कोरोना महामारी की यादें अभी पूरी तरह धुंधली भी नहीं हुई हैं कि रूस के साइबेरिया क्षेत्र में एक लैब कर्मचारी की मौत के बाद संभावित प्लेग संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ गई है. इरकुत्स्क क्षेत्र के शेलेखोव स्थित एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की 28 वर्षीय कर्मचारी दर्या शिपिलोवा की 2 अक्टूबर को मौत हो गई. रिपोर्टों में दावा किया गया कि वह लैब में काम के दौरान प्लेग बैक्टीरिया के संपर्क में आई थीं, हालांकि रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने अभी तक उनकी मौत को प्लेग से जोड़ने की पुष्टि नहीं की है.
टेस्ट ट्यूब टूटने के बाद बिगड़ी थी तबीयत
रिपोर्टों के मुताबिक, 25 सितंबर के आसपास शिपिलोवा के लैब में काम करते समय प्लेग के बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब टूटने की घटना हुई थी. इसके कुछ समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 2 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई. हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि टेस्ट ट्यूब टूटने और उनकी बीमारी के बीच सीधा संबंध अभी आधिकारिक तौर पर साबित नहीं हुआ है. रूसी स्वास्थ्य एजेंसी ने उनकी बीमारी को अज्ञात कारणों वाला निमोनिया बताया है.
मेडिकल निगरानी में 197 लोग
महिला की मौत के बाद उनके संपर्क में आए करीब 197 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है. इरकुत्स्क क्षेत्र में कुछ अस्पतालों में भी एहतियाती क्वारंटीन उपाय लागू किए गए हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, निगरानी में रखे गए लोगों में फिलहाल संक्रमण के लक्षण सामने नहीं आए हैं. प्रशासन ने संभावित जोखिम को देखते हुए स्वास्थ्य और सुरक्षा उपायों को बढ़ाया है.
क्या है न्यूमोनिक प्लेग और कितना खतरनाक?
प्लेग Yersinia pestis नामक बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है. इसका सामान्य रूप संक्रमित पिस्सुओं के काटने से फैलता है, जबकि न्यूमोनिक प्लेग फेफड़ों को प्रभावित करता है और संक्रमित व्यक्ति से निकलने वाले श्वसन कणों के जरिए दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, इलाज न मिलने पर न्यूमोनिक प्लेग तेजी से गंभीर और जानलेवा हो सकता है, लेकिन समय पर पहचान और एंटीबायोटिक उपचार से इसके इलाज की संभावना काफी बेहतर होती है.
प्लेग का इतिहास रहा है बेहद भयावह
मानव इतिहास में प्लेग की कई बड़ी महामारियां दर्ज हैं, जिनमें 14वीं सदी की ब्लैक डेथ सबसे कुख्यात रही. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, उस दौर में यूरोप में 5 करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. हालांकि आज की स्थिति ऐतिहासिक महामारियों से अलग है, क्योंकि प्लेग की पहचान और इलाज के लिए प्रभावी एंटीबायोटिक्स उपलब्ध हैं. यही वजह है कि संदिग्ध मामलों में जल्द जांच और उपचार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
रूस में बढ़ाई गई निगरानी, स्थिति पर नजर
महिला कर्मचारी की मौत के बाद इरकुत्स्क क्षेत्र में स्वास्थ्य अधिकारियों ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं. कई अस्पतालों में क्वारंटीन उपायों की रिपोर्ट सामने आई है और संपर्क में आए लोगों की निगरानी की जा रही है. वहीं रूसी स्वास्थ्य निगरानी एजेंसी ने क्षेत्र की महामारी संबंधी स्थिति को स्थिर बताया है और कहा है कि मृत कर्मचारी के नमूनों में प्लेग के रोगजनक नहीं मिले. ऐसे में फिलहाल इसे प्लेग का पुष्ट प्रकोप कहना जल्दबाजी होगी.
प्लेग की आशंका ने बढ़ाई चिंता, जांच जारी
इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि लैब कर्मचारी की मौत और प्लेग संक्रमण के बीच संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. दूसरी ओर, लैब हादसे और संभावित न्यूमोनिक प्लेग को लेकर सामने आई रिपोर्टों के कारण स्वास्थ्य एजेंसियां सावधानी बरत रही हैं. WHO के अनुसार, न्यूमोनिक प्लेग का संदेह होने पर मरीजों को अलग रखना, करीबी संपर्कों की निगरानी करना और जरूरत पड़ने पर जल्द उपचार शुरू करना संक्रमण नियंत्रण के महत्वपूर्ण कदम हैं.
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