Share Market Crash: लगातार तीन सत्रों की तेजी के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही. प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी करीब 1% की गिरावट के साथ खुले, जिससे बाजार में अचानक दबाव देखने को मिला. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1.05% गिरकर 73,326.61 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 0.9% फिसलकर 22,771.75 के स्तर पर आ गया.
बाजार खुलते ही बड़ी कंपनियों के शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई. इस गिरावट का असर इतना तेज था कि कुछ ही सेकंड के भीतर बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 4.24 लाख करोड़ रुपये घट गया. अनुमान के मुताबिक निवेशकों को करीब 4 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा.
किन शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव
शुरुआती कारोबार में कई बड़े और प्रमुख शेयरों में गिरावट देखी गई. खासतौर पर IndiGo, Zomato की पैरेंट कंपनी Eternal, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), एक्सिस बैंक और एशियन पेंट्स जैसे शेयरों में लगभग 2 से 3 प्रतिशत तक की कमजोरी आई.
हालांकि बाजार पूरी तरह लाल नहीं था. कुछ आईटी और फाइनेंस सेक्टर के शेयरों में हल्की बढ़त भी देखने को मिली. बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक और आईटीसी जैसे शेयर हरे निशान में कारोबार कर रहे थे, लेकिन इनकी बढ़त सीमित रही.
सेक्टोरल इंडेक्स का हाल
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो ऑटो सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिला. निफ्टी ऑटो इंडेक्स शुरुआती घंटों में 2% से ज्यादा गिर गया. इसके अलावा निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में भी करीब 1.9% की गिरावट दर्ज की गई.
इसके उलट, निफ्टी मेटल इंडेक्स में लगभग 0.7% की बढ़त देखने को मिली, जो बाजार में कुछ राहत का संकेत था. वहीं, बाजार की अस्थिरता को दर्शाने वाला इंडिया VIX करीब 2% उछल गया, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी.
एनएसई पर बाजार की चौड़ाई (market breadth) भी मिश्रित रही. करीब 1,105 शेयरों में गिरावट दर्ज हुई, जबकि 1,398 शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे और 82 शेयरों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ.
गिरावट के पीछे क्या रहे प्रमुख कारण?
1. वैश्विक तनाव और अमेरिका-ईरान बयानबाजी
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखा. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिए, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान उनकी शर्तें नहीं मानता, तो गंभीर कार्रवाई की जा सकती है.
इसी बीच इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया. हालांकि इससे पहले ऐसी खबरें आई थीं कि दोनों देशों के बीच किसी समझौते की संभावना बन सकती है, जिससे बाजार में तेजी आई थी.
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
तेल की कीमतों में लगातार तेजी भी बाजार गिरने की बड़ी वजह रही. ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 111 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया.
ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलस्ट्रेट में संभावित बाधा के कारण सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. इससे ऊर्जा लागत बढ़ने की आशंका है, जिसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार पर पड़ता है.
3. बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी
अमेरिका के सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न (यील्ड) बढ़ने लगा है. जब बॉन्ड यील्ड ऊपर जाती है, तो निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं.
इस बदलाव से शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है, जिसका असर मंगलवार को साफ देखने को मिला.
4. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वे पिछले 24 कारोबारी सत्रों से लगातार शेयर बेच रहे हैं.
सोमवार को ही विदेशी निवेशकों ने करीब 8,167 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए. लगातार हो रही इस बिकवाली ने बाजार की मजबूती को कमजोर कर दिया है, भले ही घरेलू निवेशक खरीदारी कर रहे हों.
5. मुनाफावसूली (Profit Booking)
बाजार में आई गिरावट का एक बड़ा कारण प्रॉफिट बुकिंग भी रहा. पिछले तीन दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 3% तक की बढ़त हुई थी.
ऐसे में कई निवेशकों ने सही समय देखते हुए अपने मुनाफे को सुरक्षित करना बेहतर समझा और शेयर बेचने शुरू कर दिए. इससे बाजार में अचानक दबाव बढ़ गया और इंडेक्स नीचे आ गए.
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