भारतीय सेना ने तैनात किए रोबोटिक डॉग्स, वीडियो देख हो जाएगा जोश हाई, जानें ताकत और खासियत

    भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए अपनी क्षमताओं में एक और अहम इजाफा किया है.

    Specialty of robotic dogs deployed by Indian Army watch video
    Image Source: Social Media

    भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए अपनी क्षमताओं में एक और अहम इजाफा किया है. सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाने और जोखिम भरे इलाकों में ऑपरेशन को आसान बनाने के उद्देश्य से सेना ने रोबोटिक डॉग्स को तैनात किया है. इन अत्याधुनिक मशीनों को मल्टी-यूटिलिटी लेग्ड इक्विपमेंट सिस्टम (MULES) नाम दिया गया है.

    ये रोबोटिक डॉग्स देखने में असली कुत्तों जैसे लगते हैं और उसी तरह चलने, दौड़ने और संतुलन बनाने में सक्षम हैं. इनका इस्तेमाल खासतौर पर उन जगहों पर किया जाएगा, जहां मानव सैनिकों के लिए पहुंचना जोखिम भरा होता है.

    सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

    भारतीय सेना द्वारा साझा किया गया रोबोटिक डॉग्स का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में देखा जा सकता है कि ये रोबोटिक डॉग्स सेना के जवानों के साथ पूरी तालमेल में मार्च करते नजर आ रहे हैं. इनकी चाल और संतुलन देखकर साफ है कि इन्हें कठिन से कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए तैयार किया गया है.

    वीडियो ने लोगों के बीच उत्साह पैदा कर दिया है और इसे भारतीय सेना की तकनीकी ताकत का प्रतीक माना जा रहा है.

    क्या है MULES की खासियत?

    मल्टी-यूटिलिटी लेग्ड इक्विपमेंट सिस्टम यानी MULES को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये कई तरह के सैन्य कार्यों में मदद कर सकें. ये रोबोटिक डॉग्स:

    • दुर्गम और ऊबड़-खाबड़ इलाकों में आसानी से चल सकते हैं
    • निगरानी और टोही मिशनों में उपयोगी हैं
    • विस्फोटक या खतरनाक सामग्री की पहचान में मदद कर सकते हैं
    • सैनिकों का बोझ कम करने के लिए सामान ढो सकते हैं

    इनका सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये जवानों को सीधे खतरे में जाने से बचा सकते हैं.

    सैनिकों की सुरक्षा में होगा बड़ा योगदान

    सेना के अधिकारियों के अनुसार, इन रोबोटिक डॉग्स का मुख्य उद्देश्य सैनिकों के लिए जोखिम को कम करना है. सीमावर्ती क्षेत्रों, आतंकवाद-रोधी अभियानों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान ये मशीनें बेहद कारगर साबित हो सकती हैं. भविष्य में इन्हें और अधिक उन्नत तकनीक से लैस करने की योजना भी है.

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीक आधुनिक सेनाओं के लिए अनिवार्य होती जा रही है और भारत इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

    श्रीलंका में मानवीय सहायता में भी भारतीय सेना

    इसी बीच भारतीय सेना ने पड़ोसी देश श्रीलंका में भी अपनी मानवीय भूमिका को मजबूत किया है. हाल ही में आए भीषण चक्रवात के कारण श्रीलंका के कई हिस्सों, विशेषकर जाफना क्षेत्र में सड़क और आवागमन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई थी.

    भारतीय सेना के इंजीनियरों ने ऑपरेशन सागर बंधु के तहत वहां क्षतिग्रस्त सड़कों को फिर से चालू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इस अभियान में भारतीय सेना ने श्रीलंकाई सेना और रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी (RDA) के साथ मिलकर काम किया.

    ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत सहयोग

    श्रीलंका में की गई यह सहायता भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को दर्शाती है. भारतीय सेना ने आपदा प्रभावित इलाकों में संचार मार्ग बहाल कर स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को सामान्य बनाने में मदद की.

    सेना के अनुसार, इस तरह की मानवीय सहायता भारत और श्रीलंका के बीच सहयोग और विश्वास को और मजबूत करती है.

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