शुभमन गिल की कप्तानी का आगाज़ फीका, बल्ला भी खामोश...क्या दबाव ले रहा है युवा कप्तान?

भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे शुभमन गिल से इस वक्त जितनी उम्मीदें जुड़ी हैं, उतनी शायद ही किसी युवा खिलाड़ी से पहले रहीं हों. कभी अपने शानदार कवर ड्राइव और धैर्य भरी बल्लेबाज़ी के लिए सराहे जाने वाले गिल अब टीम इंडिया के नए कप्तान और तीनों फॉर्मेट के अहम सदस्य हैं.

Shubman Gill not played well in 9 matches scored only 43 runs
Image Source: Social Media

भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे शुभमन गिल से इस वक्त जितनी उम्मीदें जुड़ी हैं, उतनी शायद ही किसी युवा खिलाड़ी से पहले रहीं हों. कभी अपने शानदार कवर ड्राइव और धैर्य भरी बल्लेबाज़ी के लिए सराहे जाने वाले गिल अब टीम इंडिया के नए कप्तान और तीनों फॉर्मेट के अहम सदस्य हैं. लेकिन जिम्मेदारी बढ़ने के साथ उनका प्रदर्शन उलटा रुख लेता दिखाई दे रहा है.

हाल ही में संपन्न ऑस्ट्रेलिया दौरे की वनडे सीरीज़ में शुभमन गिल न बल्ले से चमके, न कप्तान के तौर पर अपनी छाप छोड़ पाए. तीन मैचों की सीरीज़ में भारत को एक जीत जरूर मिली, मगर गिल की व्यक्तिगत फॉर्म चिंता का कारण बन गई है.

कप्तानी की नई पारी, मगर नतीजे उम्मीदों के उलट

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यह वनडे सीरीज़ गिल के लिए बतौर कप्तान पहला बड़ा इम्तिहान थी. इंग्लैंड दौरे पर उन्होंने टेस्ट टीम की कमान संभालते हुए शानदार प्रदर्शन किया था. वहीं से उम्मीदें भी बढ़ीं. लेकिन ऑस्ट्रेलियाई सरज़मीं पर उनका बल्ला खामोश रहा. तीनों वनडे मैचों में उनके स्कोर रहे — 24, 9 और 10 रन, यानी कुल सिर्फ 43 रन. आखिरी मुकाबले में हालांकि भारतीय टीम ने जीत दर्ज की और गिल थोड़ी लय में दिखे, पर बड़ी पारी खेलने से पहले ही पवेलियन लौट गए.

लगातार नौ पारियों से दूर है अर्धशतक

शुभमन गिल का यह संघर्ष सिर्फ ऑस्ट्रेलिया दौरे तक सीमित नहीं है. उनकी खराब फॉर्म की शुरुआत सितंबर 2025 के एशिया कप से हुई थी. उस टी20 टूर्नामेंट में उप-कप्तान के तौर पर उन्होंने सभी मैच खेले, लेकिन एक भी बड़ी पारी नहीं खेल सके. सुपर-4 में पाकिस्तान के खिलाफ 28 गेंदों पर 47 रन की एक चमकदार पारी जरूर आई, लेकिन उसके बाद गिल की बल्लेबाज़ी लगातार फीकी रही. अगर एशिया कप और वनडे सीरीज़ की पारियां मिलाई जाएं, तो गिल ने लगातार नौ पारियों में एक भी अर्धशतक नहीं लगाया.

लाल गेंद में लय, सफेद गेंद में जंग

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ महीने पहले तक शुभमन को टेस्ट क्रिकेट में अस्थिर प्रदर्शन को लेकर आलोचना झेलनी पड़ रही थी, जबकि वनडे और टी20 में वो रन मशीन साबित हो रहे थे. अब हालात उलट गए हैं. लाल गेंद से चमकते गिल सफेद गेंद से जूझ रहे हैं. टीम इंडिया के भीतर भी अब यह चर्चा बढ़ रही है कि कप्तानी की जिम्मेदारी का दबाव कहीं उनके खेल को प्रभावित तो नहीं कर रहा.

टी20 सीरीज़ बनेगी अगली परीक्षा

गिल के पास अब अपने आलोचकों को जवाब देने का मौका है. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाली पांच मैचों की टी20 सीरीज़ उनके लिए बेहद अहम साबित हो सकती है. अगर गिल इन मुकाबलों में 2-3 अच्छी पारियां खेल पाते हैं, तो टीम मैनेजमेंट की चिंता कम होगी और उनका आत्मविश्वास भी लौट सकता है.

यह भी पढ़ें: साउथ अफ्रीका पर कहर बनकर टूटी ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज, 7 विकेट चटकाकर तोड़ा 43 साल पुराना रिकॉर्ड