तकनीक ने घरों को पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट बना दिया है. अब एक आवाज पर लाइटें जल जाती हैं, रोबोट वैक्यूम अपने आप सफाई कर देता है, स्मार्ट टीवी आपकी पसंद का कंटेंट सुझाता है और सीसीटीवी कैमरे हर पल घर की निगरानी करते हैं. लेकिन जिस तकनीक ने जिंदगी को आसान बनाया है, वही आपकी निजी जिंदगी की सबसे ज्यादा जानकारी भी अपने पास जमा कर रही है. इंटरनेट से जुड़े स्मार्ट डिवाइस हर समय आपके घर, आपकी दिनचर्या और आपकी आदतों से जुड़ा डेटा रिकॉर्ड करते रहते हैं. अगर इनकी सुरक्षा में जरा सी भी चूक हो जाए तो यही जानकारी साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन सकती है. दुनिया भर की साइबर सुरक्षा एजेंसियों और रिसर्च संस्थानों ने कई बार ऐसे मामलों का खुलासा किया है, जहां स्मार्ट गैजेट्स से निजी डेटा लीक हुआ या हैकर्स ने लोगों की निजी जिंदगी में सेंध लगा दी. ऐसे में सवाल यह है कि क्या स्मार्ट होम वास्तव में पूरी तरह सुरक्षित हैं?
स्मार्ट डिवाइस आखिर इतना डेटा क्यों इकट्ठा करते हैं?
स्मार्ट होम तकनीक का आधार डेटा है. स्मार्ट टीवी, स्मार्ट स्पीकर, रोबोट वैक्यूम क्लीनर, वाईफाई सीसीटीवी कैमरे और दूसरे IoT डिवाइस लगातार इंटरनेट से जुड़े रहते हैं. इनमें मौजूद कैमरे, माइक्रोफोन, मोशन सेंसर और अन्य सेंसर आसपास के माहौल और यूजर की गतिविधियों को समझने के लिए लगातार जानकारी जुटाते हैं.
इसी डेटा की मदद से ये डिवाइस आपकी पसंद को पहचानते हैं, ऑटोमेशन करते हैं और बेहतर अनुभव देने की कोशिश करते हैं. लेकिन यही डेटा अगर गलत हाथों में पहुंच जाए तो आपकी निजी जिंदगी का पूरा रिकॉर्ड किसी अजनबी के पास भी पहुंच सकता है.
कैसे सामने आए प्राइवेसी के मामले?
साइबर सुरक्षा से जुड़ी कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों ने यह दिखाया है कि स्मार्ट डिवाइस केवल सुविधा का साधन नहीं बल्कि डेटा संग्रह का बड़ा माध्यम भी हैं. एक चर्चित जांच में सामने आया कि एक लोकप्रिय ब्रांड के रोबोट वैक्यूम क्लीनर से रिकॉर्ड हुई घर के अंदर की निजी तस्वीरें इंटरनेट तक पहुंच गई थीं. रिपोर्ट के अनुसार ये तस्वीरें पहले क्लाउड सर्वर पर अपलोड हुईं और बाद में डेटा प्रोसेसिंग के दौरान सार्वजनिक प्लेटफॉर्म तक पहुंच गईं.
इसी तरह स्मार्ट टीवी में मौजूद ऑटोमैटिक कंटेंट रिकग्निशन (ACR) तकनीक यह रिकॉर्ड करती है कि यूजर कौन-सा कंटेंट देख रहा है. कई सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ डिवाइस वॉयस कमांड के साथ अन्य बातचीत से जुड़ी जानकारी भी रिकॉर्ड कर सकते हैं, जिससे प्राइवेसी को लेकर चिंता बढ़ जाती है.
वाईफाई कैमरे और बेबी मॉनिटर क्यों बन रहे हैं आसान निशाना?
घरों में लगाए जाने वाले वाईफाई सीसीटीवी कैमरे और बेबी मॉनिटर चौबीसों घंटे इंटरनेट से जुड़े रहते हैं. यही वजह है कि साइबर अपराधियों की नजर सबसे पहले इन्हीं डिवाइसों पर रहती है.
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यदि कैमरे का पासवर्ड कमजोर हो, फर्मवेयर पुराना हो या सुरक्षा अपडेट समय पर न किए जाएं, तो हैकर्स इनके सिस्टम में सेंध लगा सकते हैं. कई मामलों में अपराधियों ने कैमरों का कंट्रोल हासिल कर लाइव वीडियो तक एक्सेस कर लिया. यही कारण है कि साइबर एक्सपर्ट्स नियमित अपडेट, मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को बेहद जरूरी मानते हैं.
हैकर्स के लिए आपकी दिनचर्या भी होती है कीमती जानकारी
साइबर अपराधियों की दिलचस्पी केवल आपकी तस्वीरों या वीडियो तक सीमित नहीं होती. स्मार्ट डिवाइस आपकी रोजमर्रा की आदतों की भी पूरी तस्वीर तैयार कर सकते हैं. इनसे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि आप कब घर से बाहर जाते हैं, कब वापस लौटते हैं, घर में कितने लोग रहते हैं और किस समय घर खाली रहता है. स्मार्ट स्पीकर आपकी आवाज के सैंपल भी रिकॉर्ड करते हैं. यदि यह डेटा गलत हाथों में पहुंच जाए तो एआई वॉयस क्लोनिंग जैसी तकनीकों के जरिए ऑनलाइन धोखाधड़ी की आशंका बढ़ सकती है. वहीं स्मार्ट लॉक या सीसीटीवी सिस्टम हैक होने की स्थिति में घर की सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता है.
कुछ आसान बदलाव आपकी प्राइवेसी को बना सकते हैं मजबूत
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि थोड़ी सी सावधानी से स्मार्ट होम को काफी हद तक सुरक्षित बनाया जा सकता है. सबसे पहले वाईफाई राउटर का डिफॉल्ट यूजरनेम और पासवर्ड बदलना चाहिए और मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करना चाहिए.
स्मार्ट डिवाइस को मुख्य नेटवर्क के बजाय अलग गेस्ट नेटवर्क पर जोड़ना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. स्मार्ट टीवी में मौजूद व्यूइंग डेटा कलेक्शन और एसीआर जैसे फीचर्स जरूरत न होने पर बंद किए जा सकते हैं. यदि टीवी में कैमरा मौजूद है और उसका उपयोग नहीं किया जाता तो कैमरा कवर लगाना बेहतर विकल्प हो सकता है.
स्मार्ट स्पीकर की वॉयस हिस्ट्री समय-समय पर डिलीट करनी चाहिए और आवश्यकता न होने पर माइक्रोफोन म्यूट रखना चाहिए. वहीं सीसीटीवी कैमरे और रोबोट वैक्यूम जैसे उपकरणों में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय रखना सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जोड़ता है.
सिर्फ फीचर्स नहीं, सिक्योरिटी भी बनाएं खरीदारी का आधार
आज अधिकांश लोग नया स्मार्ट गैजेट खरीदते समय कैमरा, डिस्प्ले, डिजाइन या कीमत पर ज्यादा ध्यान देते हैं, जबकि सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को नजरअंदाज कर देते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी स्मार्ट डिवाइस को खरीदने से पहले यह जरूर देखना चाहिए कि कंपनी कितनी नियमित रूप से सिक्योरिटी अपडेट जारी करती है और उसकी प्राइवेसी पॉलिसी कितनी पारदर्शी है. विश्वसनीय ब्रांड आमतौर पर लंबे समय तक सुरक्षा अपडेट उपलब्ध कराते हैं, जिससे साइबर हमलों का खतरा कम हो जाता है.
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