बच्चे नहीं बना पाएंगे Facebook-Instagram! नाबालिगों के सोशल मीडिया यूज पर लगेगी रोक? सरकार का बड़ा प्लान

कम उम्र में सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर ऑनलाइन सुरक्षा और दूसरी परेशानियों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. अब केंद्र सरकार नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है.

Restrictions to be imposed on social media use by minors Changes to IT rules
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Social Media Rules: फेसबुक, इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय हैं. लेकिन कम उम्र में सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर ऑनलाइन सुरक्षा और दूसरी परेशानियों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. अब केंद्र सरकार नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है.

मौजूदा जानकारी के मुताबिक सरकार 18 साल से कम उम्र के लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर आईटी इंटरमीडियरी रूल्स में नए प्रावधान जोड़ने पर विचार कर रही है. इसका मकसद नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाने और इस्तेमाल करने की व्यवस्था को ज्यादा सख्त बनाना है. हालांकि, नए नियमों का अंतिम स्वरूप और उन्हें लागू करने का तरीका संशोधन के बाद ही साफ होगा.

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बढ़ी हलचल

नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल का मुद्दा हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में भी उठा. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारत के उन कानूनों का पालन करना चाहिए, जो नाबालिगों से जुड़े हैं.

कोर्ट एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए मजबूत व्यवस्था बनाने की मांग की गई है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर विचार किया कि सोशल मीडिया अकाउंट बनाते समय यूजर को प्लेटफॉर्म की शर्तों को स्वीकार करना पड़ता है. ऐसे में नाबालिगों के खुद से इस तरह के कानूनी समझौते करने पर सवाल उठता है.

18 साल की उम्र को लेकर क्या है मामला?

याचिका में नाबालिगों के सोशल मीडिया अकाउंट पर रोक लगाने और उनकी ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कड़े उपाय करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई बच्चे कम उम्र में अकाउंट बना लेते हैं और कई बार जन्मतिथि भी गलत दर्ज कर देते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से यह देखने को कहा है कि क्या मौजूदा कानूनों के तहत ऐसे नियम बनाए जा सकते हैं, जिनसे 18 साल से कम उम्र के बच्चे अपनी मर्जी से सोशल मीडिया अकाउंट न बना सकें. कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या माता-पिता की सहमति जैसी व्यवस्था लागू की जा सकती है.

सिर्फ गाइडलाइन नहीं, कानूनी प्रावधान पर जोर

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने संकेत दिया कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियम सिर्फ गाइडलाइन तक सीमित नहीं रहने चाहिए. इन्हें कानूनी और वैधानिक व्यवस्था का हिस्सा बनाने पर भी विचार होना चाहिए.

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सरकार इस मुद्दे पर जरूरी कदमों पर विचार करेगी. अब केंद्र की ओर से आईटी नियमों में बदलाव की संभावना देखी जा रही है.

बच्चों के सामने कौन-कौन से खतरे?

सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है. याचिका में ऑनलाइन ग्रूमिंग, साइबरबुलिंग, सेक्सटॉर्शन, यौन शोषण और बच्चों के निजी डेटा के गलत इस्तेमाल जैसे खतरों का जिक्र किया गया है.

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कई प्लेटफॉर्म उम्र की जांच के लिए यूजर की ओर से दर्ज की गई जन्मतिथि पर निर्भर करते हैं. ऐसे में कम उम्र के बच्चे भी अकाउंट बनाने में सफल हो सकते हैं. इसी वजह से उम्र की सही जांच और बच्चों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत बताई गई है.

क्या बच्चों के लिए इंटरनेट पूरी तरह बंद होगा?

याचिका में बच्चों की इंटरनेट तक पूरी पहुंच बंद करने की मांग नहीं की गई है. जोर इस बात पर है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय बच्चों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा हो.

इसके लिए माता-पिता या अभिभावक की सहमति जैसी व्यवस्था पर विचार करने की मांग की गई है. साथ ही ऐसे तकनीकी उपायों की बात भी सामने आई है, जिनसे कम उम्र के बच्चे खुद से सोशल मीडिया अकाउंट न बना सकें.

अब सरकार को लेना है फैसला

फिलहाल 18 साल से कम उम्र के लोगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर अंतिम नियम लागू नहीं हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद केंद्र सरकार इस मुद्दे पर कानूनी विकल्पों की जांच कर रही है. अगर आईटी नियमों में बदलाव किया जाता है तो सोशल मीडिया कंपनियों के लिए नाबालिगों के अकाउंट को लेकर नई जिम्मेदारियां तय हो सकती हैं.

इस पूरे मामले में अगला कदम केंद्र सरकार की ओर से उठाया जाना है. इसके बाद ही साफ होगा कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर क्या व्यवस्था लागू की जाती है.