तेलंगाना के संगारेड्डी जिले में एक ऐसी घटना घटी है, जिसने न सिर्फ परिवार को बल्कि हर किसी को हिला कर रख दिया. यहां एक 25 वर्षीय विवाहिता, मनीषा, ने चींटियों के असहनीय डर से तंग आकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर दी. यह घटना न केवल एक मानसिक बीमारी के भयानक असर को उजागर करती है, बल्कि यह इस बात का भी उदाहरण है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता की कितनी कमी है.
मनीषा का संघर्ष: माइर्मेकोफोबिया से जूझती महिला
मनीषा को एक खतरनाक मनोवैज्ञानिक बीमारी, माइर्मेकोफोबिया, से जूझना पड़ रहा था, जिसे आम भाषा में 'चींटियों का भय' कहा जाता है. यह एक गंभीर स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को चींटियों के ख्याल से भी अत्यधिक डर लगता है. मनीषा के लिए यह डर केवल मानसिक अस्वस्थता का कारण नहीं बन गया, बल्कि उसने उसके जीवन की खुशियां भी छीन लीं. उसके परिवार ने उसे इलाज दिलाने की पूरी कोशिश की, और काउंसलिंग का सहारा लिया, लेकिन यह बीमारी इतनी गहरी हो चुकी थी कि मनीषा इससे उबरने में असमर्थ महसूस करने लगी थी.
एक जंगली डर से ग्रसित जीवन
मनीषा के जीवन में चींटियों का डर इतनी गहराई से समा चुका था कि वह सामान्य जीवन जीने में सक्षम नहीं हो पा रही थी. उसका यह डर इतनी अधिक मानसिक तकलीफ का कारण बन चुका था कि वह खुद को इस स्थिति से बाहर नहीं देख रही थी. मनीषा का डर उसकी निजी जिंदगी पर इस हद तक हावी हो गया था कि उसने परिवार और अपने बच्चों के साथ बिताए गए प्यारे पलों को भी खो दिया. उसका यह मानसिक संघर्ष न केवल उसे, बल्कि उसके परिवार को भी दिक्कतों से गुजरने पर मजबूर कर रहा था.
घातक रात: एक महिला की आखिरी खामोशी
4 नवंबर, 2025 को मनीषा के पति श्रीकांत ने जब घर लौटकर देखा, तो उनका सामना एक भयावह सन्नाटे से हुआ. बेडरूम का दरवाजा बंद था और काफी समय तक अंदर से कोई जवाब नहीं मिला. श्रीकांत ने सोचा कि शायद मनीषा सो रही होगी, लेकिन जब वह दरवाजा खोलने की कोशिश की और कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़ दिया. अंदर का दृश्य देखकर उनकी आत्मा कांप उठी. मनीषा पंखे से लटकी हुई थी, और उसकी आत्महत्या ने सभी को हिलाकर रख दिया.
मनीषा का सुसाइड नोट: दर्द का संदेश
तेलंगाना पुलिस को कमरे में मनीषा का एक सुसाइड नोट मिला, जो उसके दर्द की कहानी बयां कर रहा था. उसने अपने पति को संबोधित करते हुए लिखा, ‘श्री.. आई एम सॉरी, मैं इन चींटियों के साथ नहीं जी सकती हूं.’ अपनी बेटी अन्वी के लिए मां का आखिरी संदेश था- ‘बेटी अन्वी का ध्यान रखना.’ मनीषा के सुसाइड नोट ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है.
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