखी आलोचना की. उन्होंने कहा, "अगर दुनिया में कोई देश है जो बच्चों के अधिकारों और उनके जीवन की सुरक्षा की अवधारणाओं का सबसे अधिक उल्लंघन करता है, तो वह पाकिस्तान है."

उन्होंने पाकिस्तान की भूमिका को उजागर करते हुए कहा कि:

  • पाकिस्तान आतंकवादी गुटों को पनाह देता है और उनका समर्थन करता है, जो अफगानिस्तान और भारत में बच्चों और स्कूलों को निशाना बनाते हैं.
  • संयुक्त राष्ट्र महासचिव की 2025 की रिपोर्ट में भी इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि पाकिस्तान की नीतियां बच्चों के खिलाफ हिंसा और युद्ध अपराधों में लिप्त हैं.
  • पाकिस्तान की सेना ने अफगानिस्तान की सीमा के पास कई बार हवाई हमले किए हैं, जिनमें निर्दोष अफगानी बच्चे हताहत हुए हैं.
  • मई 2025 में, पाकिस्तानी सेना ने भारतीय गांवों पर गोलीबारी की, जिसमें कई निर्दोष नागरिक मारे गए या घायल हुए.

दुबे ने पाकिस्तान पर यह भी आरोप लगाया कि वह बच्चों के अधिकारों के मुद्दे से अंतरराष्ट्रीय ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है और दुनिया को गुमराह करने की कोशिश में जुटा है.

PoK में और मानवाधिकारों की हत्या

केरल से सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने उपनिवेशवाद उन्मूलन पर महासभा की एक अन्य समिति में पाकिस्तान को घेरते हुए कहा, "पाकिस्तान न केवल आतंकवाद का समर्थन करता है, बल्कि जिन क्षेत्रों पर उसने अवैध कब्जा किया है, वहां के नागरिकों पर भी दमन और अत्याचार कर रहा है."

उन्होंने कुछ अहम बिंदुओं पर जोर दिया:

अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने 26 निर्दोष लोगों की हत्या की थी, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे.

पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान लगातार जनता की आवाज दबा रहा है, उनकी संपत्तियों और संसाधनों का शोषण कर रहा है.

वहां के स्थानीय लोग सैन्य अत्याचार, सामाजिक उत्पीड़न, और राजनीतिक अधिकारों से वंचित किए जाने के खिलाफ विद्रोह कर रहे हैं.

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव संख्या 47 (1948) का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट रूप से पाकिस्तान से अपेक्षा की गई थी कि वह कब्जे वाले क्षेत्रों से अपनी सेना हटाए.

पाकिस्तान का खुद को पीड़ित दिखाने की कोशिश

भारत के दोनों सांसदों ने इस बात पर भी जोर दिया कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को एक पीड़ित देश के तौर पर प्रस्तुत करता है, जबकि असलियत यह है कि वह संगठित आतंकवाद, कट्टरपंथ और हिंसा का केंद्र बना हुआ है.

निशिकांत दुबे ने कहा, "पाकिस्तान बार-बार यह दिखाने की कोशिश करता है कि वह आतंकवाद का शिकार है, जबकि सच यह है कि वह स्वयं आतंकवादियों को शरण देता है, उन्हें प्रशिक्षित करता है और भारत, अफगानिस्तान व अन्य देशों में उन्हें भेजता है."

बच्चों के अधिकारों की स्थिति बेहद चिंताजनक

UNGA में भारतीय प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि:

  • पाकिस्तान में बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही है.
  • बाल मजदूरी, बाल विवाह और स्कूल ड्रॉपआउट की दर दुनिया में सबसे अधिक है.
  • आतंकी संगठनों के मदरसों में बच्चों को उग्रवाद की शिक्षा दी जा रही है, जो कि बच्चों के भविष्य के साथ एक भयानक खिलवाड़ है.

अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सतर्क रहने की जरूरत

भारत की तरफ से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि अगर वैश्विक संस्थाएं जैसे संयुक्त राष्ट्र, पाकिस्तान की दोहरी नीति और आतंकवाद को नजरअंदाज करती हैं, तो यह पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा साबित होगा.

एन.के. प्रेमचंद्रन ने कहा, "अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में हो रहे मानवाधिकार हनन की जांच करे और वहां के लोगों की स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे."

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