अगर आप मोबाइल रिचार्ज पर हर महीने तय बजट रखते हैं, तो आने वाले समय में यह बजट बिगड़ सकता है. इस साल मोबाइल यूजर्स को अपनी जेब और ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है, क्योंकि टेलीकॉम कंपनियां एक बार फिर टैरिफ बढ़ाने की तैयारी में हैं. करीब दो साल के अंतराल के बाद कंपनियां रिचार्ज प्लान महंगे कर सकती हैं, जिसका सीधा असर करोड़ों ग्राहकों पर पड़ेगा.
एक रिपोर्ट के मुताबिक, जून के आसपास मोबाइल टैरिफ में औसतन 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है. माना जा रहा है कि इससे वित्तीय वर्ष 2027 में टेलीकॉम सेक्टर की कमाई में तेज उछाल आएगा और रेवेन्यू ग्रोथ लगभग दोगुनी हो सकती है.
क्यों दबाव में हैं टेलीकॉम कंपनियां
बीते कुछ समय से टेलीकॉम कंपनियों की कमाई की रफ्तार सुस्त पड़ी है. सितंबर तिमाही में इस सेक्टर की रेवेन्यू ग्रोथ घटकर करीब 10 प्रतिशत रह गई थी, जबकि इससे पहले लगातार चार तिमाहियों में यह आंकड़ा 14 से 16 प्रतिशत के बीच बना हुआ था. कम होते मुनाफे ने कंपनियों को एक बार फिर टैरिफ बढ़ाने पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है. जानकारों का कहना है कि जैसे ही रिचार्ज प्लान महंगे होंगे, कंपनियों के एवरेज रेवेन्यू पर यूजर यानी ARPU में सुधार दिखने लगेगा. इससे उनकी आय को स्थिरता मिलने की उम्मीद है.
5G निवेश का दबाव हुआ कम
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अब 5G नेटवर्क के बड़े स्तर पर रोलआउट का काम लगभग पूरा हो चुका है. ऐसे में इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश का दौर खत्म माना जा रहा है. इससे टेलीकॉम कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका कम हो गई है और आने वाले समय में उनके मार्जिन बेहतर हो सकते हैं. यही वजह है कि कंपनियां अब टैरिफ बढ़ाकर अपनी कमाई को मजबूत करना चाहती हैं.
पहले भी चुपचाप बढ़े थे दाम
पिछले साल नवंबर में भी कुछ टेलीकॉम कंपनियों ने चुनिंदा प्लान्स के रेट बढ़ाकर ग्राहकों को झटका दिया था. वोडाफोन आइडिया ने अपने 1999 रुपये वाले सालाना प्लान की कीमत में करीब 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी, जबकि 84 दिनों की वैलिडिटी वाले प्लान को 7 प्रतिशत महंगा कर दिया गया था. वहीं भारती एयरटेल ने अपने सबसे सस्ते वॉइस-ओनली प्लान की कीमत 189 रुपये से बढ़ाकर 199 रुपये कर दी थी.
सरकारी कंपनी BSNL ने भले ही सीधे रेट न बढ़ाए हों, लेकिन उसने अपने एंट्री-लेवल प्रीपेड प्लान्स की वैलिडिटी घटाकर ग्राहकों पर अप्रत्यक्ष बोझ डाल दिया था. कुल मिलाकर इन बदलावों का असर अंत में आम यूजर की जेब पर ही पड़ा. अब अगर इस साल फिर से टैरिफ बढ़ते हैं, तो मोबाइल सेवाएं पहले से ज्यादा महंगी हो सकती हैं और ग्राहकों को हर रिचार्ज पर अतिरिक्त खर्च के लिए तैयार रहना होगा.
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