Sindh Province Division: पाकिस्तान की सिंध विधानसभा ने प्रांत को बांटने और नए प्रशासनिक क्षेत्र बनाने से जुड़े प्रस्तावों को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया है. कराची को सिंध से अलग करने या दक्षिणी प्रांत बनाने की मांग को लेकर सिंध के नेताओं ने कड़ा विरोध जताया है. खास बात यह है कि विधानसभा में सीधे पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन नकवी को चुनौती दी गई. माना जा रहा है कि नए प्रांत बनाने की योजना को आगे बढ़ाने में मुनीर और उनके करीबी नकवी की अहम भूमिका है.
सिंध में पाकिस्तान पीपल्स पार्टी यानी पीपीपी की सरकार है. पीपीपी के नेता आसिफ अली जरदारी और बिलावल भुट्टो भी नए प्रांत बनाने के प्रस्ताव के खिलाफ बताए जा रहे हैं. विधानसभा में नेताओं ने जिस तरह खुलकर विरोध किया, उससे पाकिस्तान की राजनीति में हलचल बढ़ गई है. सिंध के मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने चेतावनी दी कि अगर प्रांत को बांटने की कोशिश हुई तो हालात बिगड़ सकते हैं और विरोध आंदोलन का रूप ले सकता है.
'सिंध को बांटने नहीं देंगे'
सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने प्रांत की एकता को लेकर पेश किए गए प्रस्ताव पर कहा कि उनकी सरकार सिंध की क्षेत्रीय एकता से कोई समझौता नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर विधानसभा में चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन इसे ऊपर से थोपने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने साफ कहा कि सिंध के बंटवारे को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा.
We must warn the National Assembly not to even discuss the division of Sindh. Consider this a warning.
— برهان الدین | Burhan uddin (@burhan_uddin_0) September 4, 2026
A dictator introduced this in the 8th Amendment; we should have abolished it through the 18th Amendment.
What they are trying to do is something even Zia did not have the… pic.twitter.com/RG246znYXg
सिंध विधानसभा के सामने आए वीडियो में कई नेता प्रांत की जमीन के लिए मरने, मंत्री पद छोड़ने और जरूरत पड़ने पर सड़कों पर उतरने की बात कहते नजर आए. कुछ नेताओं ने सिंध को बांटने की कोशिश होने पर बलूचिस्तान जैसे हालात पैदा होने की चेतावनी भी दी. नेताओं का कहना है कि अगर प्रांत का बंटवारा किया गया तो कानून-व्यवस्था पर इसका क्या असर पड़ेगा, यह कहना मुश्किल होगा.
क्या है नए प्रांत बनाने का प्रस्ताव?
पाकिस्तान सरकार की ओर से देश के मौजूदा चार प्रांतों को 12 से 15 प्रांतों में बांटने का प्रस्ताव सामने आया है. कई राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं और पीपीपी भी इनमें शामिल है. दूसरी तरफ पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी नए प्रांत बनाने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं. उनका कहना है कि प्रशासन को बेहतर तरीके से चलाने के लिए नए प्रांत बनाए जा सकते हैं. इस मुद्दे ने पाकिस्तान की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है.
Sindh revolts against Asim Munir.
— Abhijit Majumder (@abhijitmajumder) September 6, 2026
Sindh assembly rejects Pakistan 🇵🇰 defence chief’s proposal to divide the province, divert Sindh’s water to Punjab.
Warns of Sindh turning into another separatist and lawless Balochistan. pic.twitter.com/iY2QzOP3yz
पीपीपी नेता और पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी फिलहाल लंदन में हैं. माना जा रहा है कि नए प्रांत बनाने के मुद्दे को लेकर उनकी नाराजगी भी सामने आई है. पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने लंदन जाकर जरदारी से मुलाकात भी की है. हालांकि, जरदारी फिलहाल सिंध और बलूचिस्तान को बांटकर नए प्रांत बनाने के पक्ष में नहीं बताए जा रहे हैं.
सिंध और बलूचिस्तान के बंटवारे से नुकसान
आसिफ अली जरदारी सिंध और बलूचिस्तान में तुरंत नए प्रांत बनाने के खिलाफ हैं. इसकी एक बड़ी वजह राजनीतिक नुकसान को माना जा रहा है. सिंध पीपीपी का मजबूत आधार है और इसके बंटवारे का पार्टी की राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है.
वहीं, बलूचिस्तान पहले से ही सुरक्षा समस्याओं और उग्रवादी हिंसा से जूझ रहा है. ऐसे में वहां नए प्रांत बनाने का मुद्दा भी बेहद संवेदनशील है. फिलहाल सिंध और बलूचिस्तान को लेकर पाकिस्तान की राजनीति में यह मामला लगातार गर्माता जा रहा है.
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